‘राग के अतिरेक में विवेक शून्य हो जाता है व्यक्ति’

Ratlam News - रतलाम | एक व्यक्ति की प|ी को कोबरा सांप ने काट लिया। उसका प|ी के प्रति गहरा राग था, वो गुस्से में पागल हो गया और उस सांप...

Oct 12, 2019, 08:55 AM IST
रतलाम | एक व्यक्ति की प|ी को कोबरा सांप ने काट लिया। उसका प|ी के प्रति गहरा राग था, वो गुस्से में पागल हो गया और उस सांप को दांतों से चबाकर मार डाला। राग के अतिरेक में इंसान अंधा और विवेक शून्य हो जाता है। अपने राग को सीमित करने का प्रयास करो। राग व्यक्ति, वस्तु, स्थिति किसी से भी हो सकता है। अगर आपका अपने कुत्ते के पिल्ले से राग हुआ और उसे कुछ हो जाए तो आप बेचैन हो जाओंगे। जितना राग बढ़ता है उतना उतना संसार बढ़ता चला जाता है।

यह बात प्रियदर्शन जी ने नीमचौक स्थानक पर कही। विराग दर्शन जी ने कहा जीवन में नवकार को स्थान देने का प्रयास करो। अनंत पुण्य के उदय से मनुष्य जन्म मिला, उसमें भी हम भाग्यशाली है।

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