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मान्यता मापदंड का सत्यापन एक अफसर के भरोसे, कॉपी-किताबों में स्कूलों की मोनोपॉली
निजी स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं अंतिम दौर में है। स्कूल संचालकों ने नए शिक्षा सत्र के एडमिशन शुरू कर दिए। बाजार में पाठ्यपुस्तकों की खरीदी-बिक्री शुरू हो गई। जिन स्कूलों की मान्यता खत्म हो रही है उन्होंने नवीनीकरण के आवेदन कर दिए। नए स्कूल खोलने की मान्यता के आवेदन भी आए है। इस महीने के अंत तक इनका भौतिक सत्यापन करके रिपोर्ट शासन को भेजना है। इसी आधार पर मान्यता मिलेगी। ऐसे में प्रशासन को अलर्ट होने की जरूरत है। रतलाम-मंदसौर में हाल ही में शिक्षा माफिया की पोल उजागर हुई। 8वीं की मान्यता पर कक्षाएं 10वीं तक चल रही थी। ऐनवक्त पर उसे कोचिंग बताकर बच्चों को परीक्षा से वंचित कर दिया तो कहीं मापदंड को दरकिनार कर स्कूल चलाए जा रहे हैं। जावरा में भी ऐसे माफिया है जो न केवल पाठ्यपुस्तक, यूनिफॉर्म की मोनोपॉली चलाते हैं बल्कि बिना मापदंड के ही स्कूल खोलकर बच्चों का भविष्य बिगाड़ने पर तुले हैं।
जावरा ब्लॉक में 140 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता है। इनमें से मौजूदा स्थिति में 126 ही चालू है। बाकी किन्ही कारणों से बंद हो गए। जो चल रहे है उनमें 35 हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूल है। बाकी मिडिल व प्राथमिक शालाएं है। इनमें से 27 स्कूल ऐसे है जिनकी मान्यता इस साल खत्म हो रही है, इसलिए उन्होंने नए शिक्षा सत्र की मान्यता लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए है । इनके अलावा 7 ऐसे आवेदन आए है जो पहली बार स्कूल खोलने की मान्यता लेना चाहते हैं। एक बार मान्यता मिलने पर तीन साल तक वह मान्य रहती है तथा चौथे साल में नवीनीकरण करवाना होता है। मान्यता देने के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद बीआरसीसी द्वारा सत्यापन करना होता है। इसमें स्कूल भवन, मैदान, फर्नीचर, खेल व पढ़ाई संबंधी सामग्री, फैकल्टी देखना होती है। इसी के आधार पर मान्यता मिलती है। लेकिन विडंबना ये है कि ये सत्यापन एक अधिकारी के जिम्मे होता है। जो उन्होंने लिख दिया वह सही। जबकि मान्यता के लिए एक कमेटी बनाकर सत्यापन करवाना चाहिए। इससे पारदर्शिता रहे। लेकिन ऐसी व्यवस्था नहीं होने से ही क्षेत्र में शिक्षा माफिया पनप रहे हैं। कई बार स्थानीय स्तर पर मापदंड पूरे नहीं होने की रिपोर्ट देने पर भी स्कूल संचालक रसूख और राजनीतिक पकड़ के सहारे जिला, संभाग या भोपाल स्तर से इस शर्त के साथ मान्यता लेकर आ अाते हैं कि जो कमियां है वह दो-तीन महीने में पूरी कर ली जाएगी। जबकि ऐसा होता नहीं है। विभाग के ही एक अधिकारी ने बताया वर्ष 2016-17 में जिले से 3 स्कूलों की मान्यता का प्रस्ताव भोपाल भेजा था। लेकिन वहां से 20 से अधिक स्कूल इसी शर्त पर मान्यता लेकर आए थे। यानी निचले स्तर पर सही जांच हो जाए तो ऊपर से बिना जांच के मान्यता दे दी जाती है। इस बार भी बीआरसीसी को ही 31 मार्च के पहले सत्यापन रिपोर्ट देना है। यदि इसमें मापदंड को नजरअंदाज किया जाता है तो नए सत्र में फिर से सैकड़ों बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। बीआरसीसी विवेक नागर का कहना है कि निष्पक्ष जांच कर सही रिपोर्ट देंगे।
मान्यता मापदंडों की जांच रेंडमली करेंगे : एसडीएम
राहुल धोटे, एसडीएम जावरा
दो स्कूलों की मान्यता रिजल्ट आते ही निरस्त होगी
नगर व ग्रामीण क्षेत्र में कई स्कूल गली-मोहल्लों में चल रहे है। जहां ना खेल मैदान ना अच्छी फैकल्टी। कई स्कूलों का डायवर्शन तक नहीं है। पिछले साल 1 नवंबर को सड़क हादसे में एक छात्र की मौत के बाद कलेक्टर ने एसडीएम के नेतृत्व में टीम बनाकर साईं पब्लिक स्कूल की जांच करवाई तो कई खामियां निकली। रिपोर्ट के मुताबिक ये स्कूल मापदंड पूरे नहीं करता, फिर भी चल रहा था। मान्यता निरस्ती का प्रस्ताव भेजा। नगर के तरुण काॅन्वेंट हाईस्कूल का प्रबंधन बीच सत्र में स्कूल बंद कर चला गया। अभिभावक प्रशासन के पास पहुंचा तो प्रशासन ने स्कूल का रिकाॅर्ड जब्त कर 18 बच्चों को दूसरे स्कूलों में दाखिला दिलाया और तरुण काॅन्वेंट की मान्यता निरस्त का प्रस्ताव भेजा। परीक्षा अंकसूची पर मौजूदा स्कूल का नाम रहेगा, इसलिए बीच में मान्यता निरस्त नहीं की। शिक्षा सहायक संचालक नरेंद्रसिंह राठौर ने बताया रिजल्ट आते ही दोनों की मान्यता निरस्त होगी।
दुकान विशेष से यूनिफॉर्म व पाठ्यपुस्तकें लेने की शिकायत
बुक सेलर भूपेंद्र डांगी ने एसडीएम को पत्र लिखकर शिकायत की। इसमें बताया नगर में कई सीबीएसई स्कूल एनसीईआरटी की जगह प्राइवेट प्रकाशकों की पाठ्यपुस्तकें लागू करके दुकान विशेष से खरीदने का दबाव बनाते हैं। इससे अभिभावकों का शोषण हो रहा। यूनिफॉर्म में भी ऐसा ही है। प्राइवेट प्रकाशकों की पुस्तकें वे लागू कर सकते हैं लेकिन दो महीने पहले उन्हें पाठ्यक्रम तय करके इसकी सूचना पटल पर चस्पा करना होती है। लेकिन स्कूल संचालक ऐसा नहीं करते। इसी से मोनोपॉली चल रही और बच्चे व अभिभावक ठगा रहे है। जबकि वे किसी भी बुक सेलर से पाठ्यपुस्तकें लेने के लिए स्वतंत्र है।