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प्राचीन बावड़ी से बुझाई जा रही गांव की प्यास

जलस्रोतों में नाममात्र का बचा पानी, वहीं प्राचीन बावड़ी में अभी भी पर्याप्त पानी है बनवार | इस बार सूखा के कारण भले...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:10 AM IST

जलस्रोतों में नाममात्र का बचा पानी, वहीं प्राचीन बावड़ी में अभी भी पर्याप्त पानी है

बनवार | इस बार सूखा के कारण भले ही जलस्रोतों में तलहटी में पानी पहुंच गया है लेकिन कई गांव में बनी प्राचीन बावड़ियां में पर्याप्त पानी है। जो बारह माह ग्रामीणों के लिए पेयजल उपलब्ध कराती हैं। क्षेत्र के चिलौद, रमपुरा, झरौली, सिमरी, खुदा मुवांर, झरौली में प्राचीन बावड़ी किसी वरदान से कम नहीं हैं। ग्रामीणों द्वारा इन जल स्रोतों की उपयोगिता को समझने की बजह से वावली को सहेजने के साथ समय-समय पर साफ सफाई व गहरीकरण भी सामूहिक प्रयासों के द्वारा किया जाता है। जिससे लोगों को भीषण जल संकट के दौर में भी कम से कम पीने का पानी उपलब्ध हो जाता है। जल संकट के इस दौर में चिलौद की दो हजार की आबादी के लिए पेयजल का एकमात्र स्त्रोत केवल बावड़ी है। जबकि अन्य जलस्रोतों में नाममात्र का पानी बचा है। वहीं हैंडपंप भी पानी की जगह हवा फेंकने लगे हैं।

इस समय फरवरी माह में ही गांव-गांव में जलसंकट का दौर शुरू हो गया है। जिससे लोग दूर-दूर से पानी लाने विवश हैं। इसके बावजूद भी लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर चिलौद, रमपुरा, झरौली, सिमरी, खुदा मुवांर, झरौली सहित एक दर्जन गांव में इन प्राचीन बावड़ियों में अब भी पानी की झिर बनी हुई है।

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Web Title: प्राचीन बावड़ी से बुझाई जा रही गांव की प्यास
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