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- Ratlam News Mp News After 139 Years The First Passenger Powered By Electric Engine Will Now Run Regularly 56 Km Extension To Chittorgarh Soon
139 साल बाद बिजली इंजन से चली पहली पैसेंजर, अब नियमित चलेगी, चित्तौड़गढ़ तक 56 किमी विस्तार जल्द
रविवार को 139 साल बाद रतलाम-नीमच-रतलाम के बीच पहली यात्री पैसेंजर ट्रेन हल्दीघाटी (रतलाम-यमुना ब्रिज) बिजली के इंजन से चली। अब ट्रेन नियमित चलेगी। इसके लिए रेलवे को मुख्यालय से मंजूरी मिल चुकी है। नीमच-चित्तौड़गढ़ के बीच सिंगल लाइन का इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा होने के बाद अप्रैल-मई में यह ट्रेन चित्तौड़गढ़ तक बिजली के इंजन से चलने लगेगी। इस तरह 56 किलाेमीटर इलेक्ट्रिफिकेशन होगा।
भाप के इंजन से इंदौर-रतलाम-नीमच के बीच पहली ट्रेन 1881 में चली थी। 124 साल बाद 2005-06 में आमान परिवर्तन शुरू हुआ और डीजल इंजन से गाड़ियां 17 जून 2007 से रतलाम-नीमच के बीच चलना शुरू हुई। प्लेटफॉर्म 6 से 59811 रतलाम-यमुना ब्रिज पैसेंजर ट्रेन को मंडल रेल प्रबंधक विनीत गुप्ता ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्टेशन मैनेजर विजय सिंह सिसौदिया, सीनियर डीईई (टीआरओ) अजित आलोक, लोको पायलट अरविंद शर्मा भी मौजूद रहे।
रतलाम से चलते समय ट्रेन में पहले डीजल और उसके आगे इलेक्ट्रिक इंजन लगाया था
बिजली के जिस इंजिन से रेलवे ने रतलाम-नीमच के बीच पहली यात्री ट्रेन चलाई, वह वडोदरा शेड का था। ड्राइवर मनोज स्वामी, गार्ड एमके राव नीमच तक ले गए। खास बात यह रही रतलाम से चलते समय ट्रेन में पहले डीजल और उसके आगे इलेक्ट्रिक इंजन लगाया गया था। सुबह 11.34 बजे नीमच पहुंचने के बाद इलेक्ट्रिक इंजन को अलग कर ट्रेन को आगे रवाना कर दिया गया। वापसी में वहीं इंजिन 59812 यमुना ब्रिज-रतलाम पैसेंजर को लेकर रतलाम पहुंचा। रेलवे 1 मार्च से इलेक्ट्रिक लोको से ट्रेन चलाने की योजना बनाई थी लेकिन इंजिन नहीं मिलने से नहीं चला पाया था।
रतलाम-चित्तौड़गढ़ सेक्शन के इलेक्ट्रिफिकेशन की स्थिति
नीमच-चित्तौड़गढ़ सेक्शन के शंभुपुरा स्टेशन तक इलेक्ट्रिफिकेशन हो गया है। अब शंभुपुरा-चित्तौड़गढ़ के 13 किमी लंबे सेक्शन में काम चल रहा है, जिसमें पोल लगने के बाद केबल डाली जा रही है।
आगे क्या : वर्तमान में नीमच-चित्तौड़गढ़ के बीच इलेक्ट्रिफिकेशन चल रहा है। 15 मार्च तक सिंगल लाइन का काम पूरा हो जाएगा। उधर रेल विद्युतीकरण (आरई) विभाग ने सीआरएस को एप्लीकेशन भेज दी है। मार्च अंत में सीआरएस निरीक्षण भी हो जाएगा। अप्रैल से रेलवे हल्दीघाटी पैसेंजर को ही चित्तौड़गढ़ तक चलाने लगेगा।
1937 ः भारत के वायसराय स्टेट विजिट पर नवाब इफ्तेखार अली से मिलने आए थे। तब भाप इंजन वाली ट्रेन चलती थी। (भास्कर को यह तस्वीर समाजसेवी शेखर नाहर ने अपने संग्रह से उपलब्ध कराई है।)
अंग्रेजी शासनकाल में 1875 से 1880 के बीच दिल्ली को दक्षिण से जोड़ने के लिए जयपुर, अजमेर, चित्तौड़गढ़, मंदसौर, रतलाम, इंदौर, खंडवा, अकोला होकर हैदराबाद तक मीटरगेज लाइन बिछाई गई थी। रेलवे के सेवानिवृत वाणिज्य अधिकारी अभय कांठेड़ के मुताबिक मीटरगेज लाइन पर 139 साल पहले वर्ष 1881 में पहली यात्री गाड़ी 9671 अजमेर-खंडवा भाप इंजन से चली थी। यह सुबह 5 बजे जावरा पहुंची और वापसी में 9672 खंडवा-अजमेर सुबह 11 बजे आई थी। दूसरी गाड़ी 0582 काचीगुड़ा-अजमेर सुबह 8.30 और 0581 अजमेर-काचीगुड़ा रात 8 बजे आई। तब से 1978-79 तक भाप इंजन ही चले फिर डीजल इंजन। 30 सितंबर 2006 तक अकोला-अजमेर रेल खंड में मीटरगेज गाड़ियां दौड़ती रही।
1881 : सुबह 5 बजे जावरा आई थी भाप
इंजन की पहली अजमेर-खंडवा यात्री गाड़ी
विनीत गुप्ता, डीआरएम
एसी लोको से चलने वाली पहले ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना करते डीआरएम गुप्ता।