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कठुआ कांड : ट्रायल चंडीगढ़ ...

कठुआ कांड : ट्रायल चंडीगढ़ ... निष्पक्ष सुनवाई के लिए पीड़ित परिवार केस का ट्रायल चंडीगढ़ ट्रांसफर करवाना चाहता...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 05:00 AM IST

कठुआ कांड : ट्रायल चंडीगढ़ ...

निष्पक्ष सुनवाई के लिए पीड़ित परिवार केस का ट्रायल चंडीगढ़ ट्रांसफर करवाना चाहता है। पीड़िता की वकील को मिल रही धमकियों की जानकारी भी उन्होंने कोर्ट को दी। पुलिस जांच पर संतोष जताते हुए उन्होंने केस सीबीआई को सौंपने की मांग का विरोध किया। वहीं, ट्रायल चंडीगढ़ ट्रांसफर करने की मांग के विरोध में जम्मू-कश्मीर सरकार के वकील मोहम्मद शोवेब ने कहा कि यह याचिका सिर्फ जम्मू-कश्मीर में मतभेद पैदा करने के लिए दायर की गई है। इसी बीच, एक अन्य याचिका में जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की गई। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने यह मांग खारिज करते हुए कहा कि हम इसमें क्यों पड़ें कि जांच कौन करेगा? बच्ची के पिता ने खुद याचिका दायर की है तो किसी जनहित याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं बनता। पीड़ित परिवार ने मुआवजा लेने से भी साफ इनकार कर दिया।

हम बेकसूर हैं; नारको टेस्ट करवाने की मांग

कठुआ | कठुआ दुष्कर्म और हत्याकांड का सोमवार से जिला एवं सत्र अदालत में ट्रायल शुरू हुआ। आरोपियों ने क्राइम ब्रांच के आरोप खारिज करते हुए बेकसूर होने का दावा किया। मास्टरमाइंड बताए गए सांझी राम सहित कई आरोपियों ने नारको टेस्ट करवाने की भी मांग की। कोर्ट ने आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी देने के आदेश के साथ सुनवाई 28 अप्रैल तक टाल दी। वहीं, किशोर आरोपी ने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की है। उसके मामले पर 26 अप्रैल को सुनवाई होगी। सांझी राम ने कोर्ट के बाहर मीडिया से कहा, “हम नारको टेस्ट के लिए तैयार हैं। मुझे ईश्वर में भरोसा है और वह न्याय करेंगे।’ कुछ आरोपियों ने दावा किया कि क्राइम ब्रांच के कर्मचारियों ने टॉर्चर कर उन्हें अपराध कबूलने पर मजबूर किया। ट्रायल के दौरान सांझी राम की बेटी मधु शर्मा ने कोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन कर सीबीआई जांच की मांग भी की। वहीं, वकील हड़ताल खत्म कर काम पर लाैट आए। पाक मूल के सांसद लॉर्ड अहमद ने ब्रिटिश संसद में कठुआ का मुद्दा उठाया। मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ब्रिटिश सरकार से दखल की मांग की। ब्रिटिश सरकार ने कहा कि भारत मजबूत लोकतांत्रित ढांचा है और मानवाधिकारों की सुरक्षा करता है।

असीमानंद बरी, फैसला सुनाने के ...

ब्लास्ट के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस की गोली से पांच और लोग मारे गए थे। कोर्ट के फैसले के मद्देनजर सोमवार को हैदराबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी। अप्रिय घटना रोकने के लिए तीन हजार जवान तैनात थे। ब्लास्ट की शुरुआती जांच हैदराबाद पुलिस ने की थी। उसके बाद सीबीआई को जांच सौंप दी गई थी। 2011 में एनआईए ने यह केस संभाला। इस केस में सीबीआई ने एक चार्जशीट दाखिल की थी, जबकि एनआईए ने दो सप्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल की थीं। पांचाें आरोपियों के बरी होने पर एनआईए ने कहा कि फैसले की कॉपी मिलने के बाद अगले कदम पर फैसला लिया जाएगा।

