मप्र / रतलाम मंडल की 12 ट्रेनों से हटेंगे पावर कार जनरेटर कोच, सीधे इंजन से मिलेगी बिजली, 3 में होने लगा ट्रायल, यात्री कोच लगेंगे

Power car generator coaches to be removed from 12 trains
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Power car generator coaches to be removed from 12 trains

  • हेड ऑन जेनरेशन तकनीक से रेलवे ने किया बदलाव 

दैनिक भास्कर

Oct 19, 2019, 07:06 AM IST

रतलाम . दो माह बाद मंडल से चलने वाली 12 ट्रेनों में यात्रियों को अासानी से सीट मिलने लगेगी। रेलवे इन ट्रेनों के बल्व, एलईडी लाइट, पंखे और एयर कंडीशनिंग को बिजली सप्लाई करने वाले पावर कार जनरेटर कोच धीरे-धीरे हटा देगा। इसके लिए हेड ऑन जेनरेशन (एचओजी) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बाद सीधे इंजन से ही बिजली मिलने लगेगी।

 

इंजन में मोडिफिकेशन करने के बाद मंडल की तीन गाड़ियों में इसका ट्रायल शुरू हो गया है। इनमें इंदौर-पुरी, इंदौर-नागपुर, इंदौर-पूना एक्सप्रेस शामिल हैं। फिलहाल इनमें पावर कार जनरेटर कोच भी लगाए जा रहे हैं, ताकि तकनीकी दिक्कत आने पर यात्रियों को परेशानी न हो। ट्रायल पूरा होने के बाद इन्हें हटाकर प्रत्येक ट्रेन में रैंक कंपोजीशन के अनुसार सामान्य, स्लीपर या एसी के दो नए कोच लगाए जाएंगे। इससे प्रत्येक ट्रेन की यात्री क्षमता में 110 से 150 सीट का इजाफा हो जाएगा। 

 

इंदौर से चलने वाली तीन ट्रेनों को ट्रायल पर चलाया जा रहा है
 

मंडल के इंदौर स्टेशन से चलने वाली तीन ट्रेनों को नई तकनीक से ट्रायल के तौर पर चलाया जा रहा है। फिलहाल पावर कार लगाई जा रही है, ताकी तकनीकी समस्या आने पर यात्रियों को परेशानी न हो। ट्रायल सफल रहने पर पावर कार हटाकर नई यात्री कोच लगाए जाएंगे। इसी तरह 12 ट्रेनों में यह बदलाव किया जाना है। - आरएन सुनकर, मंडल रेल प्रबंधक

  •  वायु और ध्वनि प्रदूषण बिलकुल नहीं होगा। { पावर कार से होने वाला कार्बन उत्सर्जन में रुकेगा। अभी ट्रेनों में आगे-पीछे लगे दोनों पावर कार सालाना लगभग 650 से 700 मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन को करते हैं।
  •  डीजल की खपत भी कम हो जाएगी। अभी एक पावर कार में नॉन-एसी कोच में बिजली सप्लाई के लिए प्रति घंटे 40 लीटर डीजल की खपत होती है, जबकि एसी कोच के लिए यह मात्रा 65-70 लीटर तक होती है।

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