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99% सटीक फैसले देने वाले वीएआर को यूईएफए ने बताया

99% सटीक फैसले देने वाले वीएआर को यूईएफए ने बताया कन्फ्यूजिंग, कहा- दर्शकों को समझ नहीं आती यह टेक्नोलॉजी ...

Danik Bhaskar

Mar 01, 2018, 02:00 AM IST
99% सटीक फैसले देने वाले वीएआर को यूईएफए ने बताया कन्फ्यूजिंग, कहा- दर्शकों को समझ नहीं आती यह टेक्नोलॉजी

एजेंसी | लंदन

क्रिकेट के डीआरएस सिस्टम की तरह फुटबॉल में वीएआर (वीडियाे असिस्टेंट रेफरी) काफी सफल है। इसके इस्तेमाल होने के बाद से गोल और ऑफसाइड के फैसले 99% तक सटीक हो गए हैं। पर यूरोपीय फुटबॉल एसोसिएशन (यूईएफए) को यह रास नहीं आ रहा है। यूईएफए ने इसे कन्फ्यूजिंग बताकर अगले साल चैंपियंस लीग में इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया है।

यूईएफए प्रेसीडेंट एलेक्जेंडर सेफेरिन ने कहा, ‘वीएआर में बहुत कन्फ्यूजन है। दर्शक वीएआर स्क्रीन पर देर तक देखते रहते हैं, लेकिन यह किसी को समझ नहीं आता कि हो क्या रहा है। वे कभी नहीं समझ पाते कि कोई निर्णय क्यों बदला या क्यों नहीं बदला। इसलिए हम इसे अगले साल होने वाले चैंपियंस लीग में इस्तेमाल नहीं करेंगे। मेरा मानना है कि वीएआर सही प्रोजेक्ट है। पर हमें इसे लागू करने के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।’ वीएआर सिस्टम का इंग्लैंड के एफए कप समेत दुनिया के कई टूर्नामेंट में इस्तेमाल हो रहा है। अंडर-19 वर्ल्ड कप में भी इसका ट्रायल हुआ था। हालांकि, यूईएफए के विरोध के बावजूद इसी साल रूस में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप में वीएआर का इस्तेमाल लगभग तय है। फीफा अध्यक्ष गियानी इन्फैंटिनो ने कहा, ‘हम लोगों की समझ के आधार पर फैसला नहीं ले सकते। फैसला लेने के लिए तथ्यों का आधार चाहिए होता है। तथ्य यह है कि इस टेक्नोलॉजी का दो साल में 1000 से अधिक मैचों में इस्तेमाल हुआ। इस दाैरान 93% से 99% तक सटीक निर्णय लिए गए। इन सटीक निर्णय वीएआर की वजह से लिए जा सके। इसलिए पूरी संभावना है कि रूस में होने वाले वर्ल्ड कप में भी इसका इस्तेमाल हो। हम इस बारे में अंतिम निर्णय इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड की मीटिंग में लिया जाएगा। अगर हम यह चाहते हैं कि वर्ल्ड कप निर्णय रेफरी के गलत निर्णय से ना हो तो हम वीएआर जरूर लागू करना चाहेंगे।’ वर्ल्ड कप 14 जून से होना है।

क्रिकेट के डीआरएस सिस्टम की तरह है वीएआर टेक्नोलॉजी, फुटबॉल में रिव्यू के लिए होती है इस्तेमाल

वीएआर, जिसका निर्णय स्टेडियम से बाहर होता है

वीएआर , वैसे तो यह क्रिकेट के डीआरएस सिस्टम की तरह वीडियाे आधारित सिस्टम है। पर इसका निर्णय लेने वाला रेफरी स्टेडियम में मौजूद नहीं होता। इसके लिए लंदन में एक स्पेशल ऑफिस बनाया गया है। वहां रेफरी और उसके सहयोगी बैठते हैं। वे मैदान से आने वाले वीडियो फीड के आधार पर निर्णय देते हैं। वीएआर के निर्णय में औसतन डेढ़ मिनट लग जाते हैं। इस देरी की वजह से भी इसकी आलोचना होती रही है।

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