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जांच / 43 दिन में 400 गवाहों के बयान, एक बच्ची से दुष्कर्म का प्रयास, दो से छेड़छाड़ के सबूत मिले, 400 पेज की चार्जशीट पेश



mp news ratlam kundan kutir shelter home case 400 page chargsheet filed section 376 included
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  • कुंदन कुटीर बालिकागृह की जांच पूरी, आजीवन कारावास व फांसी के प्रावधान वाली धारा 376 एबी भी बढ़ाई
  • आरोपियों को 26 मार्च तक की न्यायिक हिरासत में भेजा, इसी दिन जारी हो सकता है आरोप-पत्र

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 11:19 AM IST

जावरा/रतलाम. कुंदन कुटीर बालिका गृह में नाबालिग लड़कियों के साथ शारीरिक, मानसिक शोषण, यौन शोषण व उनकी देखभाल में लापरवाही के बहुचर्चित मामले में पुलिस ने कोर्ट में 400 पेज की चार्जशीट पेश कर दी है। 31 जनवरी को एफआईआर दर्ज होने के दूसरे दिन 1 फरवरी को एसपी ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित की। टीम ने 43 दिन में बालिकागृह में रह चुकी 307 बालिकाओं के साथ 400 गवाहों के कथन दर्ज किए। चालान पेश होने के बाद शुक्रवार को जेल में बंद आरोपियों की न्यायालय में पेशी हुई। चालान की प्रति इनके वकीलों को उपलब्ध करवाने के साथ आरोपियों को 26 मार्च तक के लिए जेल भेज दिया। इसी दिन न्यायालय द्वारा आरोप पत्र जारी किया जा सकता है।

 

बालिकागृह की जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने शुक्रवार को द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ओपी. बोहरा की कोर्ट में चालान पेश किया। अब न्यायालय की तरफ से आरोप-पत्र जारी होगी। सुनवाई के साथ ही गवाह-सबूत पेश होंगे। फिर सजा सुनाई जाएगी। एसआईटी प्रमुख सीएसपी अगम जैन, टीआई बीएल सोलंकी, जांच अधिकारी एसआई मधु राठौर, विजय सनस ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में चार्जशीट के बारे में जानकारी दी।

 

सीएसपी जैन ने बताया 25 पुलिस टीम ने मप्र के साथ ही पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, ओडिशा व उत्तरप्रदेश, राजस्थान में जाकर सभी 307 बालिकाओं के कथन दर्ज किए। जिन बालिकाओं ने अपराध की पुष्टि की उनके कोर्ट में धारा 164 के कथन करवाए गए। 12 साल से कम उम्र की एक बालिका के साथ अटेंप्ट टू रेप की मेडिकल रिपोर्ट है। दो बालिकाओं ने छेड़छाड़ के बयान दिए है। बाकी ने देखरेख में लापरवाही, पर्याप्त भोजन नहीं मिलने, जरूरत से ज्यादा बंदीखत जैसे बयान दिए है।

 

संस्था के अन्य पदाधिकारियों, सदस्यों, बालिकागृह में काम करने वाली कर्मचारियों, पूर्व कर्मचारियों, घरेलू नौकरों से भी पूछताछ की है। उज्जैन फर्म एवं सोसायटी कार्यालय से भी रिकॉर्ड तलब किया। करीब 150 पुलिसकर्मियों ने जांच में सक्रिय भूमिका निभाई।


यह है मामला, इन 6 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चलेगा प्रकरण : पिपलौदा रोड पर प्रतापनगर कॉलोनी में कुंदन वेलफेयर सोसायटी द्वारा संचालित कुंदन कुटीर बालिकागृह से 24 जनवरी को दोपहर 12 बजे पांच बालिकाएं भागी थी। इसी दिन ये मंदसौर में मिली। कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच करवा।

 

बालिकाओं के शारीरिक, मानसिक, यौन शोषण व देखरेख में लापरवाही उजागर हुई। नायब तहसीलदार सीएल टांक ने 31 जनवरी को आईए पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई।

 

संस्था की पूर्व अध्यक्ष डॉ. रचना भारतीय, उनके पति एवं संस्था कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश भारतीय, वर्तमान अध्यक्ष संदेश जैन, सचिव दिलीप बरैया को आरोपी बनाया था। बालिका गृह अधीक्षिका हंसा पाठक, पूर्व अधीक्षिका नेहा कुंवर सिसौदिया को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया। ये सभी जेल में है और इनके खिलाफ ही अब कोर्ट में प्रकरण चलेगा।


