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हाउसिंग बोर्ड नहीं बदलेगा गंगासागर कॉलोनी की टंकियां ईई बोले- ले-आउट में गलती हो गई थी, उसे सुधार लेंगे

झूठ और फरेब का पर्याय बनी गंगासागर कॉलोनी में 750 लीटर के स्थान पर रखी गई 500 लीटर की टंकियां नहीं बदली जाएंगी।...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 06:00 AM IST
झूठ और फरेब का पर्याय बनी गंगासागर कॉलोनी में 750 लीटर के स्थान पर रखी गई 500 लीटर की टंकियां नहीं बदली जाएंगी। उपभोक्ताओं को इन्हीं टंकियों से काम चलाना पड़ेगा। वजह यह कि हाउसिंग बोर्ड के स्थानीय अधिकारियों ने उपायुक्त प्रबोध पराते द्वारा मौखिक रूप से दिए टंकी बदलने संबंधी निर्देश को 24 घंटे के अंदर ही हवा में उड़ा दिया है। अफसरों का कहना है लेआउट प्लान में गलती से 750 लीटर की टंकी दर्शा दी गई थी। कागजों की यह गलती जल्द सुधार ली जाएगी। इतना ही नहीं बोर्ड भवनों में हुए घटिया को भी सीमेंट व बालू की लेयर के बजाय पुट्‌टी पोतकर छिपाया जा रहा है।

मप्र हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन कृष्ण मुरारी मोघे और कमिश्नर रविंद्र सिंह के निर्देश पर रतलाम आए उपायुक्त प्रबोध पराते को कॉलोनी के घटिया काम का निरीक्षण कर लौटे 24 घंटे ही हुए हैं। बुधवार को आए उपायुक्त ने खुद स्वीकार किया था कि टंकी लगाने के मामले में गलती हुई है। उन्होंने भवनों पर रखी गई 500 लीटर की टंकी के स्थान पर लेआउट में स्वीकृत क्षमता अनुसार टंकी लगाने के निर्देश अधीनस्थ अमले को दिए थे। प्लास्टर, नाली सहित निर्माण संबंधी अन्य खामियों को भी जल्द दूर करने की हिदायत दी थी। निरीक्षण के वक्त उनकी हर निर्देश पर हामी भरने वाले अफसरों ने उनके यहां से जाते मुकरना शुरू कर दिया है।

प्लास्टर कैसा भी हो, फर्क नहीं पड़ता

दीवारों पर खुरदुरा प्लास्टर किया है जिसे अब पुट्‌टी से छिपाया जा रहा है। इनसेट- प्लास्टर जिसपर फिनिशिंग नहीं की गई।

उपायुक्त के निर्देश के बाद ठेकेदार ने भवनों पर मोटी रेत व सीमेंट से किए ऊबड़-खाबड़ प्लास्टर की फिनिशिंग शुरू कर दी है लेकिन इसे पुट्‌टी से ढंका जा रहा है। ईई का तर्क है मोटी रेत के प्लास्टर के बाद बारीक रेत (बालू) से फिनिशिंग की जरूरत नहीं। प्लास्टर 12 से 15 एमएम का पर्याप्त है। यह जितना मोटा होगा उतना डेड लोड बढ़ता है। फिनिशिंग बारीक रेत से हो सकती है और पुट्‌टी से भी। इसका भवन की मजबूती पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

750 लीटर की टंकी तो आती ही नहीं: ईई भस्नैया

हाउसिंग बोर्ड के ईई आर. के भस्नैया का कहना है आर्किटेक्ट व इंजीनियर अलग-अलग बैठते हैं। ले-आउट स्वीकृति की दौरान गलती से 750 लीटर की टंकी रखने का उल्लेख हो गया। टंकी 250, 500, 1000 लीटर व इससे अधिक क्षमता की आती है। 750 लीटर की टंकी नहीं मिलती। ईई के अनुसार ठेकेदार को इसी हिसाब से भुगतान किया है और उपभोक्ताओं से इसी की लागत वसूली। इसलिए भवनों पर रखी 500 लीटर की टंकी ही रहेगी। उन्होंने बताया ले-आउट प्लान में हुई त्रुटि सुधार ली जाएगी।

पोल शिफ्टिंग लिए भेजा आवेदन

कई मकानों के सामने गेट के आगे ही बिजली पोल लगे हैं। इससे वाहन निकालने में परेशानी होगी।

मुख्य सड़क और भवनों के गेट के सामने स्थित बिजली पोल शिफ्टिंग को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। बोर्ड ने बिजली कंपनी में आवेदन भी कर दिया है। इसके लिए बुधवार को बोर्ड के उज्जैन के इलेक्ट्रिकल शाखा के दो इंजीनियर भी रतलाम आए थे। उन्होंने कॉलोनी का जायजा लिया। वे सर्वे रिपोर्ट तैयार कर शिफ्टिंग पर होने वाले खर्च आकलन करेंगे। इसके आधार पर डिमांड की जाएगी।

उपायुक्त के निर्देशों के अनुसार शुरू करवा दिए हैं काम


हाउसिंग बोर्ड से कोई आवेदन नहीं आया, आने पर एस्टीमेट बनवाएंगे


जो भी उचित होगा किया जाएगा, आज कंसल्टेंट से करेंगे बात