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यात्री ट्रेनों के बिजली इंजिन डीजल शेड में सुधरेंगे, 52 साल बाद हुआ बड़ा बदलाव, 10 इलेक्ट्रिक इंजिन भी मिले

2 वर्ष पहले
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रेल मंडल की ट्रेनों के बिजली के इंजिन की मरम्मत जल्द ही डीजल शेड में होने लगेगी। मुख्यालय ने वडोदरा और वलसाड के 10 इंजिन भी शेड के नाम कर दिए हैं।

1 सितंबर को सारे इंजिन रतलाम पहुंच जाएंगे। 12 तकनीशियनों की पहली बैच वडोदरा शेड से ट्रेनिंग लेकर आने के बाद दूसरी टीम रवाना हो गई है। बुधवार को तकनीकी स्टाफ ने दाहोद वर्कशाॅप में इलेक्ट्रिकल लोको असेंबली यूनिट में ट्रेनिंग ली।

 

सालभर में 100 तक पहुंच जाएगी इंजिन संख्या

भले ही शुरुआत 10 इंजिन से हो रही हो लेकिन रेलवे का टारगेट एक साल में शेड को 100 बिजली के इंजिन देने का है। इसके लिए बिजली इंजिन की छोटी-मोटी मरम्मत के लिए बनाए गए ट्रिप शेड से डीजल शेड तक लगभग 500 मीटर लंबे ट्रैक पर ओएचई डालकर इलेक्ट्रिफिकेशन किया जाएगा। जरूरत के मुताबिक पांच पिट लाइन, एक शाॅफ्ट मशीन, एक टायर टर्निंग मशीन सहित अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर शेड में पहले ही मौजूद हैं।

140 से 104 रह गई डीजल इंजिन की संख्या

रेल मंडल में हो रहे विद्युतीकरण के चलते शेड में डीजल इंजिन की संख्या लगातार कम हो रही है। 18 साल पहले तक डीजल शेड के पास 140 इंजिन की होल्डिंग थी, वर्तमान में यह संख्या घटकर 104 रह गई है। रतलाम-नीमच-चित्तौड़गढ़ और रतलाम-इंदौर का काम पूरा होने पर डीजल इंजिन की उपयोगिता और खत्म हो जाएगी।

250 कर्मचारियों को करेंगे ट्रेंड

डीजल शेड में 450 कर्मचारी हैं। इनमें 250 से ज्यादा को बिजली इंजिन का मेंटेनेंस करने के लिए ट्रेंड किया जाना है। इनमें से 30 से ज्यादा सुपरवाइजरों की ट्रेनिंग हो चुकी है। सवा माह में कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी।

डीजल शेड में अब डीजल के साथ बिजली के इंजिन का भी मेंटेनेंस होगा। हेडक्वार्टर से 10 इंजिन का अलाॅटमेंट हो गया है। सभी 1 सितंबर तक पहुंच जाएंगे। ट्रेनिंग प्रारंभ हो गई है। आरएन सुनकर, डीआरएम

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