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मंदसौर / रावण प्रतिमा के सामने घूंघट में निकलती हैं महिलाएं



घूंघट लेकर गुजरती महिला। घूंघट लेकर गुजरती महिला।
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घूंघट लेकर गुजरती महिला।घूंघट लेकर गुजरती महिला।
  • नामदेव समाज के लोग मंदोदरी को मंदसाैर की बेटी और रावण को जमाई मानते हैं

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 03:04 AM IST

संजय जैन, मंदसौर.  देशभर में जहां रावण को राक्षस मानकर दशहरे पर उसका वध कर उत्सव मनाया जाता है वहीं मंदसौर में रावण की सालभर पूजा जाता है। महिलाएं खानपुरा में रावण की प्रतिमा के सामने से घूंघट निकालकर निकलती हैं। नामदेव समाज के लोग मंदोदरी को मंदसाैर की बेटी और रावण को जमाई मानते हैं।

 

रावण की प्रतिमा के पैर में एकातरा बुखार आने पर लच्छा बांधा जाता है, इससे लोगों का बुखार ठीक हो जाता है। संतान प्राप्ति के लिए भी लाेग रावण की पूजा करते हैं। दशहरा पर्व पर सुबह रावण प्रतिमा की पूजा की जाती है और शाम को प्रतीकात्मक वध किया जाता है। 


शहर के खानपुरा क्षेत्र में 41 फीट ऊंची रावण की प्रतिमा का इतिहास 400 साल पुराना बताया जाता है। पूर्व में पहले दो बार प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने के बाद 2005 में नपा ने यहां तीसरी बार प्रतिमा का जीर्णोद्धार कराया। नामदेव समाज के शहर में 300 से अधिक परिवार हैं वह मंदोदरी को शहर की बेटी मानते हैं और रावण को जमाई। सालभर समाजजनों द्वारा रावण की पूजा-अर्चना की जाती है।

 

दशहरे पर सुबह समाज के लोग ढोल-बाजे से साथ जाकर प्रतिमा की पूजा-अर्चना करते हैं वहीं शाम को गोधुलि वेला में रावण का प्रतीकात्मक वध किया जाता है। इतना ही नहीं विरोधस्वरूप वध के बाद समाज की महिलाओं द्वारा रावण की प्रतिमा पर प्रतीकात्मक रूप से पत्थर भी मारे जाते हैं। समाज के राजेश मेेड़तवाल ने बताया कि यहां मान्यता है कि रावण हमारे शहर का जमाई है इसलिए समाज की महिलाएं प्रतिमा के सामने से निकलते समय परदा कर लेती हैं।  
 

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