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4262 करोड़ का एस्टीमेट बनाने के बावजूद रेलवे शुरू नहीं कर पाया काम

9 महीने पहले
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  • रतलाम-बांसवाड़ा-डूंगरपुर नई रेल लाइन प्रोजेक्ट को एक और झटका
  • जमीन अधिग्रहण के बावजूद किसानों को मुआवजा राशि नहीं देना बना कारण

शिवेंद्र दुबे.रतलाम. जमीन अधिग्रहण के बावजूद किसानों को मुआवजा राशि नहीं देने के कारण 31 माह से बंद रतलाम-बांसवाड़ा-डूंगरपुर नई रेल लाइन प्राेजेक्ट को एक और झटका लगा है। रेलवे बोर्ड ने उत्तर पश्चिम रेलवे (एनडब्ल्यूआर) के रतलाम स्थित उपमुख्य अभियंता कार्यालय (निर्माण) को बंद करने का आदेश दे दिया है।

इतना ही नहीं उप मुख्य अभियंता (निर्माण) वायके अग्रवाल सहित सारे कर्मचारियों को राजस्थान सीमा में आने वाले अलग-अलग मंडलों में ट्रांसफर कर रिलीव कर दिया है। प्रोजेक्ट से जुड़े सारे दस्तावेज डूंगरपुर भेजे जा रहे हैं। अर्थवर्क, पुल-पुलियाओं के निर्माण सहित अब तक योजना पर 185 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। यह लाइन दिल्ली-मुंबई मुख्य लाइन के मोरवनी (रतलाम) स्टेशन के यहां जुड़ना है।

6 साल में बंद हो गया कार्यालय : उपमुख्य अभियंता निर्माण कार्यालय 2012-13 में बनना शुरू हुआ था, जो 2015-16 में बनकर तैयार हुआ। इसके पहले अभियंता रतलाम रेल मंडल कार्यालय की इंजीनियरिंग विंग में बैठते थे। शुरुआत में कार्यालय में उप मुख्य अभियंता सहित 15 लोगों का स्टाफ था। इनमें से 4 सेवानिवृत्त हो गए, 4 ने ट्रांसफर करा लिया। वर्तमान में उपमुख्य अभियंता, इंजीनियर, पॉथ-वे इंस्पेक्टर, बाबू सहित 7 का स्टाफ बचा था। इन्हें दूसरे मंडलों में भेजा गया है।

मप्र में 18 करोड़ रुपए का मुआवजा बंटना बाकी है
मप्र के हिस्से की 49 किमी में रेलवे गुड़भेली, फतेहपुरिया, पाटड़ी सहित सैलाना व शिवगढ़ में 175.56 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत कर चुका है। अर्थ वर्क जो ढाई साल से रुका है। जमीन के बदले 38 करोड़ रुपए का मुआवजा किसानों को देना था। राजस्थान सरकार से अब तक 20 करोड़ रुपए ही मिल पाए हैं। 18 करोड़ रुपए का मुआवजा बाकी है।

इसलिए बंद है योजना
तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत ने 200 करोड़ की राशि मंजूर की थी। जमीन अधिग्रहण के बाद 80 प्रतिशत मुआवजा बंट चुका था लेकिन भाजपा सरकार ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर बाकी 136 करोड़ रुपए देने से मना कर दिया था।

यहां बनना हैं स्टेशन - पलसोड़ी, शिवगढ़, चंद्राबेड़दा, सैराअलका खेड़ा, छोटी सरवन, अरबीथ खेडवी, कुंडला खुर्द, बांसवाड़ा, मतीरा, बजवाना, गढ़ी प्रतापपुर, बिलुड़ा, सागवाड़ा, जोधपुरा, टामटिया, नवागांव, मनपुर।

नई कोशिश भी असफल
2019 की शुरुआत में राजस्थान में कांग्रेस की नई सरकार बनने के बाद रेलवे ने बैंक एबिलिटी सर्वे करवाकर नया एस्टीमेट बनाया। इसमें लागत 4262 करोड़ रुपए हो गई थी। मार्च में सरकार की मंजूरी मिल जाती लेकिन लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई।

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