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बीपीएल सर्वे पूरा लेकिन अपात्र मापदंड तय नहीं, 1300 ने लिया 3 माह का राशन

एक वर्ष पहले
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सरकार गरीब परिवारों का सर्वे कराकर अपात्रों को बाहर कर वास्तविक गरीबों को बीपीएल कूपन का लाभ देना चाहती है। जिले में अब भी सर्वे कछुआ चाल से ही हो रहा है। अपात्रों की सूची बनाना और बाद में दावे-आपत्ति लेकर नाम काटने की प्रोसेस में काफी समय लगेगा। इससे यही लग रहा है कि इस बार नगरपालिका व पंचायत चुनाव से पहले अपात्र राशन कार्डधारियों के नाम पोर्टल से नहीं हटेंगे और उन्हें राशन मिलता रहेगा। जिसकी शुरुआत मार्च में हो गई है। क्योंकि शासन ने गोदाम खाली करने के लिए खाद्य विभाग को तीन महीने का राशन एकमुश्त देने के निर्देश दिए। ऐसे में नपा द्वारा पूर्व में चिह्नित अपात्र कूपन धारियों को भी पोर्टल में नाम होने के कारण करीब 780 क्विंटल राशन अपात्रों में बंट रहा है।

18 नवंबर से जिले में बीपीएल कूपन धारियों के भौतिक सत्यापन के लिए टीमें गठित की गई थी। ऑनलाइन व ऑफलाइन जानकारी जुटाने के लिए साढे तीन माह में ब्लॉक के 9844 परिवार का सर्वे तो हो गया लेकिन जिले का सर्वे अब भी चल रहा है। जिम्मेदार आगामी कार्रवाई सर्वे पूरा होने के बाद होने का कह रहे है। नए कूपन वालों के नाम पोर्टल पर दर्ज नहीं हुए है। वे राशन लेने के लिए खाद्यान्न पर्ची का इंतजार कर रहे हैं। कुछ सालों पहले नगरपालिका ने अपने मापदंडों पर बीपीएल कूपन धारियों की सर्वे रिपोर्ट तैयार की थी। जिसमें पक्के मकान व अन्य सुविधा वाले लोगों को चिह्नित कर अपात्रों की सूची में शामिल कर नाम निरस्ती की कार्रवाई के लिए एसडीएम कार्यालय में प्रस्तावित किया था। हर बार किसी ने किसी कारण से फाइन टलती गई और जिम्मेदार अधिकारियों ने नाम निरस्ती के आदेश पर हस्ताक्षर नहीं किए। समय के साथ जिम्मेदार बदलते गए और आदेशों की तारीख भी बदलती गई। जब नवंबर में सरकार के आदेश मिले तो लगा कि अपात्रों के नाम कटेंगे, लेकिन कूपन निरस्त होना तो दूर अभी तो स्पष्ट रिपोर्ट तक सामने नहीं आई है कि अपात्रों की संख्या बढ़ी है या घटी है।

सर्वे से ये बता पाना मुश्किल है कि कौन अपात्र


जिम्मेदारों की माने तो शहरी क्षेत्र में 52 और ग्रामीण क्षेत्र में 130 टीमों ने ऑनलाइन व ऑफलाइन सर्वे किया। सारी जानकारी ऑनलाइन दर्ज है। भोपाल से सारे कार्यों की मॉनिटरिंग हो रही है, ऐसे में अभी डाटा कलेक्ट हुआ है। किस स्तर के व्यक्ति को अपात्र माना जाना है ये खाद्य विभाग बता पाने में असमर्थ है। क्योंकि सामान्य मापदंड देखे तो उनमें बदलाव हो सकता है। पहले जिन शर्तों पर बीपीएल कूपन के लिए हितग्राही पात्र होता था, वे सारी शर्तें सरकार ने खुद ही पूरी कर दी है। ऐसे में बीपीएल कूपन निरस्त करने की शर्त राज्य शासन के तय करने पर ही स्पष्ट होगी।


अंतिम स्टेज पर
नाम निरस्त होंगे


खाद्य आपूर्ति अधिकारी एमएस ठाकुर ने बताया प्रदेश में सर्वे की कार्रवाई चल रही है। एक-दो जिले की रिपोर्ट के आधार पर नाम निरस्ती की कार्रवाई नहीं हो सकती। इसके लिए विधिवत राज्य शासन कटऑफ तय करेगी। फिर लोगों को दावे-आपत्ति का मौका मिलेगा। इसके बाद अंतिम स्टेज पर नाम निरस्त होंगे। तब तक जिनके नाम पोर्टल पर जुड़े है उन्हें राशन देना हमारा काम है।

राशन दुकानों पर तीन माह का राशन वितरित किया।
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