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दहशत / डेंगू से गरोठ के सरकारी अस्पताल के डॉक्टर की मौत, अफसर बच रहे



ratlam governement doctor died of dangue fever
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ratlam governement doctor died of dangue fever

  • जानलेवा हुई बीमारी मलेरिया अधिकारी बोले- डॉक्टर को इंदौर में हुआ था डेंगू

Dainik Bhaskar

Dec 06, 2018, 11:10 AM IST

मंदसौर. स्क्रब टाइफस, स्वाइन फ्लू के बाद जिले में अब डेंगू ने भी घातक रूप लिया है। डेंगू से गरोठ के सरकारी अस्पताल में पदस्थ एक डॉक्टर की उज्जैन में इलाज के दौरान मौत हो गई। मलेरिया विभाग अपनी नाकामी छिपाने के लिए डॉक्टर को इंदौर में डेंगू होने और इलाज में लापरवाही बरतने का दावा कर रहा है।विभाग के अनुसार डॉक्टर अपना इलाज खुद ही कर रहे थे। जिले में इस साल डेंगू से मौत का यह पहला मामला है।

 

जिले में तीन महीने से घातक बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। सितंबर में स्क्रब टाइफस के संक्रमण में आने से 28 गांवों के 53 लोग बीमार हुए थे। इससे भोपाल से विशेषज्ञों की टीम को यहां आना पड़ा और मरीजों की जांच कर बीमारी से संबंधित जानकारी दी। इसके बाद अक्टूबर से अब तक स्वाइन फ्लू 5 लोगों की जान ले चुका है। डेंगू के मरीज भी बढ़ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर एनएस-वन किट नहीं होने से लोगों डेंगू की जांच के लिए अन्य जिलों में जाना पड़ रहा है।

 

जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार जिले में अब तक डेंगू के 31 मरीज पॉजिटिव मिले हैं। इसी बीमारी ने गरोठ के सरकारी अस्पताल डॉक्टर को भी भी चपेट में ले लिया। उनकी मंगलवार रात को उज्जैन में इलाज के दौरान मौत हो गई। लगातार प्लेटलेट्स कम होने से उन्हें सोमवार को इंदौर रैफर किया गया था, लेकिन तबीयत ज्यादा खराब होने से रास्ते में ही उज्जैन के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा था।
 

मंदसौर में नहीं, बाहर से आ रही बीमारी : मलेरिया अधिकारी प्रेमलता डाबी का कहना है डेंगू का मंदसौर में प्रकोप नहीं है। यह बीमारी अधिकांश: इंदौर अथवा राजस्थान से आने वाले लोगों में ही हो रही है। अब तक हुई जांच में जो भी मरीज मिले हैं वे या तो हाल ही में इंदौर या राजस्थान जाकर आए थे। डॉ. चौहान भी इंदौर गए थे जहां उनकी भाभी को डेंगू हुआ था। डॉ. चौहान वहां 6 दिन रुके थे और भाभी का इलाज किया था। 30 नवंबर को वे मंदसौर आए और तभी से बीमार थे। शुरुआत में उनके प्लेटलेट्स की संख्या ढाई लाख तक थी लेकिन बाद में अचानक 14 हजार हो गई। इससे उन्हें रैफर किया था। डॉ. चौहान का इलाज गरोठ में ही चल रहा था।


जिले में 31 मरीज मिले, इनमें से 10 तो गरोठ क्षेत्र के ही हैं : डेंगू की चपेट में अब तक जिले में 31 मरीज आ चुके हैं। बीएमओ डॉ. केएस परिहार ने बताया 3 माह में 10 मरीज तो सिर्फ गरोठ क्षेत्र में ही मिले। इनमें से 3 मरीज ऐसे हैं जो इंदौर में अध्ययनरत हैं आैर शेष दूसरे राज्यों में कंबल बेचने का काम करते हैं। ये बारह से ही डेंगू संक्रमित होकर अाए हैं। जहां भी मरीज पाए गए हैं उन क्षेत्राें में फीवर सर्वे करवाने के साथ ही मच्छर नाशक का छिड़काव कराया है और लोगों को बीमारी की पहचान व बचाव संबंधी जानकारी भी दे रहे हैं।


यह रखें सावधानी

  • डेंगू से बचाव के लिए सभी अपने घरों या फिर आसपास सात दिन से ज्यादा पानी नहीं भरा रहने दें।
  • बुखार आने पर तत्काल जांच करवाएं।
  • डेंगू की पुष्टि होने पर लगातार प्लेटलेट्स की जांच कराते रहें।
  • ऐसी जगह जाने से बचें जहां यह बीमारी फैल रही है।
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