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नवाब बोले: हम प्रशासन से विवाद नहीं चाहते, खुद हटा लेंगे बाउंड्रीवाॅॅॅल लेकिन कोर्ट जाएंगे
हाथीखाना क्षेत्र में सर्वे नंबर 535 व 536 की जमीन को प्रशासन द्वारा सरकारी घोषित किए जाने के बाद यहां काबिज 21 लोगों को बेदखल करने के लिए सोमवार को राजस्व टीम मौके पर पहुंची। सूचना पर नवाब सरवर अली खान ने एसडीएम को फोन कर स्वेच्छा से बाउंड़्रीवॉल हटवाने की बात कही। टीम मौके पर काबिज लोगों को दो दिन की मोहलत देकर लौट गए। हुसैन टेकरी के मुतव्वली नवाब सरवर अली खान ने कहा कि हम प्रशासन से विवाद नहीं चाहते है। इसलिए बाउंड्री हटा लेंगे लेकिन जमीन रियासत विलय की शर्त अनुसार हमारी है। इसके लिए हम कोर्ट जाएंगे। न्यायालय पर भरोसा है और वहां से जीतकर आएंगे।
हाथीखाना क्षेत्र के सर्वे नंबर 535 में 0.139 और 536 में 8.536 हेक्टेयर जमीन को लेकर प्रशासन और नवाब के बीच विवाद है। जांच के बाद प्रशासन ने इसे सरकारी जमीन माना। वहीं नवाब का कहना है कि रियासत विलय के दौरान सरकार ने जमीन हमें दी और हम मालिक है। एसडीएम राहुल धोटे ने जांच के बाद इसे सरकारी मानते हुए यहां से सभी 21 लोगों के कब्जे और बाउंड़्रीवॉल तोड़ने के निर्देश दिए। सोमवार सुबह राजस्व निरीक्षक रामविलास वाक्तरिया के नेतृत्व में पटवारी पंकज राठौर, अनामिका ओहरी, रसूबाला गामड़, गोपाल रावत दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। जमीन खरीदारों से बाउंड्री हटाने का कहा तो उन्होंने दो दिन का समय मांगा। इसके बाद टीम वापस लौटकर आ गई है। तहसीलदार नित्यानंद पांडेय ने बताया कि जमीन 1911 से सरकारी दर्ज है। इसलिए प्रशासन अपनी जगह सही है। यदि सरवर अली कोर्ट जाने की बात कह रहे है तो वे स्वतंत्र है। प्रशासन भी कोर्ट में अपना पक्ष रखेगा।
ये है मामला, शिकायत पर हुई प्रशासनिक जांच में सरकारी निकली भूमि
जनवरी में एक गोपनीय शिकायत पर एसडीएम ने जांच कमेटी बनाई और तहसीलदार नित्यानंद पांडेय से रिपोर्ट तलब की। तहसीलदार ने सभी 21 लोगों से दस्तावेज तलब किए। जिन्होंने नवाब सरवर अली से रजिस्ट्री करवाकर ये जमीन खरीदी थी। इसमें पता चला कि राजस्व रिकाॅर्ड में जमीन आबिद अली, सैफुद्दीन बोहरा व अन्य के नाम दर्ज है। जबकि वर्ष 2018 से 2019 के बीच इसे नवाब ने इन 21 लोगों काे बेच दिया है। इस जमीन को लेकर पूर्व में आबिद अली अन्य तथा नवाब के बीच कोर्ट केस चले। एक फैसले के आधार पर नपा ने सरवर अली के नाम से नामांतरण किया और इसी आधार पर जमीन बेच दी। प्रशासन ने वर्ष 1911 से अब तक का राजस्व रिकाॅर्ड खंगाला। इसमें जमीन सरकारी होना पाया गया। इसी आधार पर तहसीलदार ने एसडीएम को रिपोर्ट पेश की।
राजस्व टीम कब्जे हटाने पहुंची, दो दिन की मोहलत के बाद लौटी