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सिटी के बीच फोरलेन पर तीन क्राॅसिंग, ब्रेकर नहीं होने से रफ्तार बेलगाम
क्रॉसिंग में नजर चुकते ही होते हैं हादसे, 10 साल में 20 लोगों की हुई मौत
सिटी से होकर निकल रहे जावरा-नयागांव फोरलेन पर भीमाखेड़ी चौराहे से रतलाम नाके के बीच तीन क्रॉसिंग है। सबसे व्यस्ततम चौपाटी चौराहे की क्रॉसिंग है। फोरलेन पर 80 से 100 की स्पीड से रोज 10 हजार से अधिक वाहन गुजरते है। इनमें 5 हजार लोडिंग और बड़े वाहन शामिल है और बाकी छोटे वाहन। लेकिन ये क्रॉसिंग अब हादसों के पाइंट बनते जा रहे हैं। वाहनों की गति पर कंट्रोल के लिए स्पीड ब्रेकर नहीं हैं। पूर्व में हादसे होने पर लोगों ने ब्रेकर बनाने की मांग की। कुछ दिन पूर्व चुरुवाला दाल मिल चौराहे पर बस व टैंकर की भिड़ंत में दो लोगों की जान गई और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। दोबारा ऐसा ना हो इसके लिए अब रहवासी यहां पर स्पीड ब्रेकर की मांग कर रहे हैं। लेकिन अब तक प्रशासन ने यहां पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए है।
आकड़ों की माने तो फोरलेन पर 10 साल में अब तक 70 से अधिक हादसे हुए। तीन दर्जन से अधिक लोग घायल और 15 लोगों की मौत हुई। नगरीय क्षेत्र में बनी क्रॉसिंग पर हादसे का डर रहता है। सर्विस लेन पर रात के समय वाहन पार्क रहते हैं। अधिकांश भारी वाहनों की रफ्तार अधिक होने से ड्राइवर का कंट्रोल नहीं रहता। जब तक वे कुछ समझ पाते तब तक हादसा हो जाता है। हबीब भाई ने बताया कई बार दो पहिया व चार पहिया वाहन फोरलेन की एक पट्टी से दूसरी पट्टी पर जाते हैं, ऐसे में रतलाम व मंदसौर तरफ से आने वाले वाहनों की रफ्तार तेज होने के कारण छोटे वाहन उनकी चपेट में आकर हादसों के शिकार हो जाते हैं।
कुछ मामलों में वाहन चालकों की लापरवाही मानी जा सकती है कि जिम्मेदारों ने भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं कर रखे हैं। चौपाटी चौराहे से दोपहर में हजारों स्कूली बच्चे गुजरते हैं। कई लोग बस पकड़ने की दौड़ में रहते हैं। यहां सर्कल नहीं होने के कारण वाहन तेज रफ्तार से निकलते हैं। इसके कारण हादसे होते हैं।
स्पीडब्रेकर के लिए जिम्मेदारों को लिखा है- औद्योगिक थाना प्रभारी जनक सिंह रावत ने बताया फोरलेन क्रॉसिंग पर स्पीड ब्रेकर बनाने के लिए संबंधित को पत्र लिखा है। ताकि गंभीर दुर्घटनाएं ना हो।
संकेतक व डिवाइडर रोक सकते हैं हादसे
सर्विस रोड व मुख्य मार्ग पर संकेतक लगाए जाना चाहिए। सर्विस रोड पर डिवाइडर बनाकर वाहनों की स्पीड को कंट्रोल किया जा सकता है। बसों में सवारी चढ़ाने व उतारने पर अंकुश लगाया जाए। दुकानों व होटलों के बाहर पार्किंग की उचित व्यवस्था। डिवाइडरों पर रेडियम व संकेतक लगने चाहिए।