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सुख का सीधा संबंध व्यक्ति की साधना और सत्संग से है

3 वर्ष पहले
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श्री जिनचंद्रसागरसूरिजी मसा ने कहा
8 दिसंबर को होगा माला रोपण का आयोजन

भास्कर संवाददाता | रतलाम

दुनिया के सभी प्राणियों का अंतिम लक्ष्य सुख है। यह नहीं भूलना चाहिए कि जिसके पास जितनी ज्यादा सामग्री होती है, वह उतना खिन्न और अशांत होता है। साफ अर्थ और अनुभव यह है कि साधन बढऩे से सुख का संबंध नहीं है। सुख का सीधा संबंध ऊंची समझ से है, जो साधना और सत्संग से विकसित होती है। सच्चा सुख निवृत्ति में है। प्रवृति में किसे सुख मिल पाया है ? यही सबसे बड़ी भूल है।

यह बात जिनशासनर| श्री जिनचंद्रसागरसूरीजी मसा बन्धु बेलड़ी ने नियमित व्याख्यान में गुरुवार को कहा। उन्होंने कहा जिससे दुख सहन नहीं होता है, उसे अधिक दुखी व्यक्ति देखने पर खुद कम महसूस होने लगता है। दुख हमारी समझ पर निर्भर करता है। समझ अच्छी है तो कितनी भी विपरीत परिस्थिति हो यह हमेंं विचलित नहीं कर पाती। हमेें अपनी समझ विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। परमात्मा की वाणी को आत्मसात करते हुए साधना के पथ पर नित्य निरंतर गति करने से बेहतर कोई मार्ग नहीं है। हमारा प्रयास यह होना चाहिए कि हम मजबूरी नहीं बल्कि विवेक पूर्ण समझ का उपयोग करते हुए अपनी मंजूरी से पाप कर्म को त्यागने के लिए स्वत: प्रेरित हो।

उपधान तप की अंतिम विभाग की साधना आज से
आचार्यश्री की निश्रा में जयंतसेन धाम पर 45 दिनी उपधान तप अब पूर्णता की ओर अग्रसर है। शुक्रवार से साधना का चौथा अंतिम विभाग प्रारंभ होगा। इसके लिए सुबह विधिविधान से पूजन होगा। जिसके बाद सभी तपस्वी साधना के अंतिम विभाग में आचार्यश्री से आशीष लेकर तप के अंतिम दौर में प्रवेश करेंगे। उपधान तप की पूर्णता पर 8 दिसंबर को मालारोपण का आयोजन होगा।

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