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अपने ही खातेदारों की इज्जत पर दाग लगाकर कमाई करने में लगे हैं बैंक

एक वर्ष पहले
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क्लियरिंग हाउस बंद हो जाने के बाद से बैंकें इमेज के आधार पर चेक क्लियर कर रही हैं। इस व्यवस्था ने बैंकों की कमाई बढ़ा दी लेकिन खातेदारों की इज्जत पर दाग लगाना शुरू कर दिया है।

चेक पर खाताधारक के सिग्नेचर हल्के से भी मिसमैच होने पर चेक बाउंस किए जा रहे हैं। समस्या का समाधान निकालने की जगह बैंकें कमाई बढ़ाने में लगी हैं। उन्हें उपभोक्ताओं की साख की चिंता नहीं है। वजह सेंट्रलाइज सिस्टम होना है।

200 चेक रोज बाउंस हो रहे

चेक बाउंस पर बैंकों की पैनाल्टी अलग-अलग है। औसतन 250 रुपए पैनाल्टी के आधार पर 50 हजार रुपए रोज चुकाना पड़ रहे हैं।

शहर में 27 बैंकों की 76 ब्रांचें हैं। इसमें औसतन 4500 चेक रोज बैंकों में लगते हैं इसमें से औसतन 200 चेक रोज बाउंस हो रहे हैं। उपभोक्ताओं की जेब से 50 हजार रुपए रोज निकाले जा रहे हैं।

उपभोक्ताओं के हित को भूले बैंक, बैंकिंग लोकपाल को शिकायत

पुरानी व्यवस्था ऐसी थी

पहले लोकल क्लियरिंग में रोज शाम को बैंकों के प्रतिनिधि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच में मिलते थे। यहां एक दूसरे को चेक का आदान-प्रदान करते थे। बैंक के रेगुलर ग्राहकों के सिग्नेचर हल्के से मिसमैच होने पर कई बार चेक क्लियर कर देते थे।

अब ऐसी रहती है व्यवस्था

सेंट्रलाइज सिस्टम आ गया है। इसमें चेक मिलने के बाद बैंकें इसे स्कैन कर इमेज मुख्यालय भेजती हंै। मुख्यालय स्तर पर ही ये क्लियर होते हैं। ऐसे में हल्के से भी सिग्नेचर नहीं मिलने पर चेक बाउंस किए जा रहे हैं।

ऐसी सुविधा क्यों नहीं उपलब्ध करा सकती बैंकें

चेक लेने एवं देने वाले की जानकारी और मोबाइल नंबर बैंकों के पास रहते हैं। चेक पर साइन नहीं मिलने पर उपभोक्ता को फोनकर बताया जाना चाहिए कि सिग्नेचर रिकॉर्ड के अनुसार नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में संबंधित व्यक्ति शाखा पहुंचकर सिग्नेचर अपडेट कर सकता है। इससे उपभोक्ताओं की साख बनी रहेगी। बैंक इस प्रक्रिया का शुल्क और समय तय कर सकता है।

सिग्नेचर से पास होता है चेक - लीड बैंक मैनेजर राकेश गर्ग ने बताया सेंट्रलाइज सिस्टम है। चेक क्लियर सिग्नेचर से होता है। ग्राहकों ने जो बैंक में सिग्नेचर दे रखे हैं उसी अनुसार करना चाहिए। चेक खारिज हो रहे हैं तो बैंक की ब्रांच में जाकर सिग्नेचर अपडेट करवा लें।

ऐसे बदलवा सकते हैं सिग्नेचर - लीड बैंक के पूर्व मैनेजर हिम्मत गेलड़ा ने बताया मिसमैच सिग्नेचर से चेक बार-बार बाउंस हो रहा है तो बैंक की ब्रांच में पहुंच अपने सिग्नेचर बदलवाएं। आपके आवेदन पर बैंक नए सिग्नेचर डाटाबेस में अपलोड करेगी। दो से तीन दिन में सिग्नेचर अपडेट हो जाएंगे।

चेक बाउंस होने पर ये असर

{ 150 से 350 रुपए की पैनाल्टी ग्राहकों को चुकाना पड़ रही है।

{ सिबिल स्कोर खराब हो रहा है। लोन लेने में ग्राहकों को दिक्कत आएगी।

{ चेक बाउंस होने से जिस पार्टी को चेक दे रहे हैं उसकी नजर में प्रतिष्ठान की इज्जत खराब हो रही।

10 हजार रुपए का चेक दिया, बाउंस हुआ तो 150 रुपए अकाउंट से कट गए - एसबीआई कलेक्टोरेट ब्रांच के ग्राहक अशोक शर्मा ने 10 हजार रुपए का चेक किराना व्यापारी को दिया। किराना व्यापारी ने चेक जब सेंट्रल बैंक में लगाया तो सिग्नेचर मिसमैच होने की बात कहते हुए बैंक ने इसे खारिज कर दिया। शर्मा को दूसरा चेक जारी करना पड़ा। अकाउंट से 150 रुपए कटे। यही वाक्या बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहक राजेश बैरागी के साथ हुआ। मिसमैच सिग्नेचर से 5500 रुपए का चेक बाउंस हो गया। वे बैंकिंग लोकपाल से चेक क्लियरेंस सुविधा में सुधार करने की
मांग करेंगे।

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भास्कर सवाल**
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