गरबों के बिना सूना है मां कालिका माता का प्रांगण

Ratlam News - कोरोना वायरस संक्रमण के चलते भक्तों की संख्या नगण्य रतलाम-बांसवाड़ा मार्ग स्थित धामनोद में श्री कालिका माता...

Mar 30, 2020, 08:21 AM IST

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते भक्तों की संख्या नगण्य

रतलाम-बांसवाड़ा मार्ग स्थित धामनोद में श्री कालिका माता मंदिर स्थित है। यहां हर साल चैत्र नवरात्रि में सैकड़ों भक्तों की मौजूदगी की बीच पूजा-अर्चना व आरती होती है। 9 दिनों तक गरबे गाए जाते हैं, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के चलते मंदिर में सन्नाटा है।

मंदिर के पुजारी सत्यनारायण शर्मा ने बताया सुबह व शाम पूजा-अर्चना व आरती करने के बाद मंदिर के पट बंद किए जा रहे हैं। सुबह लॉकडाउन में दी जा रही छूट में 7-8 भक्त दर्शन के लिए आ जाते हैं। लेकिन शाम को भक्तों की संख्या नगण्य रहती है। हर साल चैत्र नवरात्रि में बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन करने आते हैं। सप्तमी, अष्ठमी और नवमी में भक्तों की संख्या काफी
रहती है। प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा हुई है अष्टमी पर चार-पांच भक्तों की मौजूदगी में हवन किया जाएगा। उन्होंने बताया पिछले 30 सालों से वे मां की पूजा-अर्चना कर रहे हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब ऐसा माहौल देखने को मिल रहा है।

800 साल पुराना है मंदिर, 1980 में किया गया था पुनर्निर्माण, पहली बार है प्रांगण सूना


श्री कालिका माता मंदिर 800 साल पुराना बताया जाता है। 1980 में इसका पुनर्निर्माण किया गया था। मंदिर के गर्भगृह में मां कालिका माता के आसपास मां सरस्वती और मां अम्बे विराजित है। गर्भगृह के बाहर परिक्रमा में नौ देवी शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री माता विराजित हैं। मंदिर परिसर में दोनों तरफ गंगा और यमुना माता की प्रतिमा विराजित है। मंदिर परिसर के बाहर शिव मंदिर, वीर तेजाजी महाराज मंदिर, विशाल शिव प्रतिमा और प्रवेश द्वारा विशेष आकर्षण का केंद्र है। मंदिर के पुनर्निर्माण में रामचंद्र मिस्त्री का उल्लेखनीय योगदान रहा है। शारदीय नवरात्रि में कालिका माता मंदिर प्रांगण में गरबा रास होता है।

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