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टेरासाइकल : दुनिया की एकमात्र कंपनी जो सिगरेट बट से लेकर फैक्स मशीन तक, हर तरह के कचरे की रिसाइक्लिंग करती है

हम रोजाना 2.1 अरब टन कचरा ईकोसिस्टम में डालते हैं। इसमें से 80 लाख टन समुद्र में जाता है। हम खपत तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 06:05 AM IST

टेरासाइकल : दुनिया की एकमात्र कंपनी जो सिगरेट बट से लेकर फैक्स मशीन तक, हर तरह के कचरे की रिसाइक्लिंग करती है
हम रोजाना 2.1 अरब टन कचरा ईकोसिस्टम में डालते हैं। इसमें से 80 लाख टन समुद्र में जाता है। हम खपत तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन कचरे से निपटने का हमारा सिस्टम काफी धीमा है। ऐसे में टेरासाइकल नाम की कंपनी कचरे की रिसाइक्लिंग में आगे बढ़कर आई है। खास बात यह है कि यह कंपनी उन चीजों की भी रिसाइक्लिंग कर सकती है जिनके बारे में हम अभी तक सोच भी नहीं सकते थे। इनमें सिगरेट के बट से लेकर फैक्स मशीन तक शामिल हैं। कंपनी ने कचरा संग्रह के लिए स्कूलों से लेकर रिहायशी इलाकों तक में कलेक्शन प्वाइंट बना रखे हैं। कचरे के बदले लोगों को पैसे तो नहीं मिलते, बल्कि उनकी पसंद के नॉन-प्रॉफिट काम के लिए दान कर दिए जाते हैं। टेरासाइकल कचरे के इस्तेमाल के लिए नए-नए तरीके ईजाद करती रहती है। पुराने डेनिम से थैले, सर्जिकल ग्लव्स से पार्क के बेंच और पुरानी फैक्स मशीन से गमले बनाए जाते हैं। सिगरेट बट का इस्तेमाल शीट बोर्ड बनाने में होता है।

टेरासाइकल कनाडा के आंत्रप्रेन्योर टॉम स्जेकी की कंपनी है। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्हें कचरे की रिसाइक्लिंग का आइडिया आया था। उसके बाद पढ़ाई छोड़ इसी पर काम करने लगे। पहले उन्होंने रीयूज्ड सोडा कंटेनर में ऑर्गेनिक फूड बनाकर बेचना शुरू किया। इसके बाद उनकी कंपनी रिसाइकल्ड बोतलों से बैग बनाने लगी।

टॉम कहते हैं, ‘कचरा दो कारणों से होता है। पहला, हम जरूरत से ज्याद चीजें खरीदते हैं और जो चीजें खरीदते हैं उन्हें सहेज कर नहीं रखते। दूसरा कारण है वस्तुओं की जटिलता। हमारे इस्तेमाल की बहुत कम चीजें प्राकृतिक होती हैं। एल्युमिनियम के कैन में जितनी धातु होती है, उसके कलेक्शन और उसे पिघलाने में उससे कम खर्च आता है। सिद्धांत रूप से हर चीज की रिसाइक्लिंग होनी चाहिए। इसलिए टेरासाइकल के ऑफिस में टेबल-कुर्सी से लेकर वॉल फिटिंग्स तक, हर चीज रिसाइकल्ड मैटेरियल से बनी है- सिवाय कंप्यूटर के।’ टेरासाइकल के बाद दूसरी कंपनियां भी इस दिशा में आगे आ रही हैं। नाइकी दूध के कार्टन से पैकेजिंग मैटेरियल बना रही है। ताइवान की मिनिविज भी कचरे से कई तरह की चीजें बना रही है।

टेरासाइकल के ऑफिस में कंप्यूटर के सिवाय हर चीज रिसाइकल्ड मैटेरियल से बनी है

टेरासाइकल जितना कचरा जुटाती है उसके सिर्फ 1% का उसी रूप में दोबारा इस्तेमाल होता है। बाकी 99% की रिसाइक्लिंग की जाती है।

टॉम स्जेकी टेरासाइकल के संस्थापक

1950 से अब तक 8.3 अरब टन प्लास्टिक उत्पादन, 6.3 अरब टन कचरा बना

यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया की स्टडी के अनुसार 1950 से 2015 तक 8.3 अरब टन प्लास्टिक का उत्पादन हुआ। इसमें से 6.3 अरब टन कचरा बन गया। सिर्फ 9% प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग हुई, 12% को जलाया गया और बाकी 79% जमीन में दबा दिया गया। 2050 तक 12 अरब टन प्लास्टिक कचरा जमीन के भीतर या समुद्र में होगा। 1950 में 20 लाख टन प्लास्टिक उत्पादन होता था, जो 2015 में 40 करोड़ टन हो गया।

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