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बांदकपुरधाम में जागेश्वरनाथ ने किया फूलों का श्रृंगार

बुंदेलखंड के प्रमुख तीर्थ क्षेत्र बांदकपुर धाम में होली की परमा धुरेड़ी के दिन भक्तों ने देव श्री जागेश्वरनाथ के...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 07:10 AM IST
बुंदेलखंड के प्रमुख तीर्थ क्षेत्र बांदकपुर धाम में होली की परमा धुरेड़ी के दिन भक्तों ने देव श्री जागेश्वरनाथ के दिव्य स्वयंभू शिवलिंग पर फूल वर्षाकर होली खेली।

बांदकपुर धाम में भगवान के दर्शन लाभ के साथ- साथ फूलों की होली भक्ति भाव के साथ खेली गई। जिसमें भगवान की पूजन अभिषेक के बाद फूलों की बारिश करके भगवान पर अबीर गुलाल रंगों की फुहार छोड़ी गई। भगवान के साथ रंगों फूलों के रंगोत्सव पूजन में मंदिर समिति प्रबंधक रामकृपाल पाठक सहित पुजारी दुर्गेश पंडा, रामबाबू तिवारी ने भगवान की रंगोत्सव में विशेष पूजन अर्चना की। वहीं राम गौतम सहित भक्तों ने फूलों की होली खेली। रंगोत्सव पर्व में भगवान की रंगों फूलों से श्रंगार दर्शन की छवि बड़ी ही मनोरम लग रही थी और देवलोक की होली की अनोखी छठा के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ मंदिर परिसर में लगी हुई थी। जागेश्वरनाथ के संग होली के बाद ग्राम में रंगोत्सव पर्व शुभारंभ हुआ।

बांदकपुर धाम में जागेश्वरनाथ जी का फूलों से का श्रंगार किया गया।

गांव की गलियों में फागुन की धुनों पर जमकर थिरके युवा

बनवार। होलिका दहन के दूसरे दिन धुरेड़ी को फागुन की धुनों में मदमस्त युवा, बच्चों, बूढ़ों पर फागों का रंग सिर चढ़कर बोल रहा था। बुंदेलखंड लोककला संस्कृति फागों से माहौल रोमांच से सराबोर हो गया था। नगढ़ियों की धुन ढोलक की थाप पर नाचते- नाचते फागों गाते हुई टोलियां फागों के आनंद में मदमस्त किए जा रही थीं। दोपहर तक ग्राम के धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर फागों रंगों का आनंद उत्सव समापन की ओर था तो ग्राम खड़ेरा टोरिया के सिद्ध स्थल में पूरा गांव फागों के आनंद उत्सव के लिए एकत्रित हुआ और बुंदेलखंड की पुरातन परंपरा फागों के आनंद लिया। सिद्धधाम गंगा झिरिया बीजाडोंगरी में पुरातन परंपरानुसार ग्राम के धार्मिक स्थल खेरमाई मंदिर रामजानकी मंदिर में सुबह से गुलाल चढ़ाते हुए फागों की टोलिया दोपहर तक गंगा झिरिया सिद्धधाम पहुंची। मोहन नायक, माखन सिंह, बाबू सिंह, भोपाल सिंह, भुजी विश्वकर्मा, माधव विश्वकर्मा चित्तर सिंह, जगत सिंह, भगवत सिंह, हल्के ने बताया कि हमारी धर्म संस्कृति में होने वाले पर्व कोई न कोई सदभाव सौहार्द का संदेश लेकर आते हैं और हमारी पुरातन लोक कला संस्कृति इन पर्वों में भाईचारे सदभाव के माहौल को जीवित रखती चली आ रही। इसलिए फागों व रंग गुलाल सबसे पहले धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर भगवान को गुलाल चढ़ाकर आनंद उत्सव के लिए फाग गाते हैं फिर गांव के चौराहों मोहल्लों में सभी लोग सौहार्द के साथ फागें गाते हुए आनंद उत्सव मनाने मनाते हैं।