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मैक्सिकोः हिंसा के खिलाफ महिलाओं की हड़ताल से थम गया देश, पूछा- हमारे बिना दुनिया कैसी होगी, अंदाजा लगा लीजिए
राजधानी मैक्सिको सिटी के ज्यादातर इलाकों में सोमवार को वातावरण शांत था। ट्रैफिक से भरा रहने वाला शहर सूना पड़ा था। स्कूल, कॉलेज, दफ्तर, बाजारों से महिलाएं गायब थीं। देश थम सा गया था। इसकी वजह वे महिलाएं थीं, जो अपने हिंसा के खिलाफ हड़ताल पर थीं। महिलाओं के बिना खाली पड़ी जगहों की तस्वीरें दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हैं। यहां तक कि राष्ट्रपति आंद्रेस मैनुअल लोपेज ओब्रेडोर की डेली प्रेस ब्रीफिंग में भी कुर्सियां खाली थीं। महिला पत्रकारों ने इसका बहिष्कार किया था। महिलाओं ने अपराधियों के खिलाफ सरकार से कड़ी कार्रवाई करने की मांग करते हुए पूछा- देख लीजिए, हमारे बिना दुनिया कैसी हो जाएगी, इसका अंदाजा लगा लीजिए। मैक्सिको में रोज 10 महिलाओं को मार दिया जाता है। ऐसा ही चलता रहा, तो वे हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी। एक्टिविस्ट लोरना वोल्फर ने कहा- एक ऐसे देश में रहना अब संभव नहीं है, जहां किसी महिला की निर्मम तरीके से हत्या कर दी जाती है, वह भी बिना किसी गुनाह के।
राष्ट्रपति ओब्रेडोर महिलाओं पर अत्याचारों के लिए अतीत की उदारवादी नीतियों को जिम्मेदार बताते हैं। उन्होंने हड़ताल को उचित बताया, लेकिन यह भी कहा कि विरोधी उन्हें नाकाम होते देखना चाहते हैं, इसलिए हड़ताल को भड़का रहे हैं।
दैनिक भास्कर से विशेष अनुबंध के तहत
मैक्सिको में जनवरी 2019 से सितंबर तक 2,833 महिलाओं की हत्या हुई थी। हिंसा के खिलाफ महिलाओं की हड़ताल का खामियाजा अर्थव्यवस्था को भी भुगतना पड़ा। बिजनेस ग्रुप कॉन्सानको सर्वितुर के मुताबिक हड़ताल से देश को महज एक दिन में करीब 9721 करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। आप महिलाओं की अनदेखी कर ही नहीं सकते।
हड़ताल से एक दिन में 9,700 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान