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हाथीखाना की जमीन सरकारी, आज 21 लोगों के कब्जे हटाए जाएंगे

एक वर्ष पहले
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हाथीखाना क्षेत्र में सर्वे नंबर 535 व 536 की जमीन काे प्रशासन ने जांच में सरकारी माना है। इसको हुसैन टेकरी के मुतव्वली नवाब सरवर अली खान ने 21 लोगों काे बेच दी थी। उनका कहना है कि रियासत विलय के दौरान सरकार ने जमीन हमें दी और हम मालिक है इसलिए बेचा। एसडीएम ने जांच के बाद इसे सरकारी मानते हुए यहां से सभी 21 लोगों के कब्जे हटाने तथा बाउंड्रीवाॅल तोड़ने के निर्देश दिए। सोमवार सुबह प्रशासन दलबल के साथ कार्रवाई करेगा। इसे लेकर नवाब सरवर अली ने कोर्ट जाने की बात कही है।

जनवरी में प्रशासन ने माफिया मुक्त मुहिम शुरू की थी। तभी किसी ने गोपनीय रूप से एसडीएम राहुल धोटे को शिकायत की थी कि हाथीखाना क्षेत्र की बेशकीमती जमीन सरकारी है। उसे निजी बताकर कुछ लोगों को बेच दी गई है। एसडीएम ने कमेटी बनाई और तहसीलदार नित्यानंद पांडेय को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। तहसीलदार ने सभी 21 लोगों से दस्तावेज तलब किए। इन्होंने नवाब सरवर अली खान से रजिस्ट्री करवाकर ये जमीन खरीदी थी। इसमें पता चला कि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन आबिद अली, सैफुद्दीन बोहरा व अन्य के नाम दर्ज है। जबकि वर्ष 2018 से 2019 के बीच इसे नवाब सरवर अली खान ने 21 लोगों काे बेच दी। इस जमीन को लेकर पूर्व में आबिद अली अन्य तथा नवाब सरवर अली खान के बीच कोर्ट केस चले। एक फैसले के आधार पर नपा ने सरवर अली के नाम से नामांतरण किया और इसी आधार पर सरवर अली ने ये जमीन बेच दी। इधर प्रशासन ने वर्ष 1911 से अब तक का राजस्व रिकॉर्ड खंगाला। इसमें जमीन सरकारी होना पाया गया। यानी आबिद अली व अन्य का नाम भी रिकॉर्ड पर गलत तरीके से दर्ज है और नवाब सरवर अली खान भी इसके मालिक नहीं है। इसी आधार पर तहसीलदार ने एसडीएम को रिपोर्ट पेश की। एसडीएम राहुल धोटे ने जमीन को मुक्त करवाने के निर्देश दिए। तहसीलदार ने बताया रविवार को कब्जेधारियों को नोटिस देकर कब्जे हटाने के निर्देश दिए हैं। यदि वे नहीं हटाएंगे तो सोमवार को प्रशासन बेदखल करेगा। सर्वे नंबर 535 में 0.139 और 536 में 8.536 हेक्टेयर जमीन बाजार गाइडलाइन से करोड़ों रुपए की है।

प्रशासन ने छुटिट्यों का फायदा उठाया, ये पावर का दुरुपयोग

नवाब सरवर अली खान ने बताया कि वर्ष 1911-12 में भूमि सरकारी थी लेकिन रियासत विलय के दौरान शासन ने विलय शर्त में जमीन तत्कालीन नवाब उस्मान अली परिवार को दी थी। तब से इस जमीन के हम हकदार है और कोर्ट से भी हम केस जीते हुए हैं। प्रशासन ने हमें सुने बिना एक तरफा फैसला देते हुए जमीन को सरकारी बता दिया जबकि हमारे पास विलय शर्त का नोटिफिकेशन है। कोर्ट में जीते हुए फैसले है। नपा का नामांतरण हमारे पक्ष में है। प्रशासन तो पूर्व में चले कोर्ट मामलों में भी पार्टी नहीं था। अब इन्होंने होली व अन्य छुटिट्यों का फायदा उठाते हुए कब्जे हटाने के आदेश जारी कर दिए ताकि हम कोर्ट से राहत नहीं ले सकें। ये पावर का दुरुपयोग है। हुसैन टेकरी के होली कार्यक्रम के बाद अपने अधिकारों के लिए कोर्ट जाएंगे। तहसीलदार पांडेय का कहना है सभी पक्षों को सुनने के बाद ही जमीन को सरकारी मानते हुए कब्जे हटाने के आदेश हुए हैं।

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