1000 से अधिक घाेड़ारोज फसलें रौंद रहे, मुआवजा कभी नहीं दिया

Ratlam News - किसानों के खेतों में फसल रौंदने के बाद पीछे रह जाते हैं नीलगायों के निशान। भास्कर संवाददाता | नेतावली/जावरा ...

Dec 04, 2019, 09:06 AM IST
किसानों के खेतों में फसल रौंदने के बाद पीछे रह जाते हैं नीलगायों के निशान।

भास्कर संवाददाता | नेतावली/जावरा

रोजड़ों (नीलगाय) के कारण खेतों में फसलें बर्बाद हो रही है। रोजड़े खेतों में पहुंचकर फसलों को रौंदकर नुकसान पहुंचा रही है। ब्लॉक में एक हजार से अधिक नीलगाय होने से समस्या विकराल होती जा रही है। विभाग रोकथाम के लिए प्रयास नहीं कर रहा। किसानों की फसल नुकसानी में मुआवजे का प्रावधान है, लेकिन अब तक किसी किसान को नीलगाय से हुई फसल नुकसानी के लिए मुआवजा नहीं मिला है। शासन भी किसानों की समस्या को दूर करने के लिए कदम नहीं उठा रहा है।

गोंदीशंकर के शांतिलाल सोलंकी ने बताया नीलगाय किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। नीलगाय झुंड में रूप में खेत में घुस जाती है, उसे तबाह कर देती है। डेढ़ बीघा में गेहूं व मैथी लगाई है। नीलगाय से फसलों को बचाना मुश्किल हो गया है। सर्दियों में रखवाली कर पाना मुश्किल है। जैसे-जैसे फसलें बढ़ने लगी है। नीलगाय द्वारा किए जा रहे नुकसान की मात्रा भी बढ़ रही है। कई बार ये जीव सड़क पर दौड़ते हुए नजर आ जाते हैं, जिससे अचानक ही लोग दुर्घटना के शिकार हो जाते है। किसानों का कहना है कि 10 फीसदी से अधिक फसल नीलगायों की भेंट चढ़ जाती है। प्रशासन ने नीलगाय पकड़ने के लिए अभियान भी चलाए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

पहले वन विभाग, अब राजस्व विभाग देता है मुआवजा

2010 से पहले खेतों में नुकसानी का मुआवजा वन विभाग देता था। लोक सेवा गारंटी अधिनियम लागू होने के बाद सर्वे के साथ मुआवजा वितरण व्यवस्था राजस्व विभाग को मिल गई। पटवारी मूल्यांकन कर पंचनामा बनाते हैं। अभी तक किसी किसान को मुआवजा नहीं मिला है।

किसान आवेदन नहीं कर रहे इसलिए नहीं मिल रहा मुआवजा : नुकसान की भरपाई का प्रावधान है, लेकिन किसान जागरूक नहीं होने के कारण वे नुकसानी का आवेदन नहीं कर रहे। इधर वन विभाग की डीएफओ वासु कनोजिया ने बताया नीलगायों की नुकसानी का मुआवजा देने का काम राजस्व विभाग का है। तहसीलदार नित्यानंद पांडेय ने बताया नीलगाय से हुई फसल नुकसानी देने के लिए वन विभाग का प्रतिवेदन लगता है। अगर वे प्रतिवेदन बनाकर देंगे, जिसमें स्पष्ट होगा कि किसान की फसल नुकसानी नीलगाय से हुई है ताे हम जितना नुकसान हुआ है, उतना मुआवजा दे सकते है। अभी हमारे पास प्रतिवेदन ही नहीं आया।

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