• Hindi News
  • Mp
  • Ratlam
  • Jaora News mp news mecca39s bovine can be grown in 216 lakh hectares by the absence of monsoon till july 5

मानसून की बेरुखी से 5 जुलाई तक मक्का की बोवनी 21.6 लाख हेक्टेयर में हो सकी

Ratlam News - बिहार में रिकॉर्ड स्तर पर हुआ मक्का का उत्पादन चटनी की तरह से साफ हो गया। हाल ही में कुल 5 लाख टन मक्का के आयात की...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:00 AM IST
Jaora News - mp news mecca39s bovine can be grown in 216 lakh hectares by the absence of monsoon till july 5
बिहार में रिकॉर्ड स्तर पर हुआ मक्का का उत्पादन चटनी की तरह से साफ हो गया। हाल ही में कुल 5 लाख टन मक्का के आयात की मुर्गी आहार उद्य‌ोग को अनुमति दी गई है। स्टॉर्च फैक्टरियों ने भी आयात के लिए आवेदन लगा रखे हैं। 5 जुलाई तक मक्का की बोवनी 21.6 लाख हेक्टेयर में हो सकी थी, जबकि गत वर्ष 30.96 लाख हेक्टेयर में हुई थी। 15-20 जुलाई तक बोवनी का अंतिम आंकड़ा आने के बाद पुन: आयात की तैयारी करना पड़ सकती है। मक्का के भाव को देखते हुए रिकॉर्ड बोवनी की आशा पर मानसून ने पानी फेर दिया है। इस बार मानसून बराबर जम नहीं पा रहा है। मौसम विभाग ने चुप्पी साध ली है। बोवनी के आंकड़ों को देखते हुए मक्का में बड़ी मंदी आना कठिन है।

कुल 5 लाख टन आयात

बिहार में रिकॉर्ड स्तर पर हुई मक्का की पैदावार चटनी की तरह साफ हो गई। वर्तमान में गेहूं से मक्का कई महीनों से महंगी बिक रही है। भावों में किसी तरह मंदी के संकेत भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। हाल ही में डीजीएफटी ने 1 लाख टन पूर्व में एवं 4 लाख टन हाल ही में आयात की अनुमति दी है। मक्का पर 15 प्रतिशत आयात शुल्क देना होगा। इसका उपयोग उद्य‌ोग में ही किया जाएगा। मुर्गी आहार वालों की मांग को पूरा करने के लिए उपरोक्त कोटा जारी किया है। स्टॉर्च फैक्टरी वालों ने भी आयात के लिए आवेदन लगा रखे हैं। देखना है वाणिज्य मंत्रालय इनकी मांग को स्वीकार करता भी है या नहीं। केंद्र सरकार को बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए पहले से ही निर्यात कोटे की घोषणा कर देना था। इसके साथ यह भी शर्त लगा दी जाना थी कि जिस फैक्टरी के लिए आयात की अनुमति मांगी गई है, उसका उपयोग उसी परिसर में होगा। खुले बाजार में नहीं बेच सकेगी। इससे आयातित माल का सही उपयोग हो सकता है।

रिकॉर्ड उत्पादन नहीं होगा

पूर्व में ऐसी आशा थी कि मानसून सामान्य या इससे कम भी रहा तब भी मक्का की बोवनी का रकबा काफी अधिक बढ़ सकता है। पिछले एक वर्ष से मक्का के भाव समर्थन भाव से काफी ऊंचे चल रहे हैं। अत: बोवनी तो अधिक होना स्वाभाविक थी किंतु इस बार मानसून अभी तक जम नहीं पाया है। कहीं-कहीं वर्षा काफी अधिक हो गई है तो अनेक स्थानों पर अभी भी पानी की कमी है। कई क्षेत्रों में बोवनी नहीं हो सकी है। 30 जून तक बोवनी की स्थिति अच्छी नहीं रही थी। जुलाई के प्रथम सप्ताह में मानसून की वर्षा अच्छी मात्रा में हुई है। फिर से मानसून गायब हो गया है। देखना यह है कि आगामी 15 जुलाई तक कितनी मात्रा में वास्ताविक रूप से बोवनी हुई उसके बाद ही आंकड़ा स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगा। पहले उद्य‌ोगों को यह आशा थी कि खरीफ सीजन में इतनी बड़ी मात्रा में बोवनी होगी और मक्का एक बार फिर से समर्थन भाव से नीचे बिक सकती है किंतु मानसून जिस तरह से व्यवस्थित रूप से जमना था, वह नहीं जम सका है। अत: खरीफ में मक्का के रिकॉर्ड उत्पादन की आशा धूमिल होती नजर आ रही है। इसी वजह से उद्य‌ोगों में अधिक घबराहट है। बोवनी के अंतिम आंकड़े आने के बाद संभवत: आयात की मांग करने वालों की वाणिज्य मंत्रालय में लाइन लग सकती है। यह भी सही है कि आयातित एवं देशी मक्का के भावों में अंतर तो है, किंतु अधिक नहीं है। आयात के बाद उद्य‌ोग चलना तो तय हो जाएगा।

दक्षिण भारत में आवक

पिछले दिनों आंध्र ने सालूरु, चिपुरपल्ली, विजयनगर लाइन में प्रतिदिन 11-12 मोटर मक्का की आवक हो रही थी लोकल में 2300रुपए के भाव से कामकाज हो रहे थे। चिपुरुपल्ली लाइन का माल 2400 रुपए में बिक गया था। गुंटूर जिले से लोडिंग कंडीशन पर 2400 रुपए में कामकाज हुए है। इसी तरह तेलंगाना के वारंगल, केसमुद्रम, मेटापल्ली, खम्मस, जडचर्ला लाइनों में 2250 से 2300 रुपए एवं कर्नाटक के उत्पादक केंद्रों पर 2250 से 2300 रुपए, तमिलनाडु में लूज मे्ं 2400 से 2450 में बिकने की चर्चा रही। दक्षिण भारत में अनेक व्यापारी स्टॉक करने में लग गए हैं, क्योंकि उन्हें मक्का का भविष्य फिलहाल मंदा नहीं लग रहा है। दक्षिण भारत के राज्यों में मक्का की आवक कमजोर पड़ने से मंदी पर ब्रेक लगा हुआ है। इसके अलावा दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में वर्षा की स्थिति बहुत अधिक अनुकूल नहीं है। इससे न केवल मक्का वरन् अन्य फसलें भी कमजोर उतरने की आशंका रखी जाने लगी है।

मप्र में मक्का कांड?

ई-मेल अनुज्ञा पत्र बंद करने के साथ ही बाजारों में यह चर्चा चल पड़ी है कि प्रदेश के एक प्रभावशाली क्षेत्र में मंडी समिति के कर्मचारियों ने तथाकथित किसानों के साथ मिलकर ऐसा कांड कर डाला जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की गई थी। बताया जाता है कि हजारों बोरी मक्का की बिक्री बता दी गई और भावांतर योजना का लाभ ले लिया। ई-मेल पद्धति में अनुज्ञा पत्र बनवाने में कुछ ऐसी जानकारी देना होती है, जिसमें हेराफेरी पकड़ में जाती है। चूंकि मक्का कांड ताजा-ताजा हुआ है इस प्रणाली के माध्यम से पकड़ में आ सकता था, प्रभावशाली व्यापारियों ने इस प्रणाली पर ब्रेक लगवा दिया था। बाजार में तो चर्चा यह भी है कि मंडी बोर्ड के एक बड़े अधिकारी को भी इसी वजह से हटना पड़ा।

प्रांगण पर नियंत्रण नहीं

सत्ता सुख भोग रह नए मंत्रियों एवं विधायकों को यह पता होना चाहिए कि पिछले कई वर्षों से अनुज्ञा पत्र बनवाने के लिए एक निश्चित राशि जजीया कर के रूप में वसूली कर रही है। इसका वितरण कैसे होता होगा पता नहीं। जावरा-नीमच मंडी दो नंबर में सिरमोर है। इस खुले भ्रष्टाचार का पता मंडी सचिव, प्रांगण प्रभारी नहीं होगा? मंडी कर्मचारी करोड़पति बन रहे हैं। इंदौर की फल-सब्जी मंडी धन की खदान है। जहां से हजारों रुपए प्रतिदिन निकलाने के बाद कभी समाप्त नहीं होते हैं। हाल ही में पकड़े गए नागारिक आपूर्ति विभाग के अधिकारी ने एक दिन में इतनी संपित्त एकत्र नहीं की है। इतने लंबे समय तक शासन की आंख क्यों बंद रही। इंदौर की सब्जी मंडी में अवैध कब्जे वैसे ही नहीं होते हैं। इसमें प्रांगण के कर्मचारियों का खुला सहयोग होता है, उसकी एवज में प्रतिदिन नजराना भी लिया जाता है। कब्जे हटने के बाद जांच इस बात की होना चाहिए कि किनके आशीर्वाद से बैठे थे। उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए।

आगामी महीनों में माल की कमी बनी रहेगी

हाल ही में आर्थिक मामलों की कमेटी ने वर्ष 2019-20 के लिए मक्का का समर्थन मूल्य 1700 से बढ़ाकर 1760 रुपए क्विंटल पर दिया गया है। पिछले लंबे समय से देश की अनेक मंडियों में मक्का 2000 रुपए से ऊपर बिक रही है। अत: समर्थन मूल्य बढ़ने से किसानों को कोई खुशी नहीं हुई है। रिकॉर्ड भाव के बावजूद सूखे की वजह से बोवनी 5 जुलाई तक 21.6 लाख हेक्टेयर में हो सकी है, जबकि गत वर्ष 30.96 लाख हेक्टेयर में बोवनी हो चुकी थी। बोवनी का कार्य देशव्यापी जारी है। बोवनी का अंतिम आंकड़ा क्या आता है, उसी पर बाजार की आगे की चाल निर्भर करेगी। जानकारों का मत है कि अगले एक वर्ष तक मक्का की कमी तो नहीं रहेगी, किंतु भावों में अधिक तेजी भी नहीं आ सकेगी। ऊपरी भावों पर मुर्गी आहार वालों को पड़तल नहीं बैठ रही है। आयात के बाद मुर्गी आहार उद्य‌ोग को पड़तल लगने लगेगी और खुले बाजार में मांग भी कम पड़ जाएगी।

नए सीजन में मक्का समर्थन मूल्य 1760 रुपए

खरीफ सीजन में सभी कृषि जिंसों का उत्पादन घटेगा

दक्षिण भारत में मक्का 2200 से 2400 रुपए क्विंटल

स्टॉर्च फैक्टरी वाले भी बड़ी मात्रा में आयात के पक्ष में

X
Jaora News - mp news mecca39s bovine can be grown in 216 lakh hectares by the absence of monsoon till july 5
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना