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आरक्षक को समयमान वेतन देने के आदेश के खिलाफ अपील डिवीजन बैंच ने की खारिज

जिले में पदस्थ आरक्षक को समयमान वेतनमान का लाभ देने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ की गई रिट अपील डिवीजन बैंच ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 06:00 AM IST

जिले में पदस्थ आरक्षक को समयमान वेतनमान का लाभ देने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ की गई रिट अपील डिवीजन बैंच ने खारिज कर दी। इसमें सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज सजा को आधार बनाया था। आरक्षक के अभिभाषक ने तर्क दिया कि गलती पर आरक्षक सजा भुगत चुका है। एक ही अपराध में दो बार दंडित करना न्यायोचित नहीं है।

अभिभाषक जी.के. पाटीदार ने बताया आरक्षक महेशकुमार खाती की नियुक्ति 19 अक्टूबर 1993 को हुई थी। नौकरी के दौरान उसे बगैर जांच के सजा हुई। सजा के आधार पर तत्कालीन एसपी जी.के. पाठक ने 8 अगस्त 2014 को आदेश जारी कर समयमान वेतन से वंचित कर दिया। आदेश निरस्त करने के लिए आरक्षक महेश खाती ने 24 जून 2015 को हाईकोर्ट में रिट याचिका प्रस्तुत की। न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने 8 फरवरी 2017 को अंतिम आदेश पारित कर रतलाम के तत्कालीन एसपी द्वारा 15 फरवरी 2014, 8 अगस्त 2014 तथा 2 फरवरी 2015 को जारी आदेशों को निरस्त कर निर्देशित किया कि राज्य शासन द्वारा 14 अगस्त 2012 को जारी नीति के अनुसार 60 दिन में निराकरण कर आरक्षक महेश खाती को समयमान वेतन के सभी लाभ प्रदान करें।

राज्य शासन ने हाईकोर्ट की एकलपीठ के आदेश के खिलाफ महेश खाती के सर्विस रिकार्ड को आधार बनाकर 5 जनवरी 2018 को डिवीजन बैंच के समक्ष रिट अपील प्रस्तुत की। अपील में तर्क दिया कि पुलिसकर्मी को कई बार दंडित किया गया है। खराब सर्विस रिकार्ड के आधार पर समयमान वेतन के लाभ से वंचित किया है। अभिभाषक पाटीदार ने तर्क दिया कि सर्विस रिकार्ड के अनुसार त्रुटि पर पक्षकार दंड भुगत चुका है। एक गलती के लिए दो बार दंडित करना न्यायोचित नहीं है। डिवीजन बैंच के न्यायमूर्ति पी.के. जायसवाल तथा न्यायमूर्ति एस.के. अवस्थी ने तर्क से सहमत होकर रिट अपील निरस्त तक समयमान वेतनमान के सभी लाभ देने के आदेश दिए।

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