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जो व्यक्ति किसी से प्रेम करे वह नास्तिक नहीं

एक वर्ष पहले
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पिपलौदा | जीवन को परमात्मा के भरोसे छोड़ दो छल कपट धोखा मनुष्य को मिटा देता है छल कपट से परहेज करो, परमात्मा से प्रेम करो, परमात्मा के बताए मार्ग पर चलकर जीवन का कल्याण करो।

यह बात समन्वय मिशन के प्रेरक, क्रांतिकारी, राष्ट्रसंत आचार्य प्रवर डॉ. दिव्यानंद सुरीश्वर जी (निराले बाबा) ने कही। प्रवचन सभा में उन्होंने कहा इस संसार में आस्तिक और नास्तिक दो प्रकार के लोग रहते हैं जो कहते हैं। हम नास्तिक है किसी भी ईश्वरीय सत्ता को नहीं मानते। हम उनसे पूछते हैं कि क्या तुम स्त्री, बच्चे, बहन, भाई, माता-पिता को प्यार नहीं करते, अगर करते हो तो तुम नास्तिक नहीं हो सकते, जो व्यक्ति किसी से प्रेम करता है, प्यार करता है वह नास्तिक नहीं हो सकता, क्योंकि शरीर में ही परमात्मा का वास रहता है। नास्तिक व्यक्ति वह है जिसके शरीर में प्यार की भावना ना हो ऐसा व्यक्ति संसार में मुश्किल से मिलता है। आस्तिक व्यक्ति में प्यार, श्रद्धा और समर्पण कूट-कूट कर भरा होता है। अनिल नामेचा, किशोर छाजेड़, रोमेश जैन, मणिलाल धिंग, ईश्वर लाल बोहरा, मनीष सुराणा, राजेश (महावीर) नरेंद्र बोहरा, श्रीकांता सुराणा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

राष्ट्रसंत आचार्य प्रवर डॉ. दिव्यानंद सुरीश्वर जी प्रवचन सभा संबोधित करते हुए।

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