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जब फूलों पर चले साधु तो नाराज हुईं शबरी...

2 वर्ष पहले
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शबरी अपनी कुटिया के बाहर फूल बिछा कर श्रीराम व लक्ष्म का इंतजार करती है, तभी दो साधु आते हैं और उसे पगली कहते हुए उसके द्वारा बिछाए हुए फूलों पर चलने लगते हैं। इस पर शबरी नाराज हो जाती है और कहती है मेरे श्रीराम व लक्ष्मण आएंगे। इस पर साधु कहते हैं शबरी सालों से श्रीराम का इंतजार कर रही है, लेकिन वे नहीं आएंगे। भजन के साथ श्रीराम व लक्ष्मण का आगमन होता है। शबरी श्रीराम व लक्ष्मण का कुटिया में आदर-सत्कार करते हुए मीठे बैर चख कर श्रीराम व लक्ष्मण को खाने के लिए देती है, प्रभु राम बैर का सेवन करते हैं, जबकि लक्ष्मण नहीं करते हैं।

यह दृश्य अग्रवाल विद्या मंदिर उमावि में बुधवार को महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर देखने को मिला। तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस में लिखे गए दोहे ताहि देइ गति राम उदारा। शबरी के आश्रम पगु धारा॥ शबरी देखि राम गृह आए। मुनि के बचन समुझि जियं भाए॥ के आधारित यह दृश्य विद्यार्थियों ने चरितार्थ किया। इसमें यह बताया गया कि गुरुदेव जो वचन या आशीर्वाद देते हैं वह पूरा होता है। ऋषि मतंग ने शबरी को आशीर्वाद दिया था कि एक दिन उसे राम के दर्शन जरूर होंगे। यहां छात्रा आरती सोनी ने शबरी, छात्र बालमुकुंद पंडया ने श्रीराम, आकाश पाल ने लक्ष्मण, हेमंत गिरी गोस्वामी व राहुल पंड्या ने साधु का रोल किया। नेहा चहान, मनीष निनामा सहित अन्य विद्यार्थियों ने भजनों की प्रस्तुति दी। अखंड आश्रम के महामंडलेश्वर स्वरूपानंद जी महाराज, स्वामी देवस्वरूपानंद जी ने अपनी बात रखी। प्राचार्य अविनाश व्यास, स्टाफ सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे।

धर्म संस्कृति

श्रीराम व लक्ष्मण को बेर खिलाती शबरी का चित्रण करते विद्यार्थी।

आयोजन में मौजूद संतों का अभिनंदन करते प्राचार्य।

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