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‘समाज की कुरीतियों को खत्म कर सकता है अच्छा साहित्य’

2 वर्ष पहले
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रचनाकार केवल समाज में व्याप्त कुरीतियों, बुराइयों को खत्म करने के लिए साहित्य की रचना करंे, न कि स्वयं को बड़ा साहित्यकार दिखाने का घमंड प्रदर्शित करने के लिए रचना करे। रचनाकर्म शब्दों की तपस्या की तरह है। यदि साहित्यकार सूर, तुलसी, कबीर की तरह रचना करें तो वह मानव समाज के लिए लंबे समय उपयोगी रहेगा।

यह बात अभा परिषद की काव्य गोष्ठी में साहित्यकार हरिशंकर भटनागर ने कही। वे सैफायर स्कूल में हुई काव्य गोष्ठी में अध्यक्ष के रूप में बोल रहे थे। तृप्तिसिंह राठौर ने गुरु के महत्व के बारे में बताया। मुकेश सोनी ने गरीबी व लाचारी से देश को निजात पानी की बात कही। सुभाष यादव ने राष्ट्रीय भावना को लेकर प्रस्तुति दी। ज्वेरीलाल गोयल, जन्मेजय उपाध्याय, विजय वियोगी सक्सेना, फैज रतलामी, अकरम खां शिरानी, दिलीप जोशी, प्रकाश हेमावत ने रचनाएं प्रस्तुत की।

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