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राजेंद्रसूरिजी की पाट गादी पर बैठ चुके 7 आचार्य, 8वें हैंै ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी, 2005 में हुआ था पहला चातुर्मास

Ratlam News - दादा गुरुदेव श्रीमद विजय राजेंद्र सूरीश्वरजी की क्रियोद्धार स्थली जावरा में उनकी पाट गादी पर मंगलवार को...

Dec 04, 2019, 09:06 AM IST
Jaora News - mp news 7 acharyas who have sat on the patadi of rajendrasuriji the 8th is rishabhchandra surishwarji the first chaturmas was in 2005
दादा गुरुदेव श्रीमद विजय राजेंद्र सूरीश्वरजी की क्रियोद्धार स्थली जावरा में उनकी पाट गादी पर मंगलवार को त्रिस्तुतिक श्रीसंघ के आठवें आचार्य ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी विराजित हुए। उनसे पहले राजेंद्रसूरिजी सहित सात आचार्य पाट गादी पर बैठ चुके हैं। पूरे देश में तीन पाट गादी है। ऐसी मान्यता है कि जब भी त्रिस्तुतिक श्रीसंघ का कोई मुनि आचार्यश्री की पदवी ग्रहण करते हैं तो उन्हें तीनों पाट गादी पर बैठना जरुरी है। जब राजेंद्र सूरीश्वरजी ने जावरा में क्रियोद्धार किया था। 150 साल पहले संघों के पदाधिकारियों ने राजेंद्रसूरिजी की गादी को पाट गादी के रूप में आचार्यश्री को बैठाने की परंपरा शुरू की थी। तब से सिलसिला चल रहा है।

गुरुदेव राजेंद्र सूरीश्वरजी के क्रियोद्धार के बाद आचार्य धनचंद्रसूरीश्वरजी, भुपेंद्रसूरीश्वरजी विराजित हुए। सन 1959 में आचार्य यतींद्र सूरीश्वरजी चातुर्मास के लिए यहां पधारे थे। इनके बाद सन 1971 में विद्याचंद्रसूरीश्वरजी, 1984 में हेमेंद्र सूरीश्वरजी पाट गादी पर विराजित हुए। सातवें आचार्य के रूप में रविंद्र सूरीश्वरजी का 2014में नगर आगमन हुआ। अब ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी पधारे है। देश में तीन पाटोदिया पहली आहोर, दूसरी जावरा और तीसरी मोहनखेड़ा तीर्थ पर है। दो पाट गादियों पर ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी विराजित हो चुके हैं। अब जब भी अाहोर विहार करेंगे, तब वहां की पाट गादी पर भी विराजित होंगे। आचार्य ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी का 2005 में जावरा चातुर्मास हो चुका है। तब आचार्य हेमेंद्र सूरीश्वरजी के साथ आए थे। सन 2012 में आचार्यश्री की प्रेरणा से चौपाटी पर श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार व प्राण-प्रतिष्ठा की गई। दादावाड़ी में गुरुदेव राजेंद्र सूरीश्वरजी की याद में क्रियोद्धार स्थली बनी है। तीन साल पहले आचार्य बनने के बाद पहला नगर प्रवेश है।

साध्वी संघवणश्रीजी को शासन ज्योति की पदवी से अलंकृत किया

पीपली बाजार जैन मंदिर में गुरूदेव राजेंद्रसूरिजी की पाट गादी में विराजे आचार्य ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी।

वरिष्ठ साध्वी संघवणश्रीजी ने अपने संयम काल में समाज की सेवा की। इनकी 70 से अधिक शिष्याएं है। पूर्वाचार्यों ने उन्हें सेवाभावी पदवी से अलंकृत किया। आज उन्हें शासन ज्योति की पदवी से अलंकृत किया गया। आचार्यश्री ने कहा दादावाड़ी मंदिर को 50 साल पुरे हो चुके हैं। मेरी भावना है कि 2023 तक इसका भी नवीनीकरण हो। श्रीसंघ अध्यक्ष ज्ञानचंद चौपड़ा, कोषाध्यक्ष विनोद बरमेचा, राजमल लुक्कड़, कन्हैयालाल संघवी, धरमचंद चपड़ोद, देवेंद्र मूणत, प्रकाश चौरड़िया, भंवर आंचलिया, अनिल चपड़ोद, प्रदीप चौधरी सहित बांसवाड़ा, मंदसौर, इंदौर, राजगढ़, नागदा, नीमच, रतलाम, खाचरौद, झाबुआसहित 50 से अधिक श्रीसंघ उपस्थित रहे। मुमुक्षु नाहर का एमएम ग्रुप के पदम नाहटा, कमल नाहटा, सुशील कोचट‌्टा, माणक चपड़ोद ने सम्मान किया।

