जिला चिकित्सालय / राज्य सहायता निधि में हुए घोटाले का केस ही खत्म, पुलिस बोली - राशि का नहीं हुआ गलत उपयोग



The case of the scam in the state aid fund is over
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The case of the scam in the state aid fund is over

  • चार माह पहले संभागायुक्त के कहने पर सीएमएचओ ने लेखापाल के खिलाफ दर्ज करवाया था मामला

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2019, 11:30 AM IST

रतलाम. राज्य सहायता निधि में अस्पतालों को जारी होने वाली राशि में वित्तीय अनियमितता के मामले में पुलिस लेखापाल पर दर्ज प्रकरण को खत्म करने की तैयारी कर रही है। पुलिस का मानना है अस्पताल को गलती से राशि जारी की गई जो वापस आ गई। इसका गलत उपयोग होता तो अपराध होता। इधर, सीएमएचओ ने मामले में विभागीय जांच होने की बात कही है।

 

राज्य सहायता निधि में निजी अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से राशि जारी होती है। ऐसे प्रकरणों में विभाग में पदस्थ लेखापाल केके बाथम ने किसी अस्पताल को दो-दो बार राशि जारी कर दी थी तो किसी अस्पताल को कम राशि दी। खुलासा तब हुआ जब राशि के संबंध में प्रतिवेदन बनाया। गलत भुगतान के बारे में पता चला।

 

तत्कालिन संभागायुक्त एमबी ओझा के आदेश पर सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर ननावरे ने लेखापाल केके बाथम के खिलाफ स्टेशन रोड थाने में 4 अक्टूबर को प्रकरण दर्ज करवाया। पुलिस ने जांच में अस्पताल में बिलों का मिलान किया व पूछताछ की। स्टेशन रोड थाना टीआई राजेंद्र वर्मा ने बताया जांच के दौरान कोई आपराधिक कृत्य नहीं मिला है। जो राशि दूसरे खातों में डल गई थी वह वापस आ गई। ऐसे में प्रकरण का खात्मा किया है।

इन मामलों में जारी हुई कम-ज्यादा राशि

  • मई 2016 में वडोदरा के वेलफेयर हॉस्पिटल को मरीज राजेश पिता रामचंद्र के उपचार के लिए 1 लाख 62 हजार रुपए का भुगतान करना था लेकिन लेखापाल ने भंडारी अस्पताल इंदौर को 1 लाख 62 हजार रुपए जार कर दिए।
  • अप्रैल 2016 में लेखापाल ने भंडारी अस्पताल इंदौर को 5 लाख 59 हजार रुपए के बजाए 1 लाख 94 हजार रुपए का ही भुगतान किया।
  • जून व अगस्त 2016 में सीएचएल अस्पताल इंदौर को एक मरीज के नाम दो बार 81-81 हजार रुपए दे दिए।
  • नवंबर 2016 में एक आदेश पर वडोदरा के बैंकर्स हार्ट इंस्टिट्यूट को 1 लाख रुपए जारी करना थे। लेखापाल ने जनवरी 2017 को इंस्टिट्यूट को 1 लाख रुपए जारी किए। इसी आदेश पर नवंबर 2016 को उसी अस्पताल को 1 लाख जारी कर दिए।


कोर्ट लेती है प्रकरण के खात्मे पर अंतिम निर्णय : उपसंचालक अभियोजन एस.के. जैन ने बताया एफआईआर के बाद पुलिस जांच रिपोर्ट बनाती है। पुलिस को लगता है अपराध नहीं पाया है तो खारजी रिपोर्ट पेश की जाती है। अपराध के साक्ष्य नहीं मिलने अथवा अपराधी का पता नहीं चलने पर कोर्ट में खात्मा रिपोर्ट पेश होती है। पुलिस रिपोर्ट को कोर्ट खारित कर धारा 190 (सीआरपीसी) में मामले को संज्ञान में लेकर कार्रवाई के निर्देश दे सकती है। अंतिम निर्णय कोर्ट ही लेती है।

 

प्रकरण का खात्मा हो गया है। अभी कोर्ट में पेश नहीं किया है। 17 के बाद कोर्ट में पेश करेंगे। इसमें कोई आपराधिक कृत्य नहीं होना पाया है। चालान योग्य साक्ष्य नहीं मिले हैं। आरोप था कि दोबारा जारी राशि कर दी। इसकी जांच की है। राशि का गलत उपयोग नहीं किया। यह लेखा संबंधी त्रुटि थी।

राजेंद्र वर्मा, टीआई, थाना स्टेशन रोड

 

राज्य सहायता निधि के मामले में विभागीय गलती पकड़ी थी। फिलहाल प्रकरण खत्म होने की जानकारी नहीं है। उज्जैन से भी जांच चल रही है। जो भी विभागीय कार्रवाई होगी वह जांच के बाद होगी।

डॉ. प्रभाकर ननावरे, सीएमएचओ


 

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