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बस हादसा : प्रशासन और पुलिस की सख्ती से रूट पर से 20 प्रतिशत बसें हो गई कम, यात्रियों को उठाना पड़ रही परेशानी

पहले से ही बसों की कमी से परेशान यात्री अब और दिक्कतें उठाना पड़ रही हैं। विगत दिनों शामगढ़ क्षेत्र में यात्री बस...

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 02:50 AM IST
बस हादसा : प्रशासन और पुलिस की सख्ती से रूट पर से 20 प्रतिशत बसें हो गई कम, यात्रियों को उठाना पड़ रही परेशानी
पहले से ही बसों की कमी से परेशान यात्री अब और दिक्कतें उठाना पड़ रही हैं। विगत दिनों शामगढ़ क्षेत्र में यात्री बस पलटने के बाद प्रशासन और पुलिस ने चैकिंग का अभियान चलाया। कार्रवाई करते हुए मंदसौर से लेकर भानपुरा तक चालान बनाए और कुछ बसें खामियों के चलते थानों पर खड़ी करवाईं। असर यह हुआ की मालिकाें ने जिन बसों में थोड़ी सी भी कमी थी, उन्हें दूर करने के साथ फिटनेस प्रमाण-पत्र और बीमा करवाने के लिए खड़ा करवा दिया। ऐसे में बसें सड़कों पर कम चलने का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।

गरोठ और शामगढ़ बस स्टैंड पर रोज 70 से ज्यादा बसों का आवागमन होता है। शादी के सीजन के कारण यह संख्या कुछ कम हुई, जिससे यात्री पहले ही परेशान था। उस समय संचालक मनमानी सवारी बैठा रहे थे। तब प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। 29 अप्रैल को शामगढ़ क्षेत्र में हुए बस हादसे के बाद प्रशासन व पुलिस की नींद खुली और अनफिट बसों से लेकर बिना परमिट चलने वाली बसों की चैकिंग का अभियान चलाया। गरोठ में अनफिट बताकर दो बसों के खिलाफ कार्रवाई की गई। कार्रवाई को देख सड़कों पर चल रही अनफिट बस संचालकों ने बंद कर दी। बस संचालक अब बसों में आवश्यक सुधार करवाने के बाद फिटनेस प्रमाण-पत्र लेने के साथ यदि बीमा नहीं है तो बीमा करवाने की प्रक्रिया में लगे हैं। इस प्रक्रिया के चलते बसें खड़ी हैं। बस संचालक सीधे तौर पर तो कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हैं लेकिन यह स्वीकार कर रहे हैं। जरा-सी कमी के कारण हम परेशान क्यों हो। अब बसें दुरुस्त कराने के बाद ही सड़कों पर उतारेंगे। यही नहीं बिना परमिट चलने वाली और एक परमिट में अतिरिक्त फेरा लेने वाली बसें भी बंद कर दी गईं।

दो घंटे बाद भी नहीं मिल रहीं बसें

अचानक हुई इस कार्रवाई से 70 में से करीब 12 से 15 बसे विभिन्न रुटों पर कम चल रही हैं। इन बसों के सड़कों पर नहीं चलने का असर सीधा आम यात्री पर पड़ा है। बोलिया निवासी मांगीलाल पाटीदार, खड़ावदा निवासी दर्शन मालवीय ने बताया पहले हर आधा से एक घंटे में आसानी से बस मिल जाती थी। अब दो घंटे बाद भी बसें नहीं मिल रही हैं। यात्रियों और नगर के लोगों का कहना है कि प्रशासन को अवैध और अनफिट बस संचालन पर निरंतर कार्रवाई करना चाहिए, जिससे इस प्रकार के हालात न बने। अचानक कार्रवाई से यात्रियों काे परेशानी हो रही हैं, इस तरफ अधिकारियों का ध्यान नहीं हैं।

नवीन बस स्टैंड गरोठ पर बुधवार को भरी दोपहरी में बसों का इंतजार करते यात्री।

इन रूट पर पड़ा प्रभाव

बोलिया, पावटी, खड़ावदा, साठखेड़ा, शामगढ़, सुवासरा, भानपुरा रूट के साथ ग्रामीण रूट पर सबसे ज्यादा असर पड़ा हैं। यहां ग्रामीणों को समय पर बस नहीं मिल पा रही हैं और ना ही आगे के लिए कनेक्टिविटी मिल पा रही है। शामगढ़ में जरूर ट्रेन रूट होने के कारण लंबी दूरी के यात्री ट्रेन में सफर कर रहे हैं।

नियमानुसार चले वाहन

मंदसौर। अति क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने बताया कि सभी वाहन विभाग से प्राप्त स्थायी व अस्थायी अनुज्ञा-पत्र में प्रदाय मार्ग एवं समयचक्र पर नियमानुसार वाहनों का संचालन करें। ओवरलोड नहीं होना चाहिए।

कार्रवाई का दिख रहा असर

कार्रवाई का असर तो यात्री बसों में देखने को मिल रहा है। फिर भी शामगढ़ व गरोठ क्षेत्र से होकर चलने वाली कुछ बसों में सीट के अतिरिक्त सवारी बैठाई जा रही हैं। कार्रवाई से बचने के लिए बस चालक अपने रूट की जानकारी भी ले रहे है, कही कोई चैकिंग तो नहीं चल रही है।

पहले भी परमिट वाली बसें चलती थीं रूटों पर


बेवजह किसी को भी परेशान नहीं किया जा रहा


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