साध्वी संघवणश्रीजी को शासन ज्योति की पदवी दी, मुमुक्षु का वरघोड़ा निकला

जावरा में बनने वाले महिला उपाश्रय के लिए मोहनखेड़ा तीर्थ देगा 1.08 करोड़ का सहयोग

जावरा | आचार्य पदवी मिलने के तीन साल बाद मंगलवार को आचार्यश्री ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी आदि ठाणा का मंगलप्रवेश हुआ। पिपली बाजार जैन मंदिर पर गुरुदेव की पाट गादी पर बैठकर आशीर्वचन दिए। जावरा श्रीसंघ द्वारा भविष्य में बनाए जाने वाले महिला उपाश्रय के लिए मोहनखेड़ा तीर्थ की तरफ से 1.08 करोड़ का सहयोग देने घोषणा की। वरिष्ठ साध्वी संघवणश्रीजी को शासन ज्योति की पदवी से अलंकृत किया।

पहाड़िया रोड स्थित लुक्कड़ भवन से नगर प्रवेश हुआ। इसमें 15 जनवरी को मोहनखेड़ा तीर्थ में दीक्षा लेने वाले मुमुक्षु अजय नाहर का वरघोड़ा शामिल था। मुमुक्षु ने दोनों हाथों से वर्षीदान किया। चल समारोह मुख्य मार्गों से होता हुआ पीपली बाजार जैन मंदिर पहुंचा। जहां पाट गादी पर विराजकर आचार्यश्री ने धर्म संदेश में कहा 150 साल बाद मुझे इस पाट पर बैठने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इससे ऊर्जा मिलेगी। मैं शरीर से पीड़ित जरूर हूं, लेकिन मन से नहीं। मेरे जीवन में कई विपरीत परिस्थितियां आई, लेकिन समय-समय पर समाधान मिला। सभी आचार्य, भगवंत आैर साधु-साध्वी को एक मंच पर लाने के प्रयास में मुझे सफलता मिली। मोक्ष प्राप्ति के लिए देव की जरूरत नहीं होती। इसके लिए सामयिक प्रतिक्रमण ही अमृत क्रिया है। पाट गादी पर जावरा श्रीसंघ का बहुत योगदान है। आचार्यश्री ने कहा नगर की महिलाओं को पर्यूषण पर्व में प्रतिक्रमण करने में बहुत दिक्कत होती है। इसके लिए जावरा श्रीसंघ महिला उपाश्रय जब भी बनाएगा। उसमें श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ की ओर से एक करोड़ आठ लाख रुपए का सहयोग की घोषणा की।

आचार्यश्री के मंगलप्रवेश में शामिल समाजजन, पीछे बग्घी में बैठे मुमुक्षु नाहर।

आचार्यश्री को कांबली ओढाई : आचार्य ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी की प्रथम गुरुचरण पूजा का लाभ पूर्व राज्यसभा सांसद मेघराज चंपालाल लोढ़ा ने लिया। आचार्यश्री को सकल जैन श्रीसंघ व चंदूलाल दलीचंद सेठिया परिवार(बांसवाड़ा), राजगढ़ श्रीसंघ, आदिनाथ राजेंद्र जैन श्वेतांबर पेढ़ी ट्रस्ट मोहनखेड़ा तीर्थ के ट्रस्टी बाबूलाल खेमसरा, मेघराज जैन, संजय सर्राफ, आनंदीलाल अम्बोर, तीर्थ प्रबंधक प्रितेश जैन ने कांबली ओढ़ाई।

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