• Home
  • Mp
  • Ratlam
  • लोगों ने एप सेे 1 लाख समस्याएं दूर करवाईं, हमें फीडबैक दिया, सफाई से खुश हैं हम: सर्वे टीम
--Advertisement--

लोगों ने एप सेे 1 लाख समस्याएं दूर करवाईं, हमें फीडबैक दिया, सफाई से खुश हैं हम: सर्वे टीम

अतुल कुमार पटेल ( सर्वे एजेंसी कार्वी टीम के सदस्य) स्वच्छ सर्वे में हमें सबसे पहले इंदौर मिला था। यह कहकर यहां...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 06:40 AM IST
अतुल कुमार पटेल ( सर्वे एजेंसी कार्वी टीम के सदस्य)

स्वच्छ सर्वे में हमें सबसे पहले इंदौर मिला था। यह कहकर यहां भेजा गया था कि जितने मानक हमारे हैं, उन सबके हिसाब से व्यवस्थाएं देखें, ताकि एक पैरामीटर फिक्स किया जा सके। इंदौर में 358 लोकेशन दी गई और करीब एक हजार लोगों से बात करने के लिए कहा गया। मैं चार दिन यहां रहा। यहां सबसे चौंकाने वाली चीज थी कचरा कलेक्शन से लेकर उसके निपटान का तरीका और प्रक्रिया। यह पहला शहर ऐसा मिला जिसने अपनी सीमा में ही वह सब कुछ कर दिया था, जो दूसरे शहरों में होता ही नहीं है। यहां एप-311 के माध्यम से लगभग एक लाख समस्याएं निपटाई गईं। यह जनता के साथ किसी सिस्टम का अद्भुत और अलग उदाहरण था। पॉजीटिव फीडबैक मिला तो सवाल खड़ा हुआ कि डीपीआर में जो बताया है वह सच में है या नहीं? हमने ट्रेंचिंग ग्राउंड के आंकड़े पहले डीपीआर में देखे। बताया गया कि आठ एकड़ में बगीचा बना दिया है। हम वहां गए और एरिया नापा तो सब कुछ मिला। कुछ और स्थान भी जांचे। फिर भी यही सवाल खड़ा हुआ कि सरकारी सिस्टम में इतना परफेक्शन कैसे हो सकता है? दूसरे शहर ऐसा क्यों नहीं कर सकते? हम सोच रहे थे कि नं. 1 शहर है तो कुछ गलतियां भी होंगी। इसके बावजूद लोगों ने माना कि सफाई लगातार होती है।

-जैसा उन्होंने हरिनारायण शर्मा को बताया



अब 24 घंटे सफाई को जीते हैं हम

रात में होने वाली सफाई इंदौर का यूएसपी


नं. 1 ओहदे के साथ जुड़े गर्व, जिम्मेदारी, उम्मीदों और आगे के रास्ते पर एक दृष्टि

इंदौर की प्रेरणा ने मुंबई का बैंड स्टैंड साफ कर दिया

सलीम खान

इंदौर के नए-पुराने लोगों को मुबारकबाद। बगैर लोगों के यह जीत नहीं मिलती। उन्होंने खुद को बदलते हुए शहर को बदला। जब आप सर्वश्रेष्ठ घोषित किए जाते हैं तो अंगुलियां भी उठती हैं। आवाजें उठेंगी कि सफाई में नंबर शहर का ट्रैफिक तो देखिए। हर मोर्चे पर आंके जाएंगे हम। नई लीक पर चलना पुरानी रवायत है इस शहर की। 1942 में भी इंदौर ने एक पहल की थी। तब इंदौर एकमात्र ऐसी स्टेट थी जहां नलों में फिल्टर्ड पानी आता था। गंभीर तालाब के पास फिल्टर प्लांट हुआ करता था। शहर की कच्ची सड़कों पर पानी का छिड़काव करने हर शाम गाड़ी आती थी। इंदौर कई शहरों की प्रेरणा बन गया है। मेरी भी बना। मुंबई में बैंड स्टैंड पर रहते हैं हम। वहां इतना कचरा हो जाता था कि किनारे के पत्थर तक नज़र नहीं आते थे। मैंने रैगपिकर्स को बुलाकर कहा कि प्लास्टिक और बोतलों के साथ एक थैली में कचरा भी उठाएं। मेहनताना मैं दूंगा। अब आप आकर देखें, बैंड स्टैंड क्लीन हो गया है। इंदौर को प्रयास जारी रखना हैं और एक दिन नहीं, हर रोज कोशिश करना है।

इसे ताउम्र बरकरार रखना है। साथ ही यह भी देखना है कि हमारे बाद यह जिम्मेदारी कौन लेगा। शायद इस तरह इंदौर में एक बार फिर नज़र आने लगें चींटियों को आटा डालने वाले, सड़कों पर राहगीरों को पानी पिलाने वाले, मुस्कराहटें बांटने वाले लोग। नंबर वन होने के बाद अब इंदौर को तीन कहावतों को अमल में लाना चाहिए। पहले उस चीनी कहावत पर जो कहती है, “टू बिकम ए सेंट, क्योर पीपल, फीड पीपल।’ मतलब अगर आप संत बनना चाहते हैं तो लोगों का इलाज कीजिए, उनका पेट भरिए। दूसरी, जब आपका कद बढ़ना बंद हो जाए तो हर इंसान दरख़्त लगाए।। इंदौर के वो लोग जिन्होंने शहर को सफाई में अव्वल बनाया, वे अब इसे हराभरा भविष्य दें और तीसरी, लव ईच अदर ऑर पेरिश यानी इंसान-इंसान से प्रेम करे या फ़ना हो जाए। ’

-जैसा उन्होंने अंकिता जोशी को बताया