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मंडी प्रशासन ने व्यापारियों को दो लाख रु. तक नकद के दिए आदेश, व्यापारियों में इनकम टैक्स की जांच का डर

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:00 AM IST

Ratlam News - मंडी प्रशासन ने व्यापारियों को किसानों को दो लाख रुपए तक नकद भुगतान करने के आदेश दिए हैं। उनके सामने समस्या यह है...

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मंडी प्रशासन ने व्यापारियों को किसानों को दो लाख रुपए तक नकद भुगतान करने के आदेश दिए हैं। उनके सामने समस्या यह है कि वे भुगतान के बाद प्रूफ कैसे करेंगे कि माल किसान का है या व्यापारी का। क्योंकि अनाज मंडी में किसान के साथ गांवों से छोटे व्यापारी उपज बेचने आते हैं और वाउचर पैमेंट होता है। एेसे में रिटर्न फाइल में बिल लगाएंगे तो प्रूफ करने में दिक्कत आएगी। इनकम टैक्स विभाग नोटिस दे सकता है। ऐसे में मंडी सचिव के आदेश से व्यापारी असमंजस में है कि आदेश का पालन कैसे करें। क्योंकि मंडी का आदेश मानेंगे तो इनकम टैक्स प्रूफ के आधार पर जांच निकाल देंगे। एेसे में फिलहाल व्यापारी दो लाख रुपए की जगह 50 हजार रुपए तक का भुगतान ही किसानों को कर रहे हैं बाकी पेमेंट आरटीजीएस और एनईएफटी के जरिए कर रहे हैं। चुनाव बाद व्यापारियों की बैठक होगी और फिर फैसला लिया जाएगा।

मंडी प्रशासन ने ये किए आदेश जारी

मंडी प्रशासन ने व्यापारियों को जारी पत्र में लिखा है कि भारत सरकार वित्त मंत्रालय कार्यालय मुख्य आयकर आयुक्त ने पत्र दिनांक 31 अक्टूबर 2017 में स्पष्ट किया है कि आयकर अधिनियम की धारा 40 ए (3) में प्रावधान है जिसमें दस हजार तक नकद भुगतान की अनुमति है। किंतु आयकर अधिनियम 1962 के नियम 6 डीडी के तहत यह नियम है कि धारा ए 3 उन भुगतान पर लागू नहीं होती है। जहां भुगतान कृषि उपज के उत्पादक या कृषक को किया जा रहा हो एवं नियम 6 डीडी के तहत कृषि उत्पाद एवं वनोपज का भुगतान उत्पादनकर्ता किसान को दो लाख रुपए नकद करने का प्रावधान है। इससे मंडी प्रांगण में किसानों को दो लाख रुपए तक नकद भुगतान करने हेतु समस्त अनुज्ञप्तिधारी को निर्देशित करने का कष्ट करें।

किसानों को सेम-डे भुगतान के भी आदेश नहीं तो लाइसेंस होगा रद्द

मंडी प्रांगण में क्रय की कृषि का भुगतान विक्रेता को उसी दिन मंडी प्रांगण में करना जरूरी है। सेम-डे भुगतान नहीं होने की स्थिति में मंडी अधिनियम की धारा 37 2 ख के अनुसार विक्रेता को देय कृषि उपज पर एक फीसदी की प्रतिदिन दर से अतिरिक्त भुगतान पांच दिन के भीतर करने का प्रावधान है। इस अतिरिक्त अवधि में भुगतान व्यक्तिक्रम होने पर मंडी अधिनियम की धारा 37(2) ग के अनुसार क्रेता व्यापारी की अनुज्ञप्ति छठे दिन स्वतः रद्द समझी जाएगी और उसे एेसे रद्दकरण की दिनांक से एक साल की अवधि के लिए इस अधिनियम के अधीन कोई अनुज्ञप्ति मंजूर नहीं की जाएगी।

आपत्ति नहीं पर कैसे प्रूफ करेंगे

दी ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के सुरेंद्र चत्तर ने बताया नकद भुगतान से हमें आपत्ति नहीं है। इससे तो और व्यापारियों को फायदा है लेकिन मंडी में आने वाले माल को हम इनकम टैक्स विभाग के सामने कैसे प्रूफ करेंगे कि ये किसान का माल है या व्यापारी का। क्योंकि कई व्यापारी गांव से उपज खरीदकर मंडी में बेचते हैं। किसान भी बेचते हैं। दोनों को पेमेंट वाउचर यानी एक ही प्रक्रिया में होता है। कल से इनकम टैक्स ने हम पर रिकवरी निकाल ली तो कौन जवाबदार रहेगा। चुनाव बाद व्यापारियों की बैठक बुलाई जाएगी। इसके बाद मिलकर लेंगे फैसला।

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