3 लाख लोगों को संभाल रहे 7 डॉक्टर, 36 एएनएम व 204 आशा सहयोगी

Ratlam News - गंभीर मरीज आए तो उनका इलाज संभव नहीं अनुविभाग में तीन लाख की आबादी है। 7 डॉक्टर, 36 एएनएम और 204 आशा कार्यकर्ता...

Mar 27, 2020, 07:40 AM IST

गंभीर मरीज आए तो उनका इलाज संभव नहीं

अनुविभाग में तीन लाख की आबादी है। 7 डॉक्टर, 36 एएनएम और 204 आशा कार्यकर्ता दिन-रात मैदान में जुटे हैं। सरकारी मानक अनुसार भले 30 हजार पर एक डॉक्टर पर्याप्त हैं लेकिन मौजूदा माहौल में हमारे यहां की जो स्थिति है वह नाकाफी है।

ब्लॉक में एक सिविल अस्पताल, 4 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र याने बडावदा, बर्डियागोयल, ढोढर और रिंगनोद हैं। 31 उपस्वास्थ्य केंद्र हैं। सिविल अस्पताल में प्रथम श्रेणी के 6 पद में से 1 डॉक्टर पदस्थ है। दि्वतीय श्रेणी के 16 में से 4 डॉक्टर कार्यरत हैं। डॉक्टरों के 17 पद रिक्त हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बर्डियागोयल व ढोढर में मेडिकल ऑफिसर नहीं हैं। 30 उपस्वास्थ्य केंद्रों में एएनएम पदस्थ हैं। इधर मीनाखेड़ा में एएनएम की पोस्ट खाली है। पैरामेडिकल स्टॉफ में अभी 36 एएनएम, 5 सुपरवाइजर और 204 आशा सहयोगी कार्यकर्ता ने मोर्चा संभाल रखा है। फार्मासिस्ट व ड्रेसर मिलाकर 12 लोग हैं। बडावदा-रिंगनोद में फार्मासिस्ट व स्टाफ नर्स का पद रिक्त हैं। बर्डियागोयल में स्टाफ नर्स, ढोढर में लैब टेक्नीशियन नहीं हैं। संदिग्ध मरीजों को आइसोलेट रखा
जा रहा है। ताकि संक्रमण की चेन टूटे और उनमें रिकवरी हो। इमरजेंसी सुविधा के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इमरजेंसी मरीजों को जिला चिकित्सालय रैफर किया जा रहा है।

डॉ. पालडिया रीयल हीरो हैं

एक तरफ जहां चिकित्सकों की कमी है, वहीं दूसरी ओर अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए बीएमओ डॉ. दीपक पालडिया 24 घंटे सेवाएं दे रहे हैं। जबकि वे खुद हाई ब्लडप्रेशर से पीड़ित हैं। बावजूद वे गांव-गांव में घूमकर मॉनीटरिंग सहित गतिविधियां देख रहे हैं।

इसलिए संभव नहीं है इलाज- तीन लाख की आबादी होने के बाद भी गंभीर मरीजों के इलाज के लिए ब्लॉक लेवल पर कोई सुविधा नहीं है। अस्पताल में वेंटीलेटर, आईसीयू यूनिट, सर्जिकल व एनेस्थेटिक का अभाव है। इस कारण जब भी कोई मरीज आता है तो उसका प्राथमिक उपचार कर उसे जिला चिकित्सालय रतलाम रेफर कर दिया जाता है।

X

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना