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- Ratlam News Mp News In The Taxpayer Dilemma They Are Unable To Decide Whether To Live In The Old Slab Or In The New
टैक्सपेयर दुविधा में, वे यह फैसला नहीं कर पा रहे कि पुराने स्लैब में रहें या नए में
वर्ष 2020-21 के बजट में कर की दरों में विकल्प दे कर वित्त मंत्रालय ने टैक्सपेयर को दुविधा में डाल दिया है। करदाता यह निर्णय नहीं कर पा रहा है कि पुराने स्लैब में रहें या नए में।
इस बार के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीता रमन ने करदाताओं को दो विकल्प दिए हैं। इसमें से एक विकल्प का चुनाव करना है। इस समय वेतनभोगी करदाता वर्ष 2019-20 के गणना पत्रक तैयार कर जमा करने में व्यस्त हैं। इस वर्ष के कर की प्लानिंग करते समय वह आगामी वर्ष के बारे में भी कर सलाहकारों से चर्चा कर रहे हैं। ऐसे करदाता जिनकी व्यवसाय से आय है उन्हें भी 15 मार्च तक अग्रिम आयकर की अंतिम किस्त जमा करना है। इस किस्त के साथ ही अगले वर्ष की योजना बना रहे हैं कि कौन से विकल्प का चुनाव करना चाहिए। फाइनेंस बिल कहता है कि ऐसे करदाता जिनकी व्यवसाय से आय है उन्हें रिटर्न फाइल करने की निर्धारित तारीख से पहले विकल्प का चुनाव करना होगा एवं अन्य करदाता रिटर्न फाइल करते समय विकल्प का चुनाव कर सकेंगे।
एक बार ही विकल्प चुनें - कर सलाहकार परिषद के पूर्व अध्यक्ष सीए के गोपाल अग्रवाल ने बताया ऐसे करदाता जिनकी व्यवसाय से आय है। वे एक बार ही चुने हुए विकल्प को बदले सकेंगे। वो भी उस गत वर्ष को छोड़ कर जिसमें प्रथम बार विकल्प लिया था। लेकिन वेतनभोगी करदाता विकल्प में परिवर्तन कर सकेंगे।