जिनेंद्रमुनि जी का वर्षावास उज्जैन में होगा
अनुयायियों की मौजूदगी से छोटा पड़ा पंडाल
वर्षावास न मिलने वाले संघ नाराज न हों
प्रवर्तक जिनेंद्रमुनि जी ने कहा साल में 365 दिन होते हैं और साधु-साध्वाजी साल भर जिनवाणी सुनाते हैं। आज का दिन वर्षावास घोषणा का दिन है। विनतियां अधिक रहती हैं पर सभी को वर्षावास नहीं मिल पाता। वर्षावास न मिलने वाले संघ नाराज न हों जिन संघ को वर्षावास मिले हैं या नहीं मिले हैं, वे सभी संघ अच्छी तरह से धर्म-आराधना करें। साध्वी समुदाय के बारे में आपने कहा साध्वी मंडल के वर्षावास ज्यादा होते हैं। धर्म की प्रभावना में भी साध्वी समुदाय का बड़ा योगदान होता है। उनका बराबर लाभ लेना व उनकी सुरक्षा आदि का विशेष ध्यान रखना। सभा में श्री धर्मदास गणपरिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष शांतिलाल भंडारी ने गणपरिषद की चल रही गतिविधियों के बारे में तथा कार्याध्यक्ष मनीष काठेड़ ने संगठन की गतिविधियों के बारे में बताया।
रतलाम | आचार्यश्री उमेशमुनि जी के शिष्य प्रवर्तक जिनेंद्रमुनि जी ने होली चातुर्मास के दौरान मप्र के कल्याणपुरा नगर में अपना व अपने आज्ञानुवर्ती संत-सतियां जी के वर्ष 2020 के वर्षावास स्थलों की घोषणा साधु मर्यादा के आगारों सहित की। प्रवर्तक जिनेंद्रमुनि जी ने अपना वर्षावास मप्र के उज्जैन नमक मंडी श्रीसंघ को प्रदान किया। वर्षावास मिलते ही उज्जैन के श्रावक-श्राविकाओं ने जयकारों से पंडाल को गुंजायमान कर दिया। श्री धर्मदास जैन श्रीसंघ के अध्यक्ष अरविंद मेहता, महामंत्री सुशील गादिया, सचिव दिलीप चाणोदिया ने बताया आपके वर्षावास के लिए इंदौर, बदनावर, रतलाम, थांदला, महिदपुर आदि श्रीसंघों ने विनती भी की थी। समारोह के दौरान देशभर के अनुयायी मौजूद रहे, जिससे पंडाल छोटा पड़ गया। शहर से भी श्रावक-श्राविकाएं पहुंचे थे।
16 साधु-साध्वी जी विराजित थे - प्रवर्तक जिनेंद्रमुनि जी, अणु वत्स संयतमुनि जी, धर्मेंद्रमुनि जी, संदीपमुनि जी, हेमंतमुनि जी, आदित्यमुनि जी, चंद्रेशमुनि जी, प्रशस्तमुनि जी ठाणा-8 व साध्वी धैर्यप्रभाजी, मुक्तिप्रभाजी, प्रेमलता जी, कुसुमलता जी, अंगुरबाला जी, प्रशमप्रभा जी, शमप्रभा जी, नित्यप्रभा जी, ठाणा-8 कुल 16 साधु- साध्वीजी विराजित थे। श्री धर्मदास जैन श्रीसंघ के कोषाध्यक्ष माणकलाल कटकानी, प्रचार सचिव ललित कोठारी और सहसचिव मनोज मोदी ने बताया वर्षावास घोषणा समारोह में मप्र, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, पंजाब सहित कई प्रांतों के श्रावक-श्राविकाएं बड़ी संख्या में मौजूद थे। प्रवर्तक जिनेंद्रमुनि जी ने अन्य साधु-साध्वी जी के वर्षावास स्थलों की घोषणा भी की। जिसमें मधुबालाजी आदि ठाणा-6 ने रतलाम में वर्षावास करने की घोषणा की।