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  • If the City Bus has not been approved, then the operator has got his name written on the root by erasing the service.

रतलाम / सिटी बस की मंजूरी नहीं मिली तो सूत्र सेवा मिटाकर संचालक ने अपना नाम लिख रूट पर उतारी बस



फाइल फोटो फाइल फोटो
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  • बस संचालक और प्रशासन में नहीं बन पा रही थी रूट की बसों को लेकर सहमति 
  • अफसरों की जब इच्छा होगी तब शहर में हम सिटी बस भी चला देंगे 

Dainik Bhaskar

Jul 24, 2019, 11:38 AM IST

रतलाम. शहर की सिटी बस योजना फिलहाल के लिए फेल हो गई हैं। बसें खरीदने के बाद छह माह से शुरू नहीं हो पाई सिटी बस योजना से नाराज संचालक ने बस पर लिखा सूत्र सेवा मिटाकर खुद का नाम लिखकर बस को इंदौर रूट पर उतार दिया है। दूसरी बस के लिए नीमच का परमिट मांगा है एक बस चलाने से पहले कंपनी को वापस भेज दी है। 


नगर निगम व जिला प्रशासन का कहना है कि दो रूट के ठेके हुए हैं। दोनों रूट पर 6-6 बसें चलना है लेकिन संचालक ने तीन बसें ही खरीदी और बसें चलाने की अनुमति मांगी तो जिला प्रशासन व नगर निगम दोनों ने इंकार कर दिया। कम बसें चलाने की अनुमति न निगम व प्रशासन ने दी और नहीं संचालक पूरी बसें खरीदकर लाया। शहर में सूत्र सेवा योजना में चलने वाली सिटी बस शुरू नहीं हो पाई। 


कब तक बैठे सिटी बस के भरोसे, तीन किश्तें बाकी हो गई
अर्जुन शांति लिंक रोड एमडी बलवंत भाटी ने बताया कि तीन किश्तें बाकी हो गई है। एक बस साढ़े बाइस लाख की है, दो बसें धूल खा रही थी। सिटी बस योजना के भरोसे कब तक बैठते। अफसर सहयोग नहीं कर रहे इसलिए परमिट लेकर रूट पर उतार दी है। अफसरों की जब इच्छा होगी तब सिटी बस भी चला देंगे। 


जनता को उठाना पड़ रहा है यह खामियाजा 

  • सिटी बस सेवा शुरू नहीं होने से आज भी मेडिकल कॉलेज जाने के लिए लोगों को ऑटो का सहारा लेना पड़ रहा है क्योंकि वहां मैजिक भी कम ही जाती है। 
  • ऑटो का किराया 100 रुपए से ऊपर होता है जिससे मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और उनसे मिलने वाले अभिभावकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 
  • सिटी बस नहीं चलने से बाजना बस स्टैंड तक भी लोगों को ऑटो, मैटिक के भरोसे रहना पड़ रहा है। 
  • नीमच, बड़वानी के लिए सिटी बसें नहीं चलने से यात्रियों को निजी बस में ही सफर करना पड़ रहा है और ज्यादा रुपया चुकाना पड़ रहा है। 
  • नीमच जाने के लिए रतलाम से बैठते हैं यात्री तो कुछ बसें तो जावरा में ही उतार देती है और फिर यात्री को वहां से दूसरी बस पकड़ना पड़ती है या फिर मंदसौर उतार देते हैं तो वहां से दूसरी बस में जाना पड़ता है। 
  • आधी दूरी के बाद दूसरी बस में जब बैठाते हैं तो बस भरी हुई मिलती है और आगे का पूरा सफर यात्री को खड़े रहकर करना पड़ता है। 
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