पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

इंद्रियां भटकाती हैं, परमात्मा के नाम का अंकुश जरूरी

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

पिपलौदा | मनुष्य सारा जीवन सुखों की चाह में गुजार देता है। फिर भी पूर्णता सुख प्राप्त नहीं होता। परमात्मा के दिए हर सुख-दुख को मनुष्य उसका उपहार समझकर ग्रहण करें तो कभी दुखी नहीं होता।

यह बात समन्वय मिशन के प्रेरक, राष्ट्रसंत आचार्य प्रवर डॉ. दिव्यानंद सूरीश्वर जी (निराले बाबा) ने कही। श्री आदिनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर में प्रवचन सभा व मां पद्मावती देवी की आरती पर उन्होंने कहा अहंकार मनुष्य को परमात्मा से दूर ले जाता है। मनुष्य का शरीर उसे भक्ति के लिए मिलता है लेकिन मन उसकी इंद्रियों को स्थिर नहीं रहने देता व एक क्षण में ही मनुष्य को संसार में कहीं भटका देता है। इसे वश में करने के लिए परमात्मा के नाम का अंकुश जरूरी है। जब मनुष्य परमात्मा प्राप्ति के लिए गुरु के सान्निध्य में जाता है तब गुरु द्वारा दिए प्रवचनों का अंकुश मनुष्य के मन पर लगता है तो मन को शांति मिलती है। मां पद्मावती देवी जी की संध्या आरती का लाभ प्रकाशचंद राठी (सुखेड़ा वाले) परिवार ने लिया। अनिल नामेचा, किशोर छाजेड़, मणिलाल धींग, ईश्वरलाल बोहरा, मनीष सुराणा, सीमा बावेल, श्रीकांता सुराणा, महिमा बावेला आदि श्रद्धालु मौजूद थे।
खबरें और भी हैं...