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अधिकतर बैंकों में कहा- आपके तो सिक्के हैं, हम तो छोटे नोट भी नहीं ले रहे, इनके लिए हमारे पास जगह भी नहीं है, आप लाइन मत रोकिए

एक वर्ष पहले
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बैंकों ने सिक्के लेने से मना कर दिया।
  • उपभोक्ता कानून कहता है- सिक्के लेने से कोई मना नहीं कर सकता, नहीं लेने पर कार्रवाई होगी 
  • भारतीय अर्थव्यवस्था पर लंबे समय में दिखेगा गंभीर असर, 27 फीसदी गरीबों का जीना हो जाएगा मुश्किल- अर्थशास्त्री पंवार
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मंदसौर. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तो डाॅलर के मुकाबले रुपया कमजोर है लेकिन शहर में बैंक अधिकारियाें व कर्मचारियों ने रुपए की कीमत ही खत्म कर दी है। बैंकों में कर्मचारी व अधिकारी भारतीय मुद्रा को ही लेने से इनकार कर रहे हैं। सिक्के तो दूर बैंक के कर्मचारी छोटे नोट भी नहीं ले रहे हैं। ऐसे में बाजार में सिक्कों व नोट का प्रचलन बंद होता जा रहा है। व्यवसायी भी सिक्के लेने से इनकार कर रहे हैं। व्यापारियों के पास लाखों रुपए की चिल्लर जमा हो गई। इन्हें चलाने के लिए 100 रुपए के सिक्के देने पर दलाल 85 से 90 रुपए वापस दे रहे हैं। अर्थशास्त्री एसपी पंवार के अनुसार इस तरह की व्यवस्था से बाजार में थोड़े समय बाद सस्ती वस्तुओं की डिमांड कम हो जाएगी। इससे उनका उत्पादन करने वाली फैक्टरियां बंद होंगी। गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाली 27 फीसदी जनसंख्या का जीना मुश्किल हाे जाएगा। भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर दिखाई देगा। मामले की गंभीरता के बाद भी जिम्मेदार कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं। 

 

बीओआई : सिक्के देखकर किया इनकार, बोलीं- ब्रांच में जमा करें : भास्कर टीम अफीम गोदाम रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया पहुंची। कैशियर मैडम ने पर्ची देखते ही इनकार कर दिया। फिर बोलीं स्थानीय ब्रांच में जमा कराएं। कहा आपके तो सिक्के हैं, हम तो छोटे नोट भी नहीं लेते हैं। उसके भी चार्जेस लगते हैं। आप लाइन मत रोकिए, हम सिक्के नहीं लेंगे। 

 

इंडियन बैंक : हमारे पास 6 लाख के सिक्के हैं 
संवाददाता एक युवक के साथ रेलवे स्टेशन रोड स्थित तिरुपति प्लाजा में इंडियन बैंक में तीन हजार के सिक्के लेकर पहुंचे। कैश काउंटर पर सोनम जैन ने कहा कि सिक्के कहां से ले आए। युवक ने बताया कि जहां नाैकरी करता हूं वहां से सैलरी में मिले हैं। जैन ने कहा हमारे पास पहले ही 5 से 6 लाख के सिक्के रखे हैं, हम इनका क्या करें। इसके बाद उन्होंने लंच के बाद आने का कहते हुए मना कर दिया। 

 

हमारे पास जगह नहीं, आप चिल्लर को बाजार में ही क्यों नहीं चला देते 
कैशियर द्वारा इनकार करने पर संवाददाता ब्रांच मैनेजर विनोदकुमार जैन के पास पहुंचे। उन्होंने कहा चेस्ट ब्रांच उज्जैन में है और हमारे पास रखने के लिए जगह नहीं है। कुछ देर बाद समझाने लगे कि बाजार में ही चला दो। उन्हें बताया कि हमारे पास इससे ज्यादा चिल्लर है, लेकिन वे नहीं माने। 

 

एसबीआई : कहा- एक हजार ही जमा होंगे 
एसबीआई में काउंटर पर करंसी चेस्ट के कक्ष में कर्मचारी ने सिक्के देखते ही बाहर बैठने के लिए कह दिया। डेढ़ घंटे इंतजार के बाद कहा हम दिन में केवल एक हजार तक के ही सिक्के लेंगे। उन्हें बताया कि हमारे पास बहुत चिल्लर है उसका क्या करें तो उन्होंने कहा इसका कुछ नहीं हो सकता। आधा दिन खराब हो गया लेकिन चिल्लर वहां भी जमा नहीं हुई। 

 

आईडीबीआई : हम कैश के साथ 3-4 सिक्के से ज्यादा नहीं लेते हैं 
टीम आईडीबीआई बैंक पहुंची। यहां कैशियर को पांच हजार की चिल्लर दिखाई तो वह चौंक गया। कहा कि इतनी चिल्लर थोड़ी लेते हैं। टीम ने पूछा कितनी लेते हैं तो बोले- हम कैश के साथ तीन-चार सिक्के हों तो जमा करते हैं। यह कहते हुए कैशियर ने टीम को वापस रवाना कर दिया।

 

इनका दर्द : शिकायत करते हैं 
शहर के पेट्रोल पंप व्यवसाय राजू चौबे ने बताया कि उनके पास रोज के 5 से 8 हजार रुपए के सिक्के आते हैं। लोगों से चिल्लर लेने के लिए इनकार करें तो वह शिकायत करते हैं। हमसे कोई चिल्लर नहीं ले रहा हैं। चौबे के पास वर्तमान में डेढ़ लाख से अधिक की चिल्लर एकत्र हो गई है। बैंक में जाने पर वह एक हजार की बात करते हैं। कई बैंक के कर्मचारियों ने तो सिक्के लेने से इनकार तक कर दिया है। 

 

करेंसी डीलर डिस्काउंट पर सिक्के लेने को तैयार-डीलर 100 रुपए के सिक्कों पर 10 से 20 फीसदी तक डिस्काउंट ले रहे हैं। कुछ व्यापारी व दलाल लोगों से 10 से 15 फीसदी कमीशन पर चिल्लर लेकर उन्हें नोट उपलब्ध करा रहे हैं। बड़ा सवाल ये है कि आखिर करेंसी डीलर इनको कहां खपाते हैं। कहीं इनकी बैंकों से सांठगांठ तो नहीं है। 

 

कोई सिक्का नहीं ले तो एफआईआर कराइए, हो सकती है 7 साल की सजा 
सिक्काकरण अधिनियम 2011 की धारा 6 के तहत रिजर्व बैंक द्वारा जारी सिक्के वैध मुद्रा हैं। ये भारतीय रिजर्व अधिनियम 1934 की धारा 26 की उप धारा (2) में निहित प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा प्रत्याभूत हैं। ऐसे में इन्हें स्वीकार करने से इनकार नहीं कर सकते। भारतीय मुद्रा का बहिष्कार अधिनियम के तहत 7 से 12 साल तक की सजा का प्रावधान है। 

 

कार्रवाई के लिए पत्र लिखेंगे-आरबीआई के नियमानुसार सभी बैंकों को एक हजार रुपए के सिक्के लेना अनिवार्य है। यदि कोई बैंक सिक्के लेने से इनकार करती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हम आरबीआई व जिला प्रशासन को कार्रवाई के लिए पत्र लिखेंगे।

जी.पी. गुप्ता, लीड बैंक अधिकारी, मंदसाैर 

 

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