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जीएसटी : गलत जानकारी दी तो होगी 5 साल की सजा

Ratlam News - 1 जुलाई 2017 से शुरू हुआ जीएसटी धीरे-धीरे सख्त होता जा रहा है। अब इसमें सजा का प्रावधान करना भी शुर कर दिया गया है। इस...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:31 AM IST
Ratlam News - gst incorrect information given will be punished for 5 years
1 जुलाई 2017 से शुरू हुआ जीएसटी धीरे-धीरे सख्त होता जा रहा है। अब इसमें सजा का प्रावधान करना भी शुर कर दिया गया है। इस प्रावधान के चलते फर्जी बिल लगाने, गलत जानकारी देने या आपूर्ति के बिना चालान जारी करने वाले कारोबारियों को पांच साल तक की सजा भुगतना होगी। यह सजा स्लैब वाइस निर्धारित की गई है। जबकि अभी तक जुर्माने का प्रावधान था। अब जुर्माने के साथ सजा का प्रावधान शुरू किया है।

जीएसटी लागू होने के बाद सरकार ने इसमें अब तक कई अमेंडमेंट किए है। अब सरकार ने सजा का प्रावधान भी शुरू कर दिया है। यदि कोई कारोबारी विभाग को गलत जानकारी देगा तो उसे जुर्माने के साथ सजा भी दी जाएगी। टर्नओवर और अपराध की प्रवृत्ति के आधार पर ये सजा मिलेगी। लगातार बगैर माल बेचे जीएसटी का लाभ उठाने की लगातार शिकायतें मिलने और प्रकरण आने के बाद सरकार ने ये फैसला लिया है। सरकार की इस सख्ती से व्यापारियों में नाराजी है। व्यापारियों का कहना है कि हर व्यापारी बदमाशी नहीं करता लेकिन सजा का प्रावधान कर व्यापारियों का डराया जा रहा है।

ये तय की अपराध की प्रकृति










जीएसटी में ये प्रावधान किए




4. एक करोड़ रुपए से अधिक है लेकिन दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है। वित्तीय रिकार्ड को गलत साबित करता है या फर्जी खाते बनाता है या रोकता है कोई अफसर से निर्वहन उनके कर्तव्यों या किसी भी भौतिक साक्ष्य या दस्तावेज को नष्ट कर देता है- जुर्माना के साथ एक साल छह महीने या साथ में ठीक या दोनों

5. अपराध फिर से किया- दूसरे के लिए जुर्माने के साथ पांच साल तथा प्रत्येक आगामी अपमान

सीए कंपनियां प्रलोभन दे रहीं, इसलिए सजा का प्रावधान

उत्तर भारत में कई सीए कंपनियां ऐसी थी जो बगैर कारोबार के जीएसटी से लाखों रुपए कमाने का प्रलोभन व्यापारियों को दे रही थी। इनमें से कुछ कंपनियां सरकार की पकड़ में आई है। वहीं एक ही ई वे बिल के जरिए कई जगह माल जाना भी मिलना है। इस पर सरकार ने सजा का प्रावधान शुरू किया है।

आने वाले समय में ई वे बिल ही होगा इनवास

आने वाले दिनों में ई वे बिल ही इनवास माना जाएगा। इसे लागू करने की तैयारी की जा रही है। अभी ई वे बिल के बाद भी बिल बनाना पड़ते हैं। आगामी दिनों में ई वे बिल को ही इनवास माना जाएगा।

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