चिता पर लेटा व्यक्ति, पास जाकर देखा तो जिंदा था..

Ratlam News - रतलाम के कवियों की भी कोरोना के खिलाफ चल रही कलम... बोल रहे घर में वक्त बिताना है, अपना फर्ज निभाना है रतलाम | शहर...

Mar 27, 2020, 08:20 AM IST

रतलाम के कवियों की भी कोरोना के खिलाफ चल रही कलम... बोल रहे घर में वक्त बिताना है, अपना फर्ज निभाना है

रतलाम | शहर की सड़कें पर आवागमन बंद है, लेकिन सोशल मीडिया चालू है। लोग यहां दिनभर तरह-तरह के मैसेज वायरल कर रहे है। गुरुवार को भी कोरोना के मैसेज ही सबसे ज्यादा वायरल हुए। शहर के कवियों की रचनाएं भी लोगों नेे पसंद की।


एेसा भी हुअा

स्रोत**

{ 14 अप्रैल तक परीक्षा की घड़ी है, आपकी घरवाली आपको उकसाएगी, तरह-तरह के आव्हान करेगी, वाद विवाद प्रतियोगिता के लिए... लेकिन हे पुत्र तुम विचलित ना होना, एक बौद्ध भिक्षुओं की तरह दैवीय मुस्कान बनाए रखना, निश्चित ही जीत आपकी होगी।

{ जो 21 दिन घर में रहेगा, वो ही 2021 की जनगणना में रहेगा।

{ है भगवान ये 2020 को डिलीट करके फिर से इंस्टॉल करो... इसमें वायरस है

{ देश 21 साल पीछे चला जाएगा... इसका मतलब अपन सब फिर से स्कूल में आ जाएंगे... बैठे-बैठे ऐसे विचार आने लगे हैं।


{ एक और नई मुसीबत... कहीं घुमाने लेके जाते ही नहीं, कर्फ्यू वगैरह तो एक बहाना है... बोलते हुए बीबी ने 3 दिनों के लिए किचन लॉक-डाउन का ऐलान कर दिया।

{मैंने रतलाम में घूमने की समस्या का हल ढूंढ लिया है... अपने घर के सभी कमरों के नाम रख दिए हैं। जैसे -

एक कमरे का नाम दो बत्ती....

दूसरे का नाम माणकचौक...

तीसरे का हनुमान ताल....

बालकनी का नाम ईसरथुनी...

किचन का नाम चौपाटी...

अब जहां मर्जी होती है पैदल ही घूम आता हूं .. अभी चौपाटी पर हूं, आ जाआे

टाइमपास वायरल

घर में वक्त बिताना है, अपना फर्ज निभाना है....

सहज, सरल, सुंदर जीवन की लाज बचाना है,

कोरोना का काला साया दूर भगाना है,

घर में वक्त बिताना है, अपना फर्ज निभाना है।

भोले-भाले लोगों को गर समझ नहीं आए,

खड़े सामने खतरों से सबको ही समझाए

मानवता की मिलजुल कर अब लाज बचाना है।

घर में वक्त बिताना है, अपना फर्ज निभाना है।

वायरस कोरोना चल कर स्वयं नहीं आता,

गलती कोई करें नहीं ये हमको समझाता,

हाथ जोड़ना है, लेकिन न हाथ मिलाना है।

घर में वक्त बिताना है, अपना फर्ज निभाना है।

हम सब लोगों की उम्मीदें लंबी हुआ करें

सबको ये “आशीष” मिले सब बरसों जिया करें

भूल भुलैया में न जीवन को उलझाना है।

घर में वक्त बिताना है, अपना फर्ज निभाना है।

{ आशीष दशोत्तर

जावरा |। सोशल मीडिया पर दो-तीन फोटो वायरल हो रहे हैं, इसमें एक व्यक्ति मुक्तिधाम में चिता स्थल पर लेटा है। सिर की पगड़ी पास में रखी है और शरीर में हलचल नहीं है। लगा मौत हो चुकी है। फोटो के नीचे कई कमेंट थे कि इसे पुलिस के हवाले करना था। दारू दिला देते आदि। भास्कर ने जब इस वायरल पोस्ट की पड़ताल की तो माजरा कुछ अलग था। फोटो पोस्ट करने वाले समाजसेवी संजय पटेल से जानकारी ली तो उन्होंने बताया गुरुवार सुबह 10.30 बजे मुक्तिधाम रोड तरफ से गुजर रहा था। तभी हे भगवान मुझे उठा लो की आवाज आ रही थी। पास जाकर देखा तो नयामालीपुरा निवासी 45 वर्षीय राजू माली उर्फू टाम्पी चिता स्थल पर लेटा था। वह कहने लगा मरना है। कारण पूछा तो बोला लॉकडाउन से काम नहीं मिल रहा। आर्थिक तंगी है। मैंने उसे समझाया और 100 रुपए देकर मुश्किल से मुक्तिधाम से घर भेजा।

{पुलिस लट्ठ सैनिटराइज्ड कर रही है क्योंकि ठुकेगा इंडिया तो घर में रुकेगा इंडिया।

{कोरोना ने लोगों को चार अंग्रेजी शब्द सिखा दिए- सैनिटराइजेशन, लॉकडाउन, आइसोलेशन व क्वारन्टाइन।

{ जो लोग सड़कों पर मिलें उनको मारे नहीं, उनको कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों की देखभाल में लगा दें... क्योंकि ये ही हमारे देश के शेर हैं।

{ जिन पति-प|ियों ने 21 दिन शांतिपूर्वक एक-दूसरे को झेल लिया, समझो बस उन्हीं की जन्म कुण्डली ही सही से मिली है, बाकी सब भ्रम है।

X

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना