--Advertisement--

शिक्षा या व्यवसाय / एक माह की फीस नहीं दी तो बच्चों को बना दिया डिफाल्टर, पोर्टल व नोटिस बोर्ड पर लिख दिए नाम



इस तरह से नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक रूप से बच्चों के नाम के साथ डिफाल्टर शब्द जोड़ा। इस तरह से नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक रूप से बच्चों के नाम के साथ डिफाल्टर शब्द जोड़ा।
X
इस तरह से नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक रूप से बच्चों के नाम के साथ डिफाल्टर शब्द जोड़ा।इस तरह से नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक रूप से बच्चों के नाम के साथ डिफाल्टर शब्द जोड़ा।

  • केंद्रीय स्कूल का मामला, लीड बैंक मैनेजर बोले - बच्चों के लिए डिफाल्टर शब्द का उपयोग गाली के समान
  • बैंक भी लोन नहीं चुकाने वाले को पहले नोटिस देती है फिर खाता एनपीए होने के बाद उसे डिफाल्टर घोषित करती है

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 09:50 AM IST

मंदसौर. स्कूल में समय पर फीस जमा नहीं कर पाने वाले बच्चों को बैंक व स्कूल प्रबंधन द्वारा डिफाल्टर घोषित करने का मामला सामने आया है। स्कूल प्रबंधन बैंक द्वारा पोर्टल पर बच्चों को डिफाल्टर संबोधित करने के चलते नोटिस बोर्ड पर भी डिफाल्टर लिखने की बात कह रहे हैं। बैंक प्रबंधन पोर्टल स्कूल प्रबंधन द्वारा आॅपरेट करने की बात कहते हुए जानकारी बैंक द्वारा अपडेट नहीं करने की बात कह रहे हैं। मामले में लीड बैंक मैनेजर किसी भी हाल में बच्चों के लिए डिफाल्टर शब्द को गाली के समान बताते हुए किसी भी बच्चे को डिफाल्टर नहीं लिखने की बात कह रहे हैं।

11 बच्चों के नाम

  1. मंदसौर स्थित केंद्रीय विद्यालय के बच्चों की फीस यूनियन बैंक में आॅनलाइन या फिर चालान के माध्यम से जमा की जाती है। जिन बच्चों के अभिभावक निर्धारित तारीख तक फीस जमा नहीं कर पाते, उनको पोर्टल व स्कूल बोर्ड में डिफाल्टर घोषित कर अपमानित किया जा रहा है। इतना ही नहीं बैंक की पोर्टल पर भी बच्चों को डिफाल्टर लिखा है। इसमें कक्षा पांचवीं के करीब 11 बच्चों के नाम हैं। मामले का खुलासा स्कूल पहुंचे एक पालक ने ही किया। उन्होंने मामले में एक शिक्षक के सामने आपत्ति भी दर्ज कराई। इसके बाद प्रबंधन की बैठक भी हुई लेकिन बैठक में लिए निर्णय का खुलासा नहीं किया गया।

  2. बैंक से लोन लेकर किस्त नहीं भरने वाले कस्टमर को भी बैंक खाता एनपीए होने तक डिफाल्टर घोषित नहीं करती। बैंक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार जब कोई व्यक्ति लोन की किस्त तीन से चार माह तक जमा नहीं करता तो उसे नोटिस भेजे जाते हैं ताकि वह लोन की किस्त जमा कर दे। छह माह या फिर इसके बाद भी लगातार किस्त जमा नहीं करने पर कस्टमर का खाता एनपीए हो जाता है। इसके बाद उसे डिफाल्टर घोषित किया जाता है। यहां तो बच्चों को एक माह की किस्त जमा नहीं करने पर ही डिफाल्टर घोषित कर दिया। जबकि फीस जमा नहीं होने पर उनकी किसी प्रकार की कोई गलती नहीं है।
     

     

    फीस जमा नहीं होने की स्थिति में बैंक ही बच्चे को डिफाल्टर घोषित करती है। पोर्टल पर डली जानकारी के आधार पर बच्चों के पालकों को पैनाल्टी ना लगे इसलिए नोटिस बोर्ड पर उनके नाम लिखे जाते हैं। बैंक पोर्टल पर डिफाल्टर शब्द का प्रयोग करती है तो हमारे यहां भी सूचना पटल पर डिफाल्टर लिख दिया जाता है।

    प्रियदर्शन गर्ग, प्राचार्य केंद्रीय विद्यालय, मंदसौर


     

    हमने स्कूल की फीस जमा करने के लिए केंद्रीय विद्यालय से टाइअप किया है। उन्हें एक यूनिक आईडी दिया है। इससे बच्चों के पालक ऑनलाइन या फिर बैंक खाते में फीस जमा कर सकते हैं। पोर्टल को भी स्कूल ही संचालित करता है। हमने किसी बच्चे को डिफाल्टर घोषित नहीं किया। यह स्कूल ने ही किया है। हमारे पास तो बच्चों के नामों की सूची भी नहीं है।

    संदीप मीणा, यूनियन बैंक मैनेजर

     

    बैंक किसी को भी डिफाल्टर घोषित करने से पहले उसे पूरा मौका देती है। यह एक गाली के समान है। बच्चों के नाम के आगे डिफाल्टर लिखना बहुत ही गलत काम है। मामले में जांच की जाएगी, दोषी होने पर कार्रवाई भी की जाएगी

    एम.एल. उपाध्याय, लीड बैंक मैनेजर, मंदसौर

    मामला मेरे संज्ञान में अभी आया है। बच्चों को डिफाल्टर संबोधित करना बहुत ही गलत बात है। मैं प्रिंसिपल से स्पष्टीकरण मांगता हूं।

    ओपी श्रीवास्तव, कलेक्टर

     

Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..