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इमरजेंसी लगाई थी तो इंदिरा ने किसी को भरोसे में लिया था क्या: जोशी

2 वर्ष पहले
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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद- 370 हटाने के लिए जनसंघ के जमाने से संघर्ष करने वाले भाजपा के वरिष्ठतम नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी की भास्कर के से विशेष बातचीत...

370 की लड़ाई आज इस मुकाम तक पहुंची, इस सफर को कैसे देखते हैं?

इतिहास का एक लंबा दौर है। आजादी के बाद पहला बलिदान डॉ. मुखर्जी का था। देश की एकता-अखंडता को बनाए रखने के लिए एक राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष का बलिदान होता है। उस पार्टी ने इस बात को याद रखा। ये केवल राजनीतिक नहीं, चुनाव में हमें वहां क्या मिलेगा। इसमें चुनावी दृष्टिकोण अहम नहीं था। चुनाव राजनीतिक दलों के लिए अहम होता है, पर जनसंघ-भाजपा ने उससे भी महत्व देश की एकता-अखंडता, सुरक्षा को दिया।

इस सफलता को कैसे महसूस करते हैं, आंदोलन में अहम हिस्सा रहे हैं?

अांदोलन अंतिम परिणाम तक पहुंच गया और अब इसमें आगे क्या होगा यह समय बताएगा। जनता या राजनीतिक दल कितनी बुद्धिमानी दिखाएंगे। पर केंद्र सरकार की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

370 खत्म होने से आतंकवाद खत्म हो जाएगा, आप भी ऐसा मानते हैं?

370 के कारण से जो चीजें आई थीं अब वो उनकी जड़ें या बुनियाद बहुत गहरी हुई हैं। हमारी लड़ाई 370 को लेकर थी, हम आतंकवाद के लिए खिलाफ थोड़े न लड़े थे। जब 370 के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी तो कश्मीर में आतंकवाद ऐसा नहीं था। पाकिस्तानी, आईएसआई, तालिबानी जैसे नहीं थे।

सरकार पर आरोप लग रहा है कि सबको भरोसे में नहीं लिया ?

देखिए, मैं इमरजेंसी का समर्थक नहीं हूं, ना था, मैं तो भुक्तभोगी हूं। पर जब इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई तो किसी को भरोसे में लिया था क्या? हमारे युद्ध हुए हैं तो क्या हरेक को बताकर हुए, परमाणु विस्फोट हुआ तो क्या बताया था। कुछ चीजें राज्य संस्थाओं के हाथ में छोड़नी पड़ती है।

अब अागे सरकार को क्या कदम उठाना चाहिए, आपकी कोई सलाह?

ये तो सरकार को तय करना है। संप्रदाय में तनाव न हो, उनमें सौहार्द्र हो, भाईचारा हो। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख मिलाकर एक गुलदस्ता बनता है, ऐसे में विपक्ष के सुझाव पर भी ध्यान देना चाहिए खुले दिल से सुनना चाहिए, ताकि यह बिखरे नहीं।

डॉ. मुरली मनोहर जोशी, भाजपा नेता

राम माधव कह रहे हैं कि अब समान नागरिक संहिता की बारी है?

ये अलग बात है। क्या समय आएगा क्या नहीं आएगा, इसको इससे क्यों जोड़ते हैं। इससे इस फैसले का महत्व कम क्यों किया जा रहा है। तीन तलाक पर पिछली बार भी विचार हुआ था। सरकार की घोषित नीति थी कि 370 को समाप्त करे, कर दिया।

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