“हिंदू आतंकवाद’ के दूसरे मामले में असीमानंद बरी, समझौता ब्लास्ट में जमानत पर: हिंदू आतंकवाद के नाम पर यूपीए सरकार के वक्त गिरफ्तार किए गए स्वामी असीमानंद को दूसरे मामले में राहत मिली है। 2007 के अजमेर दरगाह ब्लास्ट केस में भी पिछले साल मार्च में जयपुर की अदालत ने उसे बरी कर दिया था। अभी 2007 के समझौता ब्लास्ट केस में वह आरोपी है। असीमानंद को सीबीआई ने 2010 में गिरफ्तार किया था। 2017 में उसे जमानत मिल गई।

कुल 10 आरोपी; पांच बरी हुए, एक की हत्या, दो अब तक फरार : मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में 10 आरोपी थे। मुकदमा सिर्फ पांच पर चला। मुकदमे के बाद वनवासी कल्याण आश्रम के प्रमुख स्वामी असीमानंद, बिहार के आरएसएस प्रचारक देवेंद्र गुप्ता, मध्यप्रदेश के आरएसएस कार्यकर्ता लाेकेश शर्मा के अलावा भरत मोहनलाल रातेश्वर उर्फ भरत भाई और राजेंद्र चौधरी को बरी कर दिया गया। एक आरोपी सुनील जोशी की हत्या कर दी गई। दो आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसांगरा अभी फरार हैं। दाे आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है।

गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी बोले- हिंदू आतंकवाद का एंगल नहीं था: गृह मंत्रालय के पूर्व अवर सचिव आरवीएस मणि ने कोर्ट के फैसले के बाद कहा, “मुझे इसी फैसले की उम्मीद थी। सबूत मनगढ़ंत थे। केस में हिंदू आतंकवाद जैसा कोई एंगल नहीं था।’ उल्लेखनीय है कि मणि ने 2016 में दावा किया था कि यूपीए सरकार के दौरान उन पर दबाव डालकर इशरत जहां केस में दूसरा हलफनामा दाखिल करवाया गया था, जिसमें इशरत और साथियों के लश्कर से संबंधों की बात हटा दी गई थीं।

फैसला देने वाले जज पर भ्रष्टाचार का आरोप, धरना देने के लिए सस्पेंड भी हुए थे- फैसला सुनाने वाले एनआईए के जज रवींद्र रेड्‌डी इस्तीफा देने के बाद छुट्टी पर चले गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह दो माह में रिटायर होने वाले थे। नियुक्ति के मामले में राजभवन के सामने धरना देने के लिए दो साल पहले उन्हें सस्पेंड भी किया गया था। वहीं, एक केस में नियमों के उलट जमानत देने को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप में सीबीआई उनके खिलाफ जांच कर रही है।

फोन फेल हुए तो कबूतरों से ...

पुलिस ने कबूतरों के जरिए भुवनेश्वर के ओयूएटी ग्राउंड से कटक तक संदेश भेजा। कबूतरों ने सफलतापूर्वक तय जगह पर संदेश पहुंचा दिया। कबूतरों को इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज (इनटेक) की मदद से प्रशिक्षण दिया जाता है। कबूतरों को जब उड़ाया गया तो स्कूली बच्चों को भी बुलाया गया, ताकि वो इस तरीके को देख सकें।

इस प्रैक्टिस का उद्देश्य है- डिजास्टर मैनेजमेंट। इनटेक के स्टेट कन्वेनर एबी त्रिपाठी बताते हैं कि- “ओडिशा पुलिस ने ये अभ्यास 1946 में शुरू किया था। उस वक्त हमने 200 कबूतरों के जरिए कम्युनिकेशन शुरू किया था। अब पुलिस के पास उतने कबूतर तो नहीं हैं, ना ही उतने कबूतरों की जरूरत है। लेकिन जितने भी कबूतर हैं वो अच्छी तरह प्रशिक्षित हैं। 1982 में बंकी जिले में भीषण बाढ़ आई थी। सारे कम्युनिकेशन सिस्टम ध्वस्त हो गए। उस वक्त ओडिशा पुलिस के कबूतरों ने ही अलग-अलग लोकेशन पर संदेश भेजने का काम किया। इसी तरह 1999 में सुपर साइक्लोन आने के बाद कबूतरों ने ही कम्युनिकेशन का काम किया था। यानी ये कबूतर हमारे डिजास्टर मैनेजमेंट सिस्टम को भी मजबूत करने का काम करते हैं। साथ ही हम एक पुरानी परंपरा का संरक्षण भी कर रहे हैं।’

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