बयान / केंद्रीय मंत्री गेहलोत बोले- थाना प्रभारी जरूरी होने पर ही एससी-एसटी एक्ट में गिरफ्तार करेगा

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2018, 08:53 AM IST


Union minister thavarchand gehlate statement on SCST act
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Union minister thavarchand gehlate statement on SCST act
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  • कहा- जिन्होंने एट्रोसिटी एक्ट पढ़ा नहीं, वही कर रहे विरोध

नागदा. केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावरचंद गेहलोत का कहना है कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन का विरोध वही लोग कर रहे हैं, जिन्हें एक्ट में हुए बदलाव की पूरी जानकारी नहीं है। असल में जो संशोधन किया है, उससे किसी भी वर्ग या समुदाय का अहित नहीं होता।

 

अग्रिम जमानत का प्रावधान समाप्त करने को मुद्दा बनाया जा रहा है, जबकि असल में इस तरह के प्रावधान तो विभिन्न एक्ट में पहले से हैं, जिसमें अग्रिम जमानत नहीं होती है। बावजूद कोर्ट के पास विवेकाधिकार है वो प्रकरण की परिस्थिति अनुसार निर्णय ले सकती है। संशोधित एक्ट में यह प्रावधान भी है कि थाना प्रभारी आवश्यक होने पर ही संबंधित आरोपी को गिरफ्तार करेगा। भ्रम यह फैलाया जा रहा है कि एट्रोसिटी एक्ट में सीधे गिरफ्तारी ही होगी, जो कि गलत है।

 

शनिवार को गेहलोत ने नागदा में पत्रकारों से चर्चा में कहा कि पूर्व में डीएसपी स्तर के अधिकारी एससी-एसटी एक्ट के मामले की जांच करने के लिए अधिकृत थे। अब ऐसे मामलों की जांच थाना प्रभारी या एसआई भी कर सकेंगे। इससे सुलभ न्याय की अवधारणा मजबूत होगी। पत्रकार वार्ता म.प्र. कामगार बोर्ड अध्यक्ष सुल्तानसिंह शेखावत के निवास पर हुई। 

 

आरक्षण जरूरी, विधायक, सांसद हो या मंत्री जरूरी नहीं हमेशा मौका मिले : उच्च पदों पर पहुंच चुके लोगों को आरक्षण से बाहर करने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने जवाब दिया कि जो मंत्री, सांसद, विधायक बन गया वो हमेशा रहेगा। कई नेताओं की हालत इतनी बुरी है कि वे सड़कों पर भटक रहे हैं। इसके बाद कलेक्टर, डॉक्टर या अन्य ब्यूरोक्रेट को एलपीजी सिलेंडर की तरह ही आरक्षण छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा अगर ऐसा कोई प्रस्ताव आया तो विचार करेंगे।

 

आंकड़ों में खुद ही उलझ गए मंत्री : एट्रोसिटी एक्ट के दुरुपयोग के सवाल को भी गेहलोत ने सिरे से खारिज कर दिया। गेहलोत यह दावा भी कर गए कि नेशनल क्राइम ब्यूरो की 2015 की रिपोर्ट में 15 हजार में से मात्र 800 मामले ही फर्जी पाए गए। असलियत यह है कि 15 हजार में से 8 हजार 900 मामले फर्जी होने की रिपोर्ट नेशनल क्राइम ब्यूरो ने ही जारी की है।

 

यानी एट्रोसिटी एक्ट के तहत 2015 में देशभर में दर्ज आधे से ज्यादा मामले झूठे पाए गए। एक सवाल के जवाब में गेहलोत ने दावा किया कि अगर एक्ट में जनहित नहीं सध रहा होता तो निर्वाचित 543 में से 412 सवर्ण, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के सांसद इसका विरोध करते, मगर ऐसा नहीं हुआ। गेहलोत ने सीधे-सीधे यह आरोप भी लगाया कि कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, विशेषकर मध्यप्रदेश में इसका विरोध सुनियोजित है। 

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