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रोजगार के अभाव में घर छोड़कर महानगर जा रहे गरीब परिवार

सत्तार खान /पंकज नायक| जतारा प्रशासन के लाख दावों के बावजूद मनरेगा स्कीम भी मजदूरों को रोजगार देने में असफल...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:45 AM IST
सत्तार खान /पंकज नायक| जतारा

प्रशासन के लाख दावों के बावजूद मनरेगा स्कीम भी मजदूरों को रोजगार देने में असफल साबित हो रही है। रोजगार के अभाव में गरीब तबके के लोग पलायन को मजबूर हैं।

बच्चों और प|ी को साथ लेकर रोजगार की तलाश करने जा रहे मजदूरों और किसानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यहां बंद कमरों में होने वाली अधिकारियों की बैठकें नुमाइशी साबित हो रही हैं। चेहरे पर मायूसी और बिलखते बच्चों को देखकर यहां लोगों के मुंह से भी आह निकलती है। अब देखना है कि सूखा और गरीबी की मार झेल रहे मजदूरों का पलायन रोकने के लिए यहां प्रशासन मैदानी कार्यों को कहां तक अंजाम देता है। पानी की कमी के कारण सूखा की मार झेल रहे किसान और मजदूर रोजगार के अभाव में दिन गुजार रहे हैं। मजदूरी न मिलने से ग्रामीण गांव छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। सूखा की मार से परेशान मजदूरों ने प्रशासन द्वारा रोजगार न मिलने पर नाराजगी जाहिर की है। निकटवर्ती ग्राम ताल लिधौरा, कंदवा, सगरवारा, जरुआ करमौरा, उदयपुरा, सिमरा, मवई सहित ऐसे अनेक गांव हैं, जहां घरों पर ताले लटके नजर आने लगे हैं। मजदूर रोजगार के अभाव में यहां से अपने परिवार को साथ लेकर पलायन कर पंजाब दिल्ली मथुरा चंडीगढ़ सहित अन्य जगहों के लिए जा रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि पेट की खातिर उन्हें बाहर जाना पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी, लेकिन क्या करें मजबूरी है। गांवों में रोजगार नहीं मिल रहा है, जो गांवों में लोग मौजूद हैं। यदि प्रशासन ने रोजगार नहीं उपलब्ध कराया तो आने वाले समय में यह भी यहां से पलायन कर जाएंगे।

गौरतलब है कि शासन की मंशा अनुसार मनरेगा के अंतर्गत ग्रामों में लोगों को सौ दिन का रोजगार मिलना चाहिए। लेकिन यह योजना केवल कागजों में चल रही है। हकीकत में कुछ भी नहीं किया जा रहा है, जिस कारण ग्रामीणों को पलायन करना पड़ रहा है। ग्रामीण रामप्रसाद, जगदीश, कंछेदीलाल, अमृत पटेल का कहना है कि रोजगार दिलाने के बढ़े.बढ़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम काज नहीं दिखाई दे रहा है।

दाने.दाने को मोहताज किसान और मजदूर:गांवों में रहने वाले मजदूर और किसान रोजगार के अभाव में दाने.दाने को मोहताज बने हुए हैं। बस स्टैंड जतारा पर आने वाले मजदूरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस संबंध में प्रशासनिक

रोजगार का नहीं हो रहा भुगतान

गांवों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयास जमीनी स्तर पर नजर न आने से ग्रामीणों का पलायन जारी बना हुआ है। कहा जा रहा है कि जिन लोगों ने यहां पूर्व में पंचायतों में कामकाज किया था। उनका भुगतान भी कई ग्रामों में नहीं किया गया। किसानों की समस्याओं को लेकर पूर्व में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने प्रदर्शन कर ज्ञापन भी सौंपे, लेकिन अब तक इसके बाद भी संतोषजनक परिणाम सामने नहीं आए हैं।