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तुलसी के काव्यों में है मानव जीवन की चिंता का समाधान

2 वर्ष पहले
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संसार में यदि ज्ञान का प्रकाश नहीं होता तो संसार अंधकारमय होता। तुलसीदास काव्य जगत के प्रकाश है। मानव जीवन की सभी चिंताओं का समाधान हम तुलसीदास के काव्यों में देख सकते हैं। तुलसीदास लोक भाषाओं के सजग प्रहरी थे।

यह बात शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. सीएल शर्मा ने कही। बुधवार को तुलसी जयंती पर हुए कार्यक्रम में ब्राह्मणवास स्थित श्री महर्षि श्रंग विद्यापीठ में कही। मुख्य वक्ता के रूप में उन्होंने कहा तुलसीदास के काल में संस्कृत संभ्रात वर्ग की भाषा थी। तुलसीदास संस्कृत के प्रकांड पंडित थे, लेकिन उन्होंने काव्य लोक भाषा में लिखा। अध्यक्षता करते हुए विद्यापीठ अध्यक्ष कन्हैयालाल तिवारी ने तुलसीदास के जीवन के बारे में बताया। सहसचिव सतीश त्रिपाठी, सचिव मांगीलाल व्यास, शिक्षिका प्रज्ञा जोशी, नुपूर देवड़ा सहित स्टाफ व अन्य मौजूद थे।

बच्चों को तुलसीदास के बारे में बताते हुए डॉ. शर्मा।

तुलसी जयंती पर सरस्वती शिशु मंदिर में हुई स्पर्धा

रतलाम | सरस्वती शिशु विद्या मंदिर काटजू नगर में तुलसीदास जयंती मनाई गई। जिसमें विद्यार्थियों ने भाषण, कविता व प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत किए। प्राचार्य जितेंद्र तिवारी ने तुलसी दास के जीवन के बारे में बताया। अखिल भारतीय परिषद सेल्फी विथ कैंपस यूनिट के तहत एबीवीपी के जिला संगठन मंत्री कमलेश यादव व जिला सह संयोजक शुभम ने वार्षिक परीक्षा में प्रथम व द्वितीय आने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। अतिथियों ने 9वीं की लीना मालपानी, युक्ता पुरोहित, यामिनी व्यास, 10वीं की प्रज्ञा पाटिल, त्रिलोक राठौर, चंचल चौधरी, 11वीं की प्रियांशी व्यास, अर्पिता पाटीदार, अंजली मेहरा को पुरस्कृत किया।

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