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पीलियाखाल प्रोजेक्ट पर लगी रोक हटी, नगरपालिका ने जारी किए टेंडर

एक वर्ष पहले
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नगर के मध्य गुजर रहे पांच किमी लंबे पीलियाखाल में गंदे नालों का पानी मिलने से यह बहुत ज्यादा प्रदूषित हो गया है। यही पानी जमीन में रिसकर आसपास क्षेत्र के निजी व सार्वजनिक ट्यूबवेल व अन्य जलस्रोत में मिल रहा। बीमारी फैलने का खतरा है। एनजीटी (नेशनल ग्रीन टि्रब्यूनल) ने इसे प्रदूषण मुक्त करने के लिए शासन व स्थानीय प्रशासन को निर्देश दे रखे हैं।

फरवरी में इससे अनभिज्ञ मप्र शासन के आला अफसरों ने फंड की कमी देखते हुए प्रदेशभर के ऐसे सभी बड़े प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी जिसका काम अभी शुरू नहीं हुआ है। इसमें पीलियाखाल सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट भी शामिल था। एसडीएम ने पत्र लिखकर शासन को एनजीटी के निर्देश व प्रोजेक्ट की गंभीरता बताई। इसके बाद शासन ने रोक हटा दी। नपा ने प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देने के लिए नए सिरे से टेंडर जारी कर दिए। मई तक काम शुरू करने का प्रयास है।

नया मालीपुरा के पास फोरलेन ओवरब्रिज से लेकर सिटी के मध्य होकर महेंद्र नगर के आगे तक जा रहा पीलियाखाल वैसे तो बरसाती नाला है। इसको प्रदूषण मुक्त कर सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना बनी थी। जिसे पिछली सरकार ने प्राथमिकता से पास किया। 8.69 करोड़ लागत के प्रोजेक्ट के लिए दिसंबर में नपा ने टेंडर कर दर स्वीकृति के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा था। लेकिन प्रदेश सरकार ने इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। इससे प्रोजेक्ट खटाई में पड़ गया। इधर एनजीटी ने इसके क्रियान्वयन में हो रही देरी को लेकर नपा को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांग लिया। पशोपेश में पड़े सीएमओ डॉ. केएस सगर, इंजीनियरों ने प्रशासक एवं एसडीएम राहुल धोटे को वस्तुस्थिति बताई। एसडीएम ने डीओ लेटर लिखा और शासन से प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के लिए स्पेशल अनुमति जारी करने की बात कही। इसका असर हुआ और सरकार ने प्रोजेक्ट का काम शुरू करने की अनुमति दे दी। हालांकि पूर्व की दरें अधिक बताते हुए शासन ने वह टेंडर निरस्त कर नए टेंडर जारी करने के निर्देश दिए। सीएमओ ने बताया टेंडर जारी कर दिए है। दरें आते ही अनुमोदन कर स्वीकृति के लिए शासन को भेजेंगे। दरें स्वीकृत होते ही कांट्रेक्टर से अनुबंध करके काम शुरू करवा देंगे।

गंदे पानी को रोकेंगे तभी प्रदूषण मुक्त होगा खाल


नपा इंजीनियर महेशचंद सोनी ने बताया प्रोजेक्ट के तहत नगरीय क्षेत्र में पीलियाखाल के दोनों किनारे सीवरेज पाइप लाइन डलेगी। गंदे पानी को इस लाइन से जोड़ेंगे। ताकि पानी खाल में मिलने की बजाय बाहर निकल जाए। फिर महेंद्र नगर से थोड़ी दूर ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा। इसमें पानी साफ करने के बाद वापस छोड़ा जाएगा। पीलियाखाल प्रदूषण मुक्त होगा। अगले चरण में इसके किनारे पौधरोपण, शंकर मंदिर क्षेत्र व रपट क्षेत्र में फाउंटेन व रंगबिरंगी लाइटें लगाने जैसे काम किए जाएंगे।

नाले से 10 हजार लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा है

नया मालीपुरा से शुरू होकर रपट, पैलेस क्षेत्र, शंकर मंदिर, हाथीखाना, उदासी की बाड़ी व महेंद्र नगर से अबु सईद दरगाह व मुक्तिधाम समीप से बह रहे पीलियाखाल का क्षेत्र करीब 5 किमी है। इसके किनारे दोनों तरफ मिलाकर लगभग 10 हजार लोग रहते हैं। इनके स्वास्थ को खतरा है। लोग बदबू व गंदगी से परेशान है बल्कि यह नगर की स्वच्छ छवि पर दागनुमा है। गंदे पानी से जलस्रोत रिचार्ज हो रहे हैं। इस कारण लोगों में बीमारी फैलने का खतरा है। इसलिए प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण है और इसका क्रियान्वयन होना चाहिए।

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नगर के इस पीलियाखाल में गंदे नालों का पानी मिलने से प्रदूषण फैल रहा है।
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