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भाटी, पटेल या रघुवंशी में से किसी को मिलेगी जिला कांग्रेस की कमान

15 साल से सत्ता पाने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस ने ‘कमल’ से ‘हाथ’ लड़ाने के लिए मंदसौर जिले में नए सिरे से कमान देने...

Danik Bhaskar | May 01, 2018, 03:30 AM IST
15 साल से सत्ता पाने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस ने ‘कमल’ से ‘हाथ’ लड़ाने के लिए मंदसौर जिले में नए सिरे से कमान देने की तैयारी की है। जिलाध्यक्ष नियुक्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। दिल्ली पहुंचे नामों में कमलेश पटेल, ओमसिंह भाटी और राजेश रघुवंशी शामिल हंै। इनमें से किसी के नाम पर संगठन की मुहर लगेगी। सूत्रों के मुताबिक तीनों दावेदारों से पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश प्रभारी संजय कपूर इंदौर में चर्चा कर चुके हैं। इनसे संगठन को हाशिये से ऊंचाई तक लाने और भाजपा से जिले की तीनों सीटें छीनने की रणनीति भी पूछी। प्रदेशस्तर पर बदलाव के बाद अब जिलास्तर पर जल्द घाेषणा हो जाएगी।

फाइनल दौड़ में शामिल तीनों दावेदारों से पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश प्रभारी संजय कपूर इंदौर में कर चुके चर्चा, घोषण इसी माह संभावित

ओमसिंह भाटी : नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह के करीबियों में शुमार

विधानसभा नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह के करीबियों में शुमार हल्दुनी निवासी ओमसिंह भाटी कांग्रेस में 35 साल से सक्रिय हैं। जिला पंचायत सदस्य भी रहे। प|ी सीतामऊ जनपद अध्यक्ष रहीं। भाटी ने 2013 में सुवासरा सीट से विधानसभा चुनाव का नामांकन भरा था। टिकट नहीं मिला। पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन के कहने पर नामांकन वापस लिया व पार्टी के पक्ष में प्रचार किया। यहां कांग्रेस के हरदीपसिंह डंग जीते और विधायक बने भाटी संगठन के सभी धड़ों में सर्वमान्य चेहरा हंै।

पार्टी हित में होगा निर्णय


कमलेश पटेल : हार्दिक पटेल व नटराजन के विश्वसनीय

कमलेश पटेल मल्हारगढ़ में ब्लाॅक कांग्रेस अध्यक्ष हैं। कृषि मंडी में डायरेक्टर भी हैं। किसान आंदोलन के बाद से वे कांग्रेस के प्रदर्शनों के अलावा किसान संयुक्त संघर्ष समिति से भी जुड़े हैं। सजातीय होने से गुजरात के हार्दिक पटेल के भी करीबी हैं, पाटीदार नेता के रूप में भी पहचाने जाते हंै। पूर्व सांसद नटराजन से लंबे समय से जुड़े हंै।

राजेश रघुवंशी : अरुण यादव की बदौलत नैया पार होने की उम्मीद

राजेश रघुवंशी 2004 में ब्लाॅक कांग्रेस अध्यक्ष 2006 में प्रदेश प्रवक्ता रहे। 2015 में मंदसौर नपा चुनाव में अध्यक्ष पद का उम्मीदवार होने का फाॅर्म सार्वजनिक कर सुर्खियों में आए। हालांकि चुनाव नहीं लड़ पाए। पूर्व सांसद नटराजन के कहने पर प्रचार में जुटे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते अरुण यादव ने राजेश को जिलाध्यक्ष पद के लिए प्राथमिकता सूची में रखा। इसी आधार पर इंटरव्यू स्टेज तक पहुंचे। लगातार धरने-प्रदर्शन-यात्रा में शामिल रहे हैं। यादव अब प्रदेश अध्यक्ष नहीं हैं लेकिन रघुवंशी को यादव व नटराजन से काफी उम्मीद है।

पहले सिंधिया, अब नटराजन खेमे से बनेंगे जिलाध्यक्ष

एक वक्त पर सिंधिया खेमे का दबदबा था, ज्यादातर जिलाध्यक्ष इसी खेमे से बनते आए हैं। इसमें मंदसौर से राजेंद्रसिंह गौतम, मुकेश काला जैसे नाम हों या नीमच से सुरेंद्र सेठी। साल 2009 में मीनाक्षी नटराजन के संसदीय क्षेत्र की राजनीति में दखल के बाद स्थिति बदली और मंदसौर में नटराजन समर्थक के रूप में जिलाध्यक्ष पद पर प्रकाश रातड़िया, नीमच में नंदकिशोर पटेल जिलाध्यक्ष बने। कार्यकारिणी में भी नटराजन समर्थकों के नाम रहे। वर्तमान में जो नाम हाईकमान तक पहुंचे और अंतिम 3 दावेदारों की इंटरव्यू प्रक्रिया हुई, उनमें ओमसिंह भाटी, कमलेश पटेल, राजेश रघुवंशी तीनों ही नटराजन के संपर्क में हैं।