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1881 में आई भाप से चलने वाली ट्रेन, 1978 में चला डीजल इंजन, 42 साल बाद अब इलेक्ट्रिक इंजन
जावरा के 145 साल पुराने रेलवे इतिहास में इलेक्ट्रिफिकेशन के बाद रतलाम-नीमच के बीच 8 मार्च 2020 काे पहली यात्री ट्रेन 59811 रतलाम-यमुनाब्रिज (हल्दीघाटी पैसेंजर) बिजली इंजन से चली।
ट्रेन रतलाम से सुबह 8.40 बजे रवाना होकर 9.30 बजे जावरा पहुंची। लोको पायलट मनोज स्वामी लेकर आए। अभी इलेक्ट्रिक इंजन रतलाम से नीमच के बीच ही चला। नीमच से चित्ताैड़गढ़, काेटा हाेते हुए यमुनाब्रिज तक डीजल इंजन से ट्रेन गई। वापसी में 59812
हल्दीघाटी पैसेंजर नीमच से बिजली इंजिन से दोपहर 3 बजे आई। इसे लोको पायलट मोहम्मद शकील लेकर अाए।
रतलाम-चित्तौड़गढ़ सेक्शन के इलेक्ट्रिफिकेशन की स्थिति
नीमच-चित्तौड़गढ़ सेक्शन के शंभुपुरा स्टेशन तक इलेक्ट्रिफिकेशन हो गया है। अब शंभुपुरा-चित्तौड़गढ़ के 13 किमी लंबे सेक्शन में काम चल रहा है, जिसमें पोल लगने के बाद केबल डाली जा रही है।
आगे क्या- चित्तौड़गढ़ तक विस्तार जल्द : रेलवे की योजना अप्रैल में रतलाम से चित्तौड़गढ़ तक इलेक्ट्रिक इंजिन से ट्रेन चलाने की है। वर्तमान में नीमच-चित्तौड़गढ़ के बीच 56 किमी में इलेक्ट्रिफिकेशन चल रहा है। 15 मार्च तक सिंगल लाइन का काम पूरा हो जाएगा। मार्च अंत में सीआरएस निरीक्षण हो जाएगा।
139 साल पहले सुबह 5 बजे आई थी भाप इंजन की पहली अजमेर-खंडवा यात्री गाड़ी
अंग्रेजी शासनकाल में 1875 से 1880 के बीच दिल्ली को दक्षिण से जोड़ने के लिए जयपुर, अजमेर, चित्तौड़गढ़, मंदसौर, रतलाम, इंदौर, खंडवा, अकोला होकर हैदराबाद तक मीटरगेज लाइन डाली थी। 145 साल में इस रेल खंड पर कई परिवर्तन देखने को मिले।
रेलवे के सेवानिवृत वाणिज्य अधिकारी अभय कांठेड़ के मुताबिक मीटरगेज पर 139 साल पहले वर्ष 1881 में पहली यात्री गाड़ी 9671 अजमेर-खंडवा भाप इंजन से चली थी। यह तड़के 5 बजे जावरा पहुंची और वापसी में 9672 खंडवा-अजमेर सुबह 11 बजे आई थी। दूसरी गाड़ी 0582 काचीगुड़ा-अजमेर सुबह 8.30 और 0581 अजमेर-काचीगुड़ा रात 8 बजे आई। तब से 1978-79 तक भाप के इंजन ही चले। फिर डीजल इंजन से मीटरगेज ट्रेन दौड़ी। 30 सितंबर 2006 तक अकोला-अजमेर रेल खंड में गाड़ियां दौड़ती रही। फिर रतलाम-नीमच के बीच गेज परिवर्तन हुआ और 17 जून 2007 को बड़ी लाइन की पहली ट्रेन डीजल इंजन से चली थी। इसका पहला टिकट समाजसेवी कैलाश अग्रवाल ने लिया था। 2018-19 में 400 करोड़ रुपए की लागत से ट्रैक का विद्युतीकरण हुआ और 8 मार्च 2020 से पहली इलेक्ट्रिक इंजन ट्रेन की सौगात मिली है।
8 मार्च से पहली पैसेंजर ट्रेन बिजली इंजन से चलकर जावरा पहुंची है।
1937 ः भारत के वायसराय स्टेट विजिट पर नवाब इफ्तेखार अली से मिलने आए थे। तब भाप इंजन वाली ट्रेन चलती थीं। (भास्कर को यह तस्वीर समाजसेवी शेखर नाहर ने अपने संग्रह से उपलब्ध कराई है।)