जिनकी जिम्मेदारी और सक्रिय भूमिका थी, वे ही आरोपी बनाए : विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय, आलोट विधायक मनोज चावला सहित अन्य ने आशंका जताई थी कि इसमें कई प्रभावी लोग शामिल हो सकते हैं। सीएसपी ने बताया जांच में जिनकी सक्रिय भूमिका व जिम्मेदारी तय हुई उन्हें आरोपी बनाया है।
 

जांच के लिए ईओडब्ल्यू को लिखेंगे पत्र : सीएसपी ने बताया वित्तीय अनियमितता के संदर्भ में जांच के लिए महिला बाल विकास विभाग को पत्र लिखेंगे, जरूरी हुआ तो ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) को पत्र लिखा जाएगा।



तीन आरोपी कोर्ट में पेश, तीन महिला आरोपियों की वीसी हुई :शुक्रवार को आरोपी ओमप्रकाश, संदेश, दिलीप की कोर्ट में पेशी हुई। रचना, नेहा व हंसा की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई। ये तीनों रतलाम जेल में है। इनकी न्यायिक हिरासत 26 मार्च तक बढ़ा दी। फिलहाल किसी की तरफ से जमानत की अर्जी नहीं लगी है।

 

अब गवाहों को पेश करने की चुनौती : पुलिस के मुताबिक प्रकरण में सारे ठोस सबूत मिल गए। इसलिए धारा विलोपित करने की बजाय जोड़ना पड़ी। अब पुलिस के सामने चुनौती सारे गवाहों को पेश करने की रहेगी। 7 राज्यों से समय पर गवाह पेश करना चुनौती है।


दूसरे प्रदेशों में जांच में भाषा की आई परेशानी : ओड़िशा, पश्चिम बंगाल की बालिकाओं को हिंदी नहीं आती। यहां तक की वहां के थानों में पदस्थ जवान भी हिंदी में बात नहीं कर पा रहे थे, एसपी गौरव तिवारी ने अपने बैच के अन्य अधिकारियों की मदद से जांच पूरी करवाई।


जांच के बाद दो धारा बढ़ाई : आईपीसी की धारा 376 (2) (डी), 354, 323, 120 बी, 34, पॉक्सो एक्ट की धारा 5डी, 6, 7, 8 व किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 में केस दर्ज किया था। जांच में एक 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ अटेंप्ट टू रेप की मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने इस केस में धारा 376 ए,बी तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 17 भी बढ़ा दी है।


धारा और उसमें सजा का प्रावधान

  • धारा 376 एबी :- 12 साल से कम उम्र की बालिका के साथ ज्यादती या ज्यादती के प्रयास की इस धारा को मप्र में अप्रैल 2018 से लागू संशोधित नए एक्ट में जोड़ा गया है। इसके तहत आजीवन कारावास या फांसी तक का प्रावधान है।
  • धारा 376 (2), (डी) :- दुष्कर्म में एक से अधिक लोगों द्वारा सहयोग करने की स्थिति में आजीवन कारावास व मृत्युदंड तक का प्रावधान है।
  • धारा 120-बी :- आपराधिक साजिश व इसमें शामिल आरोपियों को उसी सजा का प्रावधान है, जो संबंधित मुख्य धारा में अधिकतम सजा का है।
  • धारा 354 :- बुरी नीयत से छेड़छाड़ व लज्जा भंग के आरोप में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 5 साल तक की सजा का प्रावधान है।
  • धारा 323 :- मारपीट, हाथापाई, बुरे व्यवहार से हानि या चोट पहुंचाने के दोषी पाए जाने पर एक साल की सजा व जुर्माने का प्रावधान है। यह अपराध जमानती व समझौतावादी है।
  • पॉक्सो एक्ट 5डी, 6, 7, 8, 17 :- बालकों के मामले में लैंगिक हमला करने की परिस्थितियों में दोषी पाए जाने पर अलग-अलग धाराओं में 5, 10 वर्ष तक या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
  • जेजे एक्ट की धारा 75 :- बालकों की देखरेख और संरक्षण में लापरवाही, ऐसा कृत्य जिससे बालकों को अनावश्यक शारीरिक या मानसिक कष्ट हो, जानबूझकर या अन्य कारणों से उनकी उपेक्षा की गई हो आदि। इन आरोपों में दोषी पाए जाने पर अलग-अलग परिस्थितियों में 3 से 5 वर्ष तक की साधारण/कठोर कारावास की सजा एवं एक से पांच लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